Tuesday, September 28, 2021
Homeमध्य प्रदेशबदहाल व्यवस्था:शहडोल में 16 हजार बच्चे कुपोषित, इनमें 1328 गंभीर; आंगनवाड़ियों की...

बदहाल व्यवस्था:शहडोल में 16 हजार बच्चे कुपोषित, इनमें 1328 गंभीर; आंगनवाड़ियों की मॉनिटरिंग तक नहीं, घर तक नहीं बाट रहे पोषण आहार

मां के सहारे बस इतना ही खड़ा हो पाता है दिनेश।

आदिवासी बाहुल्य इलाके वाले शहडोल जिले में सरकारी स्वास्थ्य और पोषण आहार वितरण की सेवाएं पूरी तरह चरमराई हुई है। 16 मासूम बच्चों की लगातार मौतों के बाद स्वास्थ्य मंत्री ओर भोपाल के अफसरों की टीम पहुंच गई है, लेकिन मौत के असल कारणों को छुपाया जा रहा है। जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां 16314 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इसमें से 1328 बच्चे गंभीर और 15 हजार सामान्य कुपोषित हैं।

महिला बाल विकास के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में सबसे ज्यादा बुढ़ार में कुपोषित बच्चे हैं। यहां से सबसे ज्यादा बच्चों को रैफर किया जाता है। अनूपपुर ओर उमरिया के आंकड़ों को जोड़ लिया जाए तो कुपोषण की संख्या 30 हजार के पार पहुंच सकती है। सरकार हर साल कुपोषण मिटाने के लिए पारा 1497 करोड़ रुपए खर्च करती है। लॉकडाउन के बाद से आंगनवाड़ियों में बच्चे नहीं पहुंच रहे है। ये जिम्मेदारी आजीविका मिशन ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है कि हैे वे घर तक आहार पहुचे। लेकिन, दो दिन दिन में आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताले पड़े हुए हैं।

खिचड़ी-सोया बर्फी से बेच गायब
आंगनवाड़ी से फ्री खिचड़ी और सोया बर्फी लेकर आने वाले सुशील सिंह बताते हैं एक पैकेट उन्हें मिलता है आंगनवाड़ी सहायिका पैकेट दिखाते हुए कहती है इतना सामान आया है। पैकेट को देखने पर उसमें उत्पादन की तारीख नहीं लिखी है। बैच नंबर तक गायब है। इनका उत्पादन अभी एमपी एग्रो के माध्यम से हो रहा है।

3 में से 2 बच्चे कुपोषण से विकलांग हो चुके: उमरिया के वन ग्राम मकरा ओर परपटिया में पोषण के मामले में हालत बदतर है। इसका दर्द सुनीता ओर उनके बच्चे झेल रहे है। 10 साल में 3 बच्चे हुए, जिसमें से 2 सही प्रोटीन नहीं मिलने से बेहद कमजोर है। वे बताती है कि किशन की गर्दन नहीं उठती है। इसको सही भोजन नहीं मिला। 6 साल का छोटा दिनेश तो बिस्तर पर पड़े रहता है। इसके हाथ तक अकड़े हुए है। एक कदम नहीं चल सकता।

मंत्री-अफसर से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक मैदान में उतरे, 106 गांवों में पहुंचने का दावा
स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी सोमवार को शहडोल पहुंच गए । भोपाल से स्टेट कोआर्डिनेशन के लिए एनआरएचएम की टीम भी पहुंच गई ।इनमें मिशन डायरेक्टर छवि भारद्वाज डिप्टी डायरेक्टर वीणा सिन्हा और डॉ मनीष सिंह शामिल है । टीम ने उड़ान बुढ़ार , धनपुरी, गोहपारू स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने 106 गांव का सर्वे किया। नए कुपोषित बच्चे मिले हैं।

16 मासूमों की मौत के बाद खुली आंख

मंत्री-अफसर से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक मैदान में उतरे, 106 गांवों में पहुंचने का दावा
स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी सोमवार को शहडोल पहुंच गए । भोपाल से स्टेट कोआर्डिनेशन के लिए एनआरएचएम की टीम भी पहुंच गई ।इनमें मिशन डायरेक्टर छवि भारद्वाज डिप्टी डायरेक्टर वीणा सिन्हा और डॉ मनीष सिंह शामिल है । टीम ने उड़ान बुढ़ार , धनपुरी, गोहपारू स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने 106 गांव का सर्वे किया। नए कुपोषित बच्चे मिले हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments