Thursday, September 23, 2021
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सूरत की महुआ तहसील के 5 गांवों में 30 दिन में 107 मौत, केवल 39 का कोरोना टेस्ट

महुआ तहसील के शेखपुर गांव में कोरोना से हुई मौतों की रियालिटी चेक करने के लिए भास्कर की एक टीम गांव में गई थी। वहां जयंतीभाई के घर में ताला लटका हुआ था। इस बारे में पूछने पर पता चला कि पूरे परिवार की कोरोना से मौत हो गई। सबसे पहले वकील बेटे मेहुल पटेल की कोरोना से मौत हुई थी। इसके बाद मां सीताबेन और पिता जयंतिभाई की भी मौत हो गई।

पिता की मौत से दो बेटियों का सहारा छिन गया, चार साल पहले बीमारी से मां की मौत हो गई थी।
  • सरकार कहती है महुआ तहसील के 69 गांवों में एक महीने में 3 मौत, भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर जाकर देखा तो केवल 5 गांवों में ही 107 की मौत
  • 68 की सर्दी, खांसी, बुखार और 39 की अन्य बीमारियों से मौत, जिसकी टेस्टिंग ही नहीं हुई
  • तहसील के शेखपुर, बामणिया, अनावल, कोप -आंगलधरा, करचेलिया की हालत गंभीर

परिवार के सभी सदस्यों की मौत होने पर घर में ताला लगा दिया गया है। ये को एक गांव के एक घर का किस्सा है। जिले में ऐसे अनेक गांव हैं। पांच गांवों में रियालिटी चेक करने पर 107 की मौत होने का पता चला। इसमें से केवल 39 लोगों का ही कोरोना टेस्ट कराया गया था। जबकि दूसरे लोगो की सर्दी, खांसी, बुखार और अन्य बीमारियों से मौत हुई है। आश्चर्य की बात तो ये है कि प्रशासन के अनुसार 69 गांवों में अप्रैल में केवल 3 मौतें हुई हैं।

महुआ तहसील के ग्राउंड जीरो पर टीम गई तो वहां खौफ का माहौल दिखाई दिया। लोगों में कोरोना इतना डर फैल गया है कि घर से बाहर निकलने की बात तो दूर अपने परिजनों के दाह संस्कार में भी जाने से बच रहे हैं। शेखपुर की हकीकत जानने के लिए गांव के अग्रणी परिमलभाई से पूछा तो उन्होंने बताया कि गांव में पिछले एक महीने में कोरोना से 37 लोगों की मौत हुई है।

इसमें से 11 लोगो ने कोरोना टेस्ट कराया था। बाकी की सर्दी, खांसी, बुखार एवं अन्य बीमारियों से मौत हुई है। जिसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई है। अन्य एक परिवार में पहले माता की मौत हुई, 15 दिन पहले पिता की भी मौत हो गई। दो बेटियांे का सहारा छिन गया। बामणिया गांव के सरपंच ने बताया कि हमारे गांव में एक महीने में 22 लोगों की मौत हुई है। इसमें से 10 की मौत कोरोना से हुई है।

12 लोगों की दूसरी बीमारियों से मौत हुई है। गांव में पहली बार ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है। आगे जाने पर कोष-आंगलधरा गांव के धनंजय पटेल से मुलाकात हुई। धनंजय पटेल ने बताया कि हमारे गांव में पिछले एक महीने में 30 लोगों की मौत हुई है। इसमें से 10 लोगों की कोरोना से मौत हुई। बाकी 20 लोग दूसरी बीमारियों से मरे हैं।

करचेलिया गांव के कल्पेशभाई शाह ने परिस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि कोरोना की दूसरी लहर हमारे गांव के लिए आघातजनक साबित हुई है। एक महीने में 18 लोगों की मौत हुई है। इसमें से 8 ने कोरोना का टेस्ट कराया था। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना टेस्ट और वैक्सीनेशन से दूर है और समय पर इलाज न मिलने से स्थिति विकट हो रही है। लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं।

लाइव 1

समय: दोहपर 1.30 बजे
स्थल: पटेल परिवार का बंद मकान

वकील बेटे की मौत के बाद माता-पिता की भी मौत हो गई, अब घर में ताला लटका हुआ है

महुआ तहसील के शेखपुर गांव में कोरोना से पूरे परिवार की मौत हो गई। पहले वकील बेटे उसके बाद माता और फिर पिता की मौत हो गई। परिवार की मौत होने के बाद घर में ताला लग गया। वकील मेहुल जयंतिभाई पटेल कोरोना पॉजिटिव होने के बाद गडत में भर्ती कराए गए थे। जहां उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने पर 13 अप्रैल को सूरत ले जाया जा रहा था, रास्ते में उनकी मौत हाे गई।

डर का माहौल: चार दिन के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों की हो गई मौत

महुआ तहसील के अनावल गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के माता-पिता और बेटे की कोरोना से मौत हो गई। इसी आघात में परिवार के दूसरे सदस्यों की भी मौत हो गई। चार दिन के अंदर एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत होने से गांव में डर का माहौल है। पहले नजमाबेन शेख की मौत हुई, इसके बाद एक ही दिन में मुस्लिम अग्रणी रफयुद्दीन शेख और नईम शेख की भी मौत हाे गई।

एकता की मिसाल: मुस्लिम समाज ने मां और बेटे का हिंदू रीति रिवाज से संस्कार किया

महुआ तहसील के अनावल गांव में सांप्रदायिक एकता के दर्शन हुए। मुस्लिम समुदाय के मोहल्ले में रहने वाले गांधी परिवार के माता और बेटे की मौत होने पर मुस्लिम समाज के अग्रणियों ने हिन्दू रीति-रिवाज से दाह संस्कार कर सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय दिया। अनावल के नवीनभाई गांधी और उनकी माता मंजुलाबेन गांधी की मौत होने के बाद दाह संस्कार करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था।

लाइव 2

समय: दोहपर 2.15 बजे
स्थल: शेखपुर गांव

पिता की मौत से दो बेटियों का सहारा छिन गया, चार साल पहले बीमारी से मां की मौत हो गई थी

शेखपुर गांव की तीसरी घटना बिना मां की दो बेटियों के पिता की भी कोरोना से मौत हो गई। 2017 में बीमारी से मां की मौत हो गई थी। पिता दोनों बेटियों को पाल-पोस रहा था। बड़ी बेटी माइक्रोबायोलाॅजी की पढ़ाई, जबकि छोटी बेटी नीट की तैयारी कर रही है। पिता को याद करते हुए बेटी ऋतु ने बताया कि मुझे डॉक्टर बनाने की पिता की आखिरी इच्छा थी। मैं नीट की तैयार करके पिता की इच्छा पूरी करुंगी।

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