Saturday, September 25, 2021
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छत्तीसगढ़ :संप्रेक्षण गृह में प्लास्टिक पाइप से 50 बार पीट कर नए बच्चों का होता है स्वागत

दुर्ग. अपचारी बालक से बाल संप्रेक्षण गृह में अमानवीय व्यवहार करने का मामला सामने आया है। किशोर न्याय बोर्ड से बालक ने अपनी आपबीती साझा की थी। मामले को गंभीरता से लेकर मजिस्ट्रेट के आदेश पर पीड़ित अपचारी की ओर से पुलगांव पुलिस ने जिला बाल कल्याण अधिकारी कवल साहू और परामर्श दाता गोपीचंद साहू समेत 7 लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

बोर्ड को बच्चे ने बताया, हर बार ऐसे ही किया जाता है स्वागत

  1. पुलिस ने किसी भी मामले में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की है। इस तरह प्रकरण सामने आने पर संप्रेक्षण गृह अधिकारियों पर लगने वाले आरोपों की पुष्टि हो गई है। पुलगांव स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में अलग-अलग मामलों में अनेक अपचारी बंद है। जिसकी देखरेख करने के लिए बाल कल्याण अधिकारी से लेकर केयर टेकर की जिम्मेदारी है। पहले भी इनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने धारा 323 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत दो एफआईआर दर्ज की हैं।
  2. बाल संप्रेक्षण गृह में रह चुके किशोरों ने बताया, जब भी कोई बालक किसी भी अपराध के आरोप में संप्रेक्षण गृह में प्रवेश करता है तो उसका साथी बालक 50 बार पाइप मारकर उसका स्वागत करते हैं। यह हमेशा से होते आ रहा है। पुलगांव थाना क्षेत्र में ही करीब दो महीने पहले लूट के आरोप में अपचारी बालक को पुलिस ने जुवेनाइल कोर्ट में पेश कर बाल संप्रेक्षण गृह भेजा था। अपचारी बालक ने शिकायत में कहा कि उसके पहुंचते ही संप्रेक्षण गृह के स्टॉफ ने दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। रोजाना किसी न किसी उसके साथ मारपीट की जाने लगी।
  3. इनके खिलाफ थाने में दर्ज हुआ प्रकरण 
    • 24 जून को बाल कल्याण अधिकारी कवल साहू, परामर्शदाता गोपीचंद साहू, केयर टेकर कांता श्रीवास, मनोज साहू ने मारपीट करने के बाद किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी दी। पेशी के दौरान मजबूर होकर बालक ने खुलासा किया।
  4. बाल संप्रेक्षण गृह में होने वाले कारनामे जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान, इन मामलों से खुल गई पोल

    घूस नहीं देने पर किशोर की पिटाई के मामले की जांच

    • छेड़छाड़ी के आरोपी में एक किशोर पिछले साल बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचा। आते ही पाइप से पिटाई की गई। इसी बीच ठीक तरीके से रहने के लिए संप्रेक्षण में रहने की फीस मांग गई। जब उससे पैसे देने से इंकार कर दिया तो उसे अन्य साथियों के माध्यम से यातनाएं दी जाने लगी। उसी दौरान संप्रेक्षण गृह के स्टॉफ ने वसूली के लिए परिजनों से बात भी कराई। इसके चलते तत्कालीन अधीक्षक पर घूस का आरोप भी लगा। मामले की अभी राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग में जांच चल रही है। इस संबंध में आयोग की ओर नोटिस भी भेजा गया है।
  5. तंग आकर किशोर ने की थी सुसाइड की कोशिश
    •  पिछले साल अक्टूबर महीने में बाल संप्रेक्षण गृह में रहने वाले अपचारी बालक ने फांसी लगाकर खुदकुशी करने का प्रयास किया। अपचारी बालक को कुछ होता उससे पहले ही संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों की नजर पड़ गई। उस दौरान बालक बेसुध हो गया और गले फंदे के निशान बन गए। इस पर संप्रेक्षण गृह प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से उसका निजी अस्पताल में इलाज भी कराया। हालांकि तत्कालीन बाल संप्रेषण गृह के प्रभारी अधीक्षक सुमीत ने अपचारी बालक के फांसी लगाने की बात का खंडन किया। अस्पताल में भर्ती की बात स्वीकारी थी।
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