मां का जीवन बचाने के लिए आगरा की डॉक्टर बेटी ने क्राउड फंडिंग का लिया सहारा

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आगरा की दया गुप्ता को ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए एक करोड़ रुपए के इंजेक्शन की आवश्यकता है। अपनी मां का जीवन बचाने के लिए आगरा की डॉक्टर बेटी ने क्राउड फंडिंग का सहारा लिया है। एक माह के अंदर लोगों ने लगभग साढ़े 22 लाख रुपए की मदद कर दी है पर अभी भी उसे इलाज के लिए 80 लाख रुपए और चाहिए। बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर दवा का इंतजाम करवाने या आर्थिक मदद करने की गुहार लगाई है। आगरा के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने भी उनकी मदद के लिए पत्राचार किया है।

डॉ अंजलि मां का ख्याल रखती हैं।
डॉ अंजलि मां का ख्याल रखती हैं।

 

आगरा के शहीद नगर निवासी अंजलि गुप्ता एसएन मेडिकल कालेज में आई डिपार्टमेंट में जूनियर डाक्टर हैं। उनकी मां दया गुप्ता पत्नी अशोक कुमार गुप्ता को साल 2019 में अचानक हाथ सुन्न होने की दिक्कत हुई थी , जब परिजन उन्हें लेकर मेडिकल कालेज आये तो जाँच में उनके ब्रेस्ट कैंसर होने की जानकारी हुई। इसके बाद परिजन दिल्ली एम्स लेकर गए। यहां पहले कीमोथेरेपी दी गयी फिर ऑपरेशन और रेडियो थेरेपी हुई और फिर दी गयी। 2020 में पेटसकन हुआ तो कैंसर ख़त्म हो चुका था। इसके बाद दीपावली के समय उन्हें पीठ दर्द की शिकायत हुई और की गयी तो पता चला की कैंसर अब हड्डियों में फैल रहा है। लगातार इलाज के बाद अब कैंसर अलग अलग हिस्सों में पहुँच रहा है।

अपनी मां दया गुप्ता के इलाज के लिए अंजलि को एक करोड़ रुपये की जरुरत है
अपनी मां दया गुप्ता के इलाज के लिए अंजलि को एक करोड़ रुपये की जरुरत है

 

एक करोड़ के इंजेक्शन है इलाज

एम्स में डॉक्टर्स ने दया गुप्ता को मेटास्टेटिक ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर बताया है और आगे इलाज के लिए “Sacituzumab” नामक इंजेक्शन लगवाने को कहा है। यह इंजेक्शन आर्डर देने पर अमेरिका से आयात किया जा सकता है। भारत में यह इंजेक्शन नहीं मिलता है। डॉ अंजलि के अनुसार यह दवा की चार साइकिल लगाई जानी है। एक साइकिल में छह इंजेक्शन की वाइल हैं और 21 दिन के अंतराल पर चार बार इंजेक्शन थेरेपी होनी है। एक साइकिल की कीमत 30 हजार डॉलर यानी लगभग 23 लाख रूपये है। जब तक पैसा इकट्ठा नहीं होता इलाज शुरू नहीं किया जा सकता है , फिलहाल लगातार कीमोथेरेपी की जा रही है।

सबकी आंखों का करती हैं इलाज पर खुद की आंखे मां को ठीक देखना चाहती हैं

मेरी तनख्वाह से मां की कीमोथेरेपी और दवा व घर का खर्च चलता है। काफी प्रयासों के बाद क्राउड फंडिंग की एक वेबसाइट के बारे में पता चला था और वहां प्रयास किया तो दोस्तों , रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने मदद की पर अभी मंजिल बहुत दूर है। डॉ अंजलि के मुताबिक जब मां को कैंसर हुआ था तो उसी दौरान उनका नीट क्वालीफाई हुआ था और वो इलाहबाद पढ़ने जा रही थी पर बीमारी की जानकारी होने पर उन्होंने जाना कैंसिल कर दिया, गनीमत रही की उन्हें यहां सीट मिल गई वरना वो शायद आगे पढ़ नहीं पाती। आज वो रोजाना लोगों की आँखों का इलाज करती हैं पर उनकी आंखें जिन्हें ठीक होता हुआ देखना चाहती हैं। उसके लिए उन्हें मदद की जरूरत है।

मां को सुला कर करती हैं क्राउड फंडिंग के लिए कैम्पेन
मां को सुला कर करती हैं क्राउड फंडिंग के लिए कैम्पेन

 

कोरोना से जीतने को पूंजी से हार चुका है परिवार

डॉ अंजलि के अनुसार कोरोना की पहली लहर में मां को इंफेक्शन न हो इसलिए पिता जी ने मेडिकल शॉप नहीं खोली , मुझे अक्टूबर में कोरोना हुआ और दूसरी लहर में अप्रैल में हमारा पूरा परिवार पॉजिटिव हो गया। इस कारण पिताजी दुकान नहीं खोल पाए। हम एक साथ रहकर जीना चाहते थे और हमने एक दूसरे का सहारा बनकर कोरोना को हराया पर इस दौरान मां के इलाज और धंधा बंद रहने के चलते जमा पूँजी ख़त्म हो गयी। भाई चंडीगढ़ में वेबसाइट डिजाइनिंग का बिजनेस करते हैं और कोविड के चलते उनका भी बहुत नुकसान हो चुका है। मिडिल क्लास से ताल्लुक रखने वाले हमारे परिवार के पास अब कुछ नहीं बचा है।

प्रधानमंत्री से लगाई गुहार

डॉ अंजलि ने आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल के द्वारा और खुद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है , उनका कहना है की सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल रहे एक सेना के अधिकारी के परिवार की महिला को भी इस दवा की जरूरत थी और उनके द्वारा मदद मांगने पर पीएम ने बात करके उन्हें दवा दिलाने का आश्वासन दिया है, अगर यह दवा भारत में मिलने लगे तो इसकी कीमत दस गुना से ज्यादा कम हो जाएगी और उनकी मां के जैसी सैकड़ों महिलाओं का जीवन बच सकेगा। मेटास्टेटिक ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में अंत में सिर्फ इस इंजेक्शन की थेरेपी का ही सहारा बाकी रह जाता है।

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