Saturday, September 18, 2021
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2 युवकों ने भरी जवानी में देश के लिए दे दी जान की कुर्बानी

साल 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज जब गांव-गांव सुनाई दे रही थी, तो रोहतास भी उससे अछूता नहीं था। संझौली के दो नौजवानों ने गांधी जी के करो या मरो के नारे को चरितार्थ करते हुए अपने वतन के लिए जान लुटा दी थी।उस समय गढ़ नोखा अंग्रेजों की छावनी के नाम से जाना जाता था। ऐसे में नोखा स्थित डाकबंगला पर युवा कांतिकारियों ने हमला कर जला डाला था। उस समय डाकबंगला कांड से नाराज होकर अंग्रेज अफसर युवाओं की गिरफ्तारी के लिए गांव-गांव अभियान चला रही थी। गांव-गांव घूम कर 20-25 वर्ष से कम उम्र के युवकों को पकड़ कर जेल में डाला जा रहा था। इसी के विरोध में संझौली में युवक प्रदर्शन करने लगे। जिसके बाद अंग्रेज सिपाहियों ने लाठी चार्ज शुरू कर दिया। ऐसे में दो युवाओं ने आगे बढ़कर अंग्रेज दरोगा पर हमला कर दिया। गुस्साए अंग्रेज दरोगा ने फायरिंग का आदेश दिया, जिसमें संझौली निवासी गुजर बैठा और झड़ी महतो नामक युवकों को गोल लगी और वे देश के लिए कुर्बान हो गए।

शहीद गुजर बैठा के भाई रामबृक्ष बैठा के पुत्र 45 वर्षीय अरविंद बैठा का कहते है कि मुझे और मेरे सभी बंशजों को इस बात का हमेशा गर्व रहा कि हम गुजर बैठा के बंशज हैं। बताते हैं कि उनके चाचा गुजर बैठा की नई-नई शादी हुई थी, परिवार उन्हें आंदोलन में भाग लेने से रोक रहा था, पर वे नहीं माने, और देश के लिए कुर्बान हो गए। बताते हैं दादा का नाम निठाली बैठा था, जिनके दो पुत्र गुजर बैठा और रामबृक्ष बैठा हुए। चुकी बड़े पापा गुजर बैठा 20 वर्ष की उम्र में ही शहीद हो गये, जिससे आहत मेरी बड़ी मम्मी भी अपने मायके चली गई और फिर कभी लौट के नहीं आई। मेरे पिता रामबृक्ष बैठा के दो पुत्र रविन्द्र बैठा और अशोक बैठा हैं। जिसमें रविन्द्र बैठा के 5 बच्चे जिसमें 4 लड़के और एक लड़की है और अशोक बैठा के 3 बच्चे जिसमे दो लड़के और एक लड़की है।

संझैली में स्थापित है स्मारक

शहीद गुजर बैठा और झड़ी महतो की याद में पहले बिक्रमगंज प्रखण्ड मुख्यालय परिसर में शहीद स्मारक बनाया गया। 90 के दशक में जब संझैली प्रखण्ड बना तब से संझौली प्रखण्ड मुख्यालय में स्मारक बनाने की मांग हो रही थी, जो पूरी हो गई है। गत फरवरी में संझौली प्रखंड कार्यालय परिसर में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों की याद में बने गुजर बैठा और झड़ी महतो के स्मृति चिह्न का उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने अनावरण किया था, कार्यक्रम के परिजनों को भी सम्मानित किया गया था।

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