Monday, September 27, 2021
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सूरत : रोज 1200 एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत, पर मिल नहीं रहे

अहमदाबाद की तरह अब सूरत में भी म्यूकोरमाइकोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालत यह है कि इसके इलाज के लिए जरूरी एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की भारी कमी होने लगी है। रही है। इस बीमारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि गुजरात में इसके लगभग 200 मरीज हैं। एक मरीज को रोज इंजेक्शन के छह डोज लगते हैं। ऐसे में रोज 1200 डोज की खपत है। लोग मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पतालों और ऑनलाइन भी इंजेक्शन लेने की कोशिश कर रहे हैं।

हाई डायबिटीज वाले मरीज हो रहे शिकार

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से पहले इसके एक या दो मामले ही आते थे। तब इस इंजेक्शन का उपयोग कम होता था। कोरोना के बाद हाई डाइबिटीज वाले मरीजों को यह बीमारी हो रही है। ऐसी में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसलिए इंजेक्शन की कमी हो गई है। गुजरात सहित महाराष्ट्र, एमपी, राजस्थान में भी इसके काफी मामले आ रहे हैं।

डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है।
डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है।

कमी से कुछ मरीज को दिन में चार इंजेक्शन ही लग रहे

म्यूकोरमाइकोसिस के मामले बढ़ने के चलते एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन की मांग काफी बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज को इस इंजेक्शन को 15 दिन से डेढ़ माह तक दिया जा सकता है। यह मरीज की कंडीशन पर डॉक्टर तय करते हैं। इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 7000 रुपए है। एक मरीज को एक दिन में छह डोज लगते हैं।

नाक से शुरू होता म्यूकोरमाइकोसिस

डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। अमूमन यह नाक से शुरू होता है और नेजल बोन और आंखों को खराब कर सकता है। यह जबड़ों को भी चपेट में लेता है। ऐसे मरीजों को नाक में सूजन या अधिक दर्द हो आंखों से धुंधला दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड कर सकता है। ज्यादा दिन बीत जाएं तो दिमाग में इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो जाता है।

किन मरीजों के लिए ज्यादा खतरा

कई राज्यों में कोविड पेशेंट में म्यूकोरमाइकोसिस डिजीज होने के मामले सामने आ चुके हैं। साइनस के कई मरीजों में यह समस्या आती है, लेकिन कोविड पेशेंट के लिए ज्यादा खतरनाक है। खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज है या उनकी इम्युनिटी कमजोर है। कोविड होने के बाद ऐसे लोगों को डायबिटीज पूरी तरह कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है। इसलिए इम्युनिटी बढ़ाना ही बेहतर विकल्प है। यदि इंफेक्शन होता है तो मेनिनजाइटिस और साइनस में क्लोटिंग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार न करें, सीधे डॉक्टर के पास जाएं।

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