Tuesday, September 28, 2021
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डीजीपी के लिए सीनियर 3 IPS के नाम का बन चुका पैनल

प्रदेश के नए डीजीपी के लिए सीनियर 3 आईपीएस के नाम का पैनल बनने के बाद 1990 बैच के शत्रुजीत कपूर को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है, क्योंकि हरियाणा सरकार की ओर से यूपीएससी को पैनल भेजने के बाद कपूर के ही डीजीपी बनने की चर्चा सचिवालय से लेकर पुलिस महकमे और ब्यूरोक्रेट्स में थी, क्योंकि वे सीएम के करीबी भी माने जाते हैं। इसके अलावा 2019 में सीनियर आईपीएस काे दरकिनार कर मनोज यादव का नाम यूपीएससी के पैनल में शामिल हो गया था और वे डीजीपी भी बने।लेकिन इस बार यूपीएससी ने वरिष्ठता को प्राथमिकता दी है। माना जा रहा है कि यादव का नाम पिछली बार पैनल में आने पर उनसे सीनियर आईपीएस पीआर देव कोर्ट गए थे। उन्होंने वरिष्ठता क्रम को तोड़ने को चैलेंज भी किया था। यूपीएससी कोर्ट के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती। यूपी में भी यही हुआ। बताया कि वहां भी योगी सरकार जिस आईपीएस को डीजीपी बनाना चाहती थी, वह वरिष्ठता क्रम में 3 नंबर पर नहीं थे, जिसकी वजह से उनकी पसंद के आईपीएस डीजीपी नहीं बन जाए।

यूपीएससी ने वरिष्ठता के आधार पर ही यूपी में भी पैनल बनाकर भेजा। ऐसा ही हरियाणा में हुआ है। इधर, यह भी सामने आया है कि कपूर का नाम पैनल में न आने पर सरकार का ही एक धड़ा खुश भी है, क्योंकि यह खेमा भी कपूर के डीजीपी बनने के पक्ष में नहीं था। ऐसे में सीनियर आईपीएस पीके अग्रवाल, आरसी मिश्रा व मोहम्मद अकील के नाम का जो पैनल तैयार हुआ है, उन्हीं में से एक को सरकार डीजीपी बनाएगी।

जानिए… कपूर से सीनियर अफसरों का वरिष्ठता क्रम

डीजीपी मनोज यादव आईबी कैडर के अफसर हो चुके हैं, जबकि इनके अलावा 1984 बैच के एसएस देसवाल और 1986 बैच के केके सिंधू इसी माह 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए इन तीनों अफसरों का नाम पैनल में नहीं आएगा, यह तय था। जबकि पीके अग्रवाल, आरसी मिश्रा और मोहम्मद अकील ये तीनों शत्रुजीत कपूर से सीनियर हैं। पैनल में तीन ही नाम शामिल होने थे। ऐसे में वरिष्ठता क्रम में कपूर चौथे नंबर पर रहे।

डीजीपी को हटाने के लिए ये हैं नियम : प्रदेश सरकार यदि डीजीपी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है तो उन्हें हटाने में नियम आड़े आ सकते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व सितंबर, 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहुचर्चित प्रकाश सिंह केस में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के तहत देश में पुलिस सुधारों के विषय पर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को कुल 6 निर्देश दिए गए थे, जिनमें सबसे पहला केंद्र व राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय व राज्य सुरक्षा आयोग का गठन करना था, जिसके अनुसार डीजीपी को यदि किसी विशेष परिस्थिति में दो वर्ष से पहले पद से हटाना जरूरी हो जाए, तो राज्य सरकार द्वारा उक्त गठित आयोग के साथ परामर्श के बाद ही ऐसा किया जा सकता है। प्रदेश में फिलहाल आयोग का गठन नहीं हुआ है।

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