Thursday, September 23, 2021
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क्रिकेट : रक्षा बजट के बराबर पहुंच गया देश में सट्‌टेबाजी का कारोबार, अब मोबाइल ऐप से ही खिला रहे

डेटा इंटेलिजेंस डेस्क. क्रिकेट वर्ल्डकप के बीच मुंबई पुलिस ने क्रिकेट सट्टेबाजों के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने फाइव स्टार होटल से सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया। इससे बेटिंग (सट्‌टेबाजी) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पिछले कई सालों से ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन भी सट्‌टेबाजी खिलाई जा रही है। भारत में ही भले ही यह कानूनी तौर पर वैध नहीं है लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में भारत में क्रिकेट का सट्‌टा खेला जाता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सट्‌टेबाजी का कारोबार 3 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा पर पहुंच चुका है। यह राशि करीब-करीब भारत के रक्षा बजट के बराबर है। दैनिक भास्कर ने इस मुद्दे पर एफआईसीसीआई की स्पोर्ट्स कमेटी के मेम्बर और सुगल एंड दमानी ग्रुप के सीईओ कमलेश विजय और इंदौर पुलिस के एएसपी (क्राइम) और साइबर प्रभारी अमरेंदर सिंह से बातचीत की और जाना कि सट्‌टेबाजी का पूरा गणित।

सट्‌टेबाजी पर या तो पूरी रोक लगे, या लीगल हो जाए

  • एफआईसीसीआई की स्पोर्ट्स कमेटी के मेम्बर और सुगल एंड दमानी ग्रुप के सीईओ कमलेश विजय लॉ कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि भारत में या तो क्रिकेट की सट्‌टेबाजी पर पूरी तरह से रोक लगना चाहिए या फिर इसे लीगल कर देना चाहिए।
  • यदि इसे लीगल किया जाता है तो सरकार को रेवेन्यू भी मिलेगा और लोगों को रोजगार भी। साथ ही अभी जो लॉ एंड ऑर्डर की प्रॉब्लम है, वह भी खत्म हो जाएगी। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश हैं, जहां क्रिकेट बेटिंग लीगल है। भारत में भी इसमें काफी लोग शामिल हैं लेकिन सरकार को इसका कोई फायदा नहीं मिलता। लॉ एंड ऑर्डर की भी दिक्कत होती है।
  • स्पोर्ट्स कमेटी का भी ये मानना है कि इसके लीगल न होने से कहीं न कहीं स्पोर्ट्स की इमेज खराब होती है। लॉ कमीशन ने क्रिकेट में सट्‌टेबाजी को देश में लीगल करने की वकालत की है।
  • इंदौर पुलिस के एएसपी (क्राइम) और साइबर प्रभारी अमरेंदर सिंह का कहना है कि, अब ऐप्स और वेबसाइट के जरिए क्रिकेट में सट्‌टेबाजी की जा रही है। लिंक के जरिए यह लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं। कई ऐप्स, वेबसाइट विदशों से संचालित की जा रही हैं। पुलिस समय-समय पर कार्रवाई करती है।

ऑनलाइन सट्‌टा खिला ही नहीं रहे, सिखा भी रहे

  • क्रिकेट का सट्‌टा सिर्फ ऑनलाइन खिलाया ही नहीं जा रहा बल्कि सिखाया भी जा रहा है। www.onlinecricketbetting.net जैसी वेबसाइट सट्‌टा खेलने की पूरी जानकारी दे रही हैं।
  • यहां पर उन साइट्स के बारे में भी बताया गया है, जो ऑनलाइन सट्‌टा खिलाती हैं। इनमें बेटवे, बेटरैली इंडिया, स्पिन पैलेस, दफाबेट, बेट365 और 1xबेट जैसी साइट्स के नाम हैं।
  • यहां सलाह दी जाती है कि एक सट्‌टेबाजी साइट चुनें और सट्‌टेबाजी खाता बनाएं। पैसा डालने के लिए डेबिट, क्रेडिट कार्ड से लेकर नीओसर्फ तक के ऑप्शन दिए गए हैं।

