Tuesday, September 28, 2021
Homeचंडीगढ़20 साल पुराने रिश्वत केस में 72 साल के बुजुर्ग को 3...

20 साल पुराने रिश्वत केस में 72 साल के बुजुर्ग को 3 साल कैद

फाइल फोटो
  • एमसी में एसडीओ रहते हुए गैरकानूनी सीवरेज कनेक्शन के लिए मांगे थे 3 हजार रुपए…

20 साल पुराने रिश्वत के एक मामले में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने निगम के पूर्व एसडीओ कुलदीप सिंह को 3 साल की सजा सुनाई है। यूटी विजिलेंस ने कुलदीप को 19 दिसंबर 2000 को उनके ऑफिस से 3 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दो साल बाद ही चंडीगढ़ कोर्ट से ही उन्हें दो साल की सजा हो गई थी, जिसके खिलाफ वे हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट ने केस में दोबारा ट्रायल चलाने के लिए कहा था।

अब केस का ट्रायल एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज संजीव जोशी की कोर्ट में दोबारा चला, जिसमें उन्हें 3 साल की सजा हो गई। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 10 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। कुलदीप सिंह की इस वक्त उम्र 72 साल है। केस के बाद डिपार्टमेंट ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। कुलदीप के खिलाफ तेजस्वी कुमार ने शिकायत दी थी, जिनका इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में एक प्लॉट था।

कुलदीप उस समय नगर निगम के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में एसडीओ थे। उनके पास शिकायत थी कि तेजस्वी के प्लॉट का सीवरेज कनेक्शन गैरकानूनी है। आरोप के मुताबिक कनेक्शन को लीगल करने के लिए कुलदीप ने तेजस्वी से 9 हजार रुपए मांगे। तेजस्वी ने उन्हें 3-3 हजार रुपए में ये रकम देने के लिए कहा। दोनों में सौदा तय हो गया। इस दौरान तेजस्वी ने विजिलेंस को शिकायत दे दी। विजिलेंस ने फिर ट्रैप लगाकर कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया।

सजा के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे कुलदीप
कुलदीप को 2002 में तत्कालीन एडीजे लखबीर सिंह की कोर्ट ने 2 साल की सजा सुना दी थी। कुलदीप ने हाईकोर्ट में अपील कर दी। वहां उन्होंने एक एप्लीकेशन दी, जिसमें कहा कि उनके खिलाफ झूठा केस बनाया गया था और ट्रायल कोर्ट ने उनकी सुनवाई भी नहीं की। उन्होंने कहा कि वे केस में कुछ और सबूत देना चाहते हैं।

लिहाजा, हाईकोर्ट ने उनकी बात को सुनते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए दोबारा ट्रायल चलाने के आदेश दिए थे। लेकिन एडीजे संजीव जोशी की कोर्ट में दोबारा ट्रायल चला और इस बार भी उन पर लगे आरोप साबित हो गए। इस पर कोर्ट ने उन्हें अब 3 साल की सजा सुना दी।

कुलदीप ने ये कहा था अपनी सफाई में…

कुलदीप का कहना था कि विजिलेंस ने उन पर जो आरोप लगाए थे, वे गलत थे। विजिलेंस जिस काम के लिए रिश्वत की बात कह रही थी, उसके करने के लिए तो वे अथॉराइज ही नहीं थे। फिर वे रिश्वत क्यों मांगेंगे? उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नगर निगम ने दी थी, जबकि वे तो प्रशासन के कर्मचारी थे। इसलिए उनके खिलाफ प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन भी गलत तरीके से दी गई थी, लेकिन उनकी इन सभी दलीलों को कोर्ट ने नहीं माना।

फिलहाल जेल नहीं जाना पड़ेगा
कुलदीप को कोर्ट ने सजा तो सुना दी लेकिन फिलहान उन्हें जेल जाना नहीं पड़ेगा। कानूनन 3 साल या उससे कम की सजा होने पर कोर्ट दोषी को अपील करने के लिए एक महीने का समय देती है। इस दौरान दोषी अपनी सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत या फिर हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। अगर अपील खारिज हो जाती है तो फिर दोषी को जेल जाना पड़ता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments