Sunday, September 19, 2021
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मूवी रिव्यू : दर्शकों को डराने का पूरा साजो-सामान, फिर भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती ‘भूत पार्ट वन : द हॉन्टेड शिप’

बॉलीवुड डेस्क. करन जौहर ने अपने बैनर से दूसरी हॉरर फिल्म ‘भूत’ बनाई है। पहली नेटफ्लिक्स के लिए ‘घोस्ट स्टोरीज’ थी, जो उन्होंने खुद डायरेक्ट की थी, जिसके लिए वे माफी भी मांग चुके हैं। ‘भूत’ उन्होंने अपने असिस्टेंट रहे शशांक खेतान के भी असिस्टेंट भानु प्रताप सिंह से बनवाई है। बीते दिसंबर में शशांक असिस्टेंट रहे राज मेहता की ‘गुड न्यूज’ पर तारीफों की बरसात हुई थी। लेकिन भानु प्रताप सिंह की झोली में ऐसा कुछ आने में संदेह है।

सच्ची घटना को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म

  1. भानु की यह फिल्म 9 साल पुरानी उस सच्ची घटना को केंद्र में रख कर बनाई गई है, जिसके मुताबिक, कोलंबो से गुजरात के अलंग यार्ड के लिए निकला एमवी विजडम जहाज अचानक जुहू बीच पर आ गया था। भानु ने घटना से प्रेरित होकर अपनी कहानी में विशालकाय जहाज सी बर्ड गढ़ा। कोलंबो की बजाय वह ओमान से जुहू बीच पहुंचा है। उसकी विशालता दस मंजिला इमारत जितनी है। लेकिन पूरी तरह खाली है। एक भी जीवित प्राणी उस डेक पर नहीं।
  2. जहाज कैसे आया, यह किसी को पता नहीं। लोगों को सिर्फ इतना मालूम है कि वह हॉन्टेड है और उसमें भूत-प्रेत का साया है। इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाने की जिम्मेदारी जिम्मा नायक पृथ्वी (विक्की कौशल) के हवाले है, जो ईमानदार और नेकदिल शिपिंग ऑफिसर है। पृथ्वी अपनी अगुवाई में शिप के कंटेनरों के जरिए अवैध धंधे करने वालों को पकड़वा चुका है। हालांकि, अतीत की एक घटना के चलते वह अपराध बोध में है।
  3. कहानी पृथ्वी के अपराध बोध और नए असाइनमेंट के बीच सफर करती है। जब वह जहाज के अभिशप्त होने की वजहों की तह जाता है तो कहानी का एक और सिरा खुलता है, जिसके तार 15 साल पहले उसी शिप में वंदना (मेहर विज) नाम की लड़की के साथ घटी एक घटना से जुड़े हैं। पृथ्वी के मकसद में  प्रोफेसर जोशी (आशुतोष राणा) का पूरा साथ मिलता है। इन सबके जरिए दर्शकों को डराने और