कैसे शुरू होती है बेटिंग

  • एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है। अकाउंट की एक लिमिट होती है। सट्‌टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है। यही पंटर (एजेंट) के जरिए बुकी से संपर्क कराता है।
  • मैच की पहली गेंद से लेकर आखिरी तक टीम के जीत के भाव चढ़ते-उतरते हैं। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है।

कैसे लगाया जाता है ऑफलाइन सट्‌टा

  • मान लीजिए भारत का भाव 60/62 (भारत फेवरेट)। ऐसे में यदि पंटर ने एक लाख रुपए भारत की जीत पर लगाए हैं तो उसे 60 हजार रुपए मिलेंगे। जो पंटर 1 लाख रुपए का सट्‌टा लगाता है तो वह बुकी को कहता है कि एक पेटी 60 में लगाया। बुकी कहता है, एक पेटी 60 में खाया।
  • यदि मैच में भारत जीत जाता है तो पंटर को 60 हजार रुपए मिलते हैं, वहीं भारत हार जाता है तो पंटर को 1 लाख रुपए देने पड़ेंगे।
  • 60/62 का भाव होने पर यदि कोई भारत के फेवरेट रहने पर भी दूसरी टीम पर 1 लाख रुपए का सट्टा लगाता है तो पंटर 62 में 1 पेटी खाया कहता है और बुकी कहता है 62 में 1 पेटी लगाया।
  • ऐसे में यदि फेवरेट न होने पर भी जिस टीम पर पैसा लगाया है वो जीतती है तो पंटर को एक लाख रुपए मिलेंगे। वहीं हार जाती है तो उसे बुकी को सिर्फ 62 हजार रुपए देना पड़ेंगे।

लोढ़ा पैनल ने कहा था, इसे वैध कर दो

  • 2013 में आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग की जांच के लिए गठित लोढ़ा पैनल ने सिफारिश की थी कि क्रिकेट में बेटिंग (सट्‌टेबाजी) को कानूनी दर्जा दे दिया जाए।
  • कमेटी का कहना था कि सट्‌टेबाजों पर पूरी तरह से लगाम लगा पाना मुश्किल है। इसलिए इसे लीगल कर देना चाहिए जिससे सरकार राजस्व कमा सकती है।
  • फिक्की की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रिकेट में सट्‌टेबाजी को कानूनी बना देने से सरकार को हर साल 12 से 19 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। अभी यह पैसा सट्‌टेबाजों की जेब में जाता है।

कई देशों में वैध, मिल रहा बड़ा राजस्व

इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रिया, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में सट्‌टेबाजी वैध है। यहां की सरकारें बेटिंग से राजस्व जोड़ती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया को इससे 11 अरब डॉलर और कनाडा को करीब 15 अरब डॉलर का फायदा हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रिकेट की बेटिंग का करीब 65% सट्‌टा टीम इंडिया के मैचों पर ही लगता है।

एक मैच पर ही करोड़ों रुपए लग रहे

वर्ल्डकप में होने वाले इंडिया, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के किसी भी मैच में 438 करोड़ से ज्यादा रुपए लग रहे हैं। यह दावा इंग्लैंड की एक सट्‌टा खिलाने वाली वेबसाइट ने किया है। इंडिया-बांग्लादेश के बीच हुए वार्मअप मैच में ही 149 करोड़ रुपए लगे। इसे पता चलता है कि सट्‌टेबाजी का कारोबार कितना बड़ा हो चुका है।

