Thursday, September 23, 2021
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हॉस्पिटल मांग रहे 150 ऑक्सीजन सिलेंडर, मिल रहा महज 30; सिलेंडर के लिए भटक रहे लोग, प्रशासन बोल रहा- नहीं है कमी

ऑक्सीजन पर प्रशासन का पहरा है। वह तय कर रहा है कि कब किस अस्पताल को कितना सिलेंडर देना है। इसके लिए टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया है। दावा पर्याप्त ऑक्सीजन देने का है, लेकिन अस्पताल ऑक्सीजन की किल्लत का हवाला देकर मरीजों को वापस कर रहे हैं। अब सच कौन बोल रहा है। प्रशासन या फिर अस्पताल, यह बड़ा सवाल है। दैनिक भास्कर इसकी पड़ताल के दो दर्जन से अधिक अस्पतालों से बात की तो पता चला डिमांड का 50 प्रतिशत ऑक्सीजन भी नहीं मिल पा रहा है। आपूर्ति सामान्य दिनों से भी कम हो रही है जबकि कोरोना काल में मरीजों की बढ़ती संख्या से डिमांड दो से तीन गुणा बढ़ गई है।

पटना जिला प्रशासन का दावा है 17 से 21 अप्रैल के बीच 4 दिनों में अस्पतालों को 27904 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की गई है।
  • 4 दिन में 27904 सिलेंडर अस्पतालों को देने का दावा
  • अस्पताल ऑक्सीजन के कारण नहीं ले रहा मरीज

ऑक्सीजन की कमी से हॉस्पिटल नहीं ले रहे रिस्क

ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होने के कारण अब अस्पताल रिस्क नहीं ले रहे हैं। पटना के सगुना मोड़ स्थित समय हॉस्पिटल का कहना है कि ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मरीजों की समस्या हो रही है। लगभग 80 संक्रमितों पर मात्र 30 ऑक्सीजन सिलेंडर काफी मशक्कत के बाद मिल पा रहा है जबकि हर दिन की डिमांड 150 सिलेंडर की है। सामान्य हॉस्पिटल में भी एक दिन में 150 सिलेंडर हर हालत में चाहिए। कोरोना के संक्रमितों की कब हालत बिगड़ जाए और कब ऑक्सीजन देना पड़ जाए इसका कोई ठिकाना नहीं होता है। फुलवारी के कैपिटल हॉस्पिटल तो साफ मरीजों को बोल दे रहा है ऑक्सीजन नहीं है इस कारण से आपको भर्ती करने में रिस्क है। लगभग सभी हॉस्पिटल में यही हाल है। अधिकतर निजी अस्पतालों में बेड फुल होने की बात ऑक्सीजन की उपलब्धता नहीं होने के कारण बोला जा रहा है। कई अस्पतालों ने तो नो एंट्री सिर्फ ऑक्सीजन के कारण ही लगा दिया है।

प्रशासन का दावा भी जान लीजिए

पटना जिला प्रशासन का दावा है 17 से 21 अप्रैल के बीच 4 दिनों में अस्पतालों को 27904 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। बुधवार को ही 5750 सिलेंडर की आपूर्ति कराई गई है। प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार हो रहा है तो अस्पताल क्यों परेशान हैं यह बड़ा सवाल है। प्रशासन ने एजेंसी वार सिलेंडरों की सप्लाई का भी दावा किया है जिसके मुताबिक 17 से 21 अप्रैल तक बंसी एयर गैस प्राइवेट लिमिटेड इंडस्ट्रियल एरिया फतुहा ने 8808, पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल गैस प्राइवेट लिमिटेड सबलपुर दीदारगंज ने 10967, ऊषा एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड बाईपास रोड सिपारा ने 6536 और नालंदा एयर प्रोडक्ट्स, नालंदा ने 1593 ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को दिया है। इस तरह दावा किया जा रहा है कि कुल 27904 सिलेंडर की आपूर्ति 4 दिनों में की गई है। पटना में 17 अप्रैल को 4532, 18 अप्रैल को 5935, 19 अप्रैल को 5465, 20 अप्रैल को 6422 और 21 अप्रैल को 5750 सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। दावा किया जा रहा है कि ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के लिए हर स्तर से प्रयास किया जा रहा है।

मददगार भी हो रहे असहाय

पटना में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर देकर मदद करने और जान बचाने वाले भी असहाय हो गए हैं। उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है जिससे वह लोगों की मदद कर सकें। कोरोना काल में सांस के अन्य रोगियों के लिए ऑक्सीजन की समस्या हो गई है। पटना में लोगाें को ऑक्सीजन सिलेंडर से मदद करने वाले अधिकतर सोशल वर्कर बताते हैं कि अब एजेंसी से ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है जिस कारण से काफी समस्या आ गई है। ऐसे में लोग भटक रहे हैं और उन्हें गैस नहीं मिल पा रही है।

अस्पतालों का रोना नहीं हो रहा बंद

अस्पतालों का कहना है कि जब तक डिमांड को पूरी तरह से पूरा नहीं किया जाता है तब तक समस्या बनी रहेगी। कोरोना काल में मरीजों की संख्या बढ़ने से ऑक्सीजन की डिमांड तीन गुणा बढ़ी है। सामान्य मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन कोरोना संक्रमित अधिकतर मरीजों को ऑक्सीजन देना पड़ रहा है। ऐसे में डिमांड पूरी नहीं होने तक अस्पतालों को भर्ती करने में हॉस्पिटल भी डर रहे हैं। अस्पतालों का कहना है कि प्रशासन तय कर रहा है कि किस अस्पताल को कब और कितना ऑक्सीजन देना है, ऐसे तो इलाज संभव ही नहीं है। प्रशासन के अनुसार जब अस्पतालों को सिलेंडर दिया जाएगा तो हॉस्पिटल मरीजों के साथ क्यों रिस्क लेगा।

आरा में ऑक्सीजन का संकट, मंत्री तक को लिखा पत्र

आरा में स्थित कौशल्या समय हॉस्पिटल पर ऑक्सीजन का संकट है। हॉस्पिटल ने स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सिविल सर्जन तक को पत्र लिखा है लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज के लिए ऑक्सीजन ही आधार है। जब ऑक्सीजन ही नहीं है तो मरीज का इलाज किस आधार पर किया जाएगा। इससे ऑपरेशन से लेकर हर तरह के इलाज पर संकट आया है।

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