Sunday, September 19, 2021
Homeराजस्थानआरयूएचएस में 2 मिनट ऑक्सीजन रुकने से 3 मौतें, 1 मिनट और...

आरयूएचएस में 2 मिनट ऑक्सीजन रुकने से 3 मौतें, 1 मिनट और न मिलती तो 30 जानें जातीं

राजस्थान के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में शुक्रवार दोपहर 2 मिनट के लिए प्रेशर गिरा और ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 3 मरीजों की जान चली गई। एक मिनट की और देरी होती तो 27 जानें और जा सकती थीं। अस्पताल में मौजूद इन मरीजों के परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही डॉक्टरों ने तीनों मरीजों को मृत घोषित करके मोर्चरी में भेजने की कार्रवाई भी शुरू कर दी।

आरयूएचएस में 2 मिनट ऑक्सीजन रुकने से 3 लोगों की मौत हो गई।

मगर सुबह जिन मरीजों ने जूस पिया, चाय पी, उनकी अचानक मौत से परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामला बढ़ा तो पुलिस को बुलाया गया और परिजनों को ‘हर तरीके’ से समझा दिया गया। अपनों की मौत की पीड़ा, कोरोना का डर और प्रशासन-पुलिस की ओर से जल्दी अस्पताल से बाहर भेजने की कोशिश से वे बुरी तरह से टूट गए और शवों को लेकर चले गए। इन सब के बीच आरयूएचएस में कोई भी उच्चाधिकारी नहीं थे और वे ‘मीटिंग’ के लिए बाहर गए हुए थे।

हादसे के वक्त वार्ड में 30 लोग भर्ती थे

घटना के वक्त आरयूएचएस के आरा-तारी आईसीयू वार्ड में 30 जने भर्ती थे। इनमें से 25 वेंटिलेटर पर थे। सभी को ऑक्सीजन लगी थी और लगभग सभी की स्थिति स्थिर थी। अचानक एक बजकर 14 मिनट पर सभी मरीजों को सांस ही नहीं आई। मरीज तड़पने लगे और परिजनों के घबराने पर स्टाफ की नजर ऑक्सीजन सप्लाई पर गई तो वहां सप्लाई रुकी हुई थी। स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए। अफरा-तफरी मच गई।

आधा स्टाफ ऑक्सीजन सिलेंडर लेने भागा तो कुछ ने सप्लाई के लिए फोन किया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, वहां भर्ती सजना मीणा, आत्मप्रकाश कूलवाल और कमल की मौत हो गई। महज दो मिनट में सप्लाई सुचारू कर दी गई। थोड़ी और देरी हो जाती तो और जानें जा सकती थीं।

उफ्फ! ये बेबसी… बेटे को बता भी नहीं पाई कि उसके पिता की मौत हो गई है…क्योंकि बेटा भी आरयूएचएस में जमीन पर लेटकर ऑक्सीजन ले रहा, बाहर आकर फोन पर फूट-फूटकर रो पड़ी

बेबसी और लाचारी…किसे कहते हैं, इस मां से पूछिए। बिहार से आकर सांगानेर में रह रही कमला के पति और बेटे को कोराना हो गया था। वे दोनों आरयूएचएस में भर्ती थे। बेटे को बेड नहीं मिला तो उसे जमीन पर ही ऑक्सीजन दी जा रही थी।

शुक्रवार दोपहर जब ऑक्सीजन की सप्लाई चंद मिनटों के लिए बाधित हुई तो आरा तारी वार्ड में भर्ती कमला के पति की सांसें उखड़ गईं। जैसे ही भगदड़ मची तो कमला दौड़कर पति के वार्ड में पहुंची। वहां किसी ने कुछ नहीं बताया। करीब डेढ़ घंटे बाद उसे पता चला कि उसके पति नहीं रहे। उसके आंसू थम नहीं रहे थे। फिर भी जैसे-तैसे खुद को रोककर बेटे के पास पहुंची।

इस डर से उसे पिता की मौत की खबर नहीं दी कि कहीं तबीयत और न बिगड़ जाए। अस्पताल के बाहर आते ही सीढ़ियों पर बैठ गई और अपने रिश्तेदारों को रो-रोकर अपना हाल बताया। स्टाफ ने उससे साइन कराए और खानापूर्ति की।

इस हादसे का जिम्मेदार कौन?