एक-एक बॉल पर भी लगता है सट्‌टा

  • क्रिकेट के सट्‌टे में जानकारी की गति बहुत मायने रखती है। मैच शुरू होते ही सट्‌टेबाज लगातार एक-दूसरे के टच में रहते हैं। कम्युनिकेशन के लिए अधिकतर वॉट्सऐप का ही इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह सुरक्षित होता है।
    • सट्‌टा सिर्फ वास्तविक नतीजों पर ही नहीं होता बल्कि इसमें कई फैक्टर होते हैं, जैसे एक ओवर में कितने रन आए, किस बॉलर ने कितने विकेट लिए, चौके और छक्के कितने लगे, खाली बॉल कितनी रहीं और रन आउट कितने हुए। इसी के चलते क्रिकेट की सट्‌टेबाजी में जानकारी बहुत ज्यादा मायने रखती है। बुकी लाइव फीड के लिए गैजेट्स इंस्टॉल करके रखते हैं।

    ऑफलाइन खेलने वालों के लिए भी नियम तय

    • स्पेश डिकोडर के इस्तेमाल से वे बिना विज्ञापन के लाइव स्ट्रीमिंग को एक्सेस कर लेते हैं। इससे उन्हें टीवी पर मैच देखने वालों के मुकाबले 5 से 10 सेकंड का फायदा मिल जाता है।
    • अधिकर बड़े बुकी दुबई से सट्‌टा चलाते हैं। इंडिया से जो लोग सट्‌टा खेलते हैं वे किसी एनआरआई या अपने दोस्त के जरिए इनके पास पैसा पहुंचाते हैं। विदेशों से चलने वाले वेबसाइट में हवाला के जरिए भी पैसा पहुंचाया जाता है।
    • जो लोग ऑफलाइन खेलते हैं, उनके भी नियम-कायदे तय हैं। इन्हें भी बिना किसी देरी के भुगतान किया जाता है। जैसे दिन का मैच दोपहर 2.30 बजे खत्म होता है तो संबंधित एड्रेस पर पैसा शाम 5.30 से 6 बजे तक पहुंच जाएगा।

    क्या होता है पैसों का गणित

    • जब कोई सट्‌टेबाज कहता है कि किसी विशेष बल्लेबाज के शतक की राशि 1.50 है तो इसका मतलब है कि आपने जितना पैसा लगाया है, उसका 1.50 गुना आपको जीतने पर मिलेगा। वहीं जब यह फ्रेक्शन (अंश) में दिया जाता है तब जीतने पर होने वाले फायदे के बारे में बताता है।
    • जैसे इंडिया की जीत पर 8/3 यानी 300 रुपए के सट्‌टे पर 800 रुपए का फायदा। यानी कुल अमाउंट 1100 रुपए होगा। टूर्नामेंट की प्रोग्रेस के हिसाब से यह भाव बदलते जाता है।

    क्या है कानून

    • आईटी एक्ट, 2000 ऑनलाइन सट्‌टेबाजी के बारे में ज्यादा बात नहीं करता। सिक्किम एक मात्र ऐसा राज्य है जहां सिक्किम ऑनलाइन गेमिंग (रेग्युलेशंस) रूल्स 2009 के तहत ऑनलाइन सट्‌टेबाजी की जा सकती है। वहीं दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तो ऑनलाइन सट्‌टेबाजी को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं।

    मोबाइल ऐप्स पर खिला रहे

    • कई ऐसे मोबाइल फोन एप्लीकेशन हैं, जो क्रिकेट सट्‌टेबाजी के तरीकों की जानकारी देते हैं। एक सट्‌टेबाज ने कहा कि, यह उतना ही आसान है, जितना मोबाइल पर गेम खेलना। इसमें आपको एक, दो लोगों के साथ मिलकर अकाउंट ओपन करना होता है।
    • CrickBetting, Betting Keeda जैसे कई ऐप सट्‌टेबाजी कराते हैं। कुछ वेबसाइट भी हैं, जैसे bet365.com and betfair.com भी हैं। यह ऐप और वेबसाइट सीधे लेटेस्ट भाव खेलने वाले तक पहुंचाती हैं। यह ऐप सट्‌टेबाज की वेबसाइट से भी तेज काम करते हैं। इन ऐप्स के जरिए घर, पब या किसी स्पोर्ट्स बार से भी मैच देखते-देखते सट्‌टेबाजी की जा सकती है।
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