टैंकर चालक : ऑक्सीजन भरने आए टैंकर चालक को जल्दी थी। इसलिए उसने तेज प्रेशर में आॅक्सीजन खोल दी। इससे प्लांट का प्रेशर कम हो गया। आईसीयू का तो पूरा प्रेशर ही गिर गया और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक गई।
प्लांट इंचार्ज : डॉ. संदीप कोठारी बोले- प्रेशर कम-ज्यादा होता रहता है। इससे मौतें नहीं हुई।

‘मरीज थे ही क्रिटिकल।’ ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 2 मिनट में 3 जानें चली गईं और यह रहा प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल के प्रबंधन का जवाब। बिना ऑक्सीजन एक मिनट और गुजरता तो इस खबर का शीर्षक ‘3 मिनट में 30 जानें…’ हो सकता था। शायद तब सभी 30 मरीज क्रिटिकल मान लिए जाते। वास्तविकता यह है कि आरा-तारी वार्ड में भर्ती 30 जनाें में से 25 वेंटिलेटर पर जरूर थे, पर अधिकांश की स्थिति स्थिर थी।

सरकार के लिए कोरोना मौतों के रोज के आंकड़े में 3 लोग और जुड़ जाएंगे। मोबाइल पर आ रहा वह मैसेज याद कीजिए- ‘दुनिया के लिए आपकी मौत एक आंकड़ा है, परिवार के लिए आप ही दुनिया हो।’ कमला की दुनिया उसके पति के जाते ही उजड़ गई। कमला रो न सकी। कैसे रोती? बेड के अभाव में जमीन पर लेटा उसका बेटा भी तो ऑक्सीजन के सहारे था। ऑक्सीजन के अलावा उसे मां का ही सहारा था। कमला के आंसुओं का सैलाब कितनी देर थमा रहता? बाहर आते ही सहन शक्ति के बांध टूटे और कमला बिलख पड़ी।

राजस्थान सरकार खूब ‘सहन’ कर रही है। लोगों की दुनिया उजाड़ रहे कालाबाजारों को, नकली दवा बेच रहे लोगों को, ऑक्सीजन रोक रहे अस्पतालों को, बेड का सौदा कर रहे कर्मचारियों को। कोरोनाकाल में पूरे राज्य की उम्मीदों के ‘आरोग्य केन्द्र’ आरयूएचएस की इस लापरवाही को भी वो बड़ी तसल्ली से सहन कर लेगी। आकलन कीजिए, रेमडेसिविर को जमा करके जरूरतमंद के साथ भाव-ताव कर रहे तत्वों ने कितनी जानें ली होंगी?

सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में केस दर्ज कर इन हत्यारों को ‘सहन’ कर लिया है। महामारी के इस अभूतपूर्व और इलाज के सीमित विकल्पों के दौर में रेमडेसिविर सिर्फ आवश्यक ‘वस्तु’ नहीं हो सकती। इस अधिनियम के तहत कुछ सालों की सजा पर्याप्त नहीं हो सकती।

एमपी में नकली इंजेक्शन बनाने, बेचने वालों, कालाबाजारी करने वालों के मकान तोड़े जाएंगे। संपत्ति जब्त होगी। और फिर सबसे जरूरी…गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाएगा। यूपी सरकार ने ऐसे लोगों पर रासुका लगाने की तैयारी कर ली है। बारी अब राजस्थान सरकार की है। एमपी-यूपी से भी कहीं ज्यादा सख्त कदम उठाने की। जनता इंतजार कर रही है…।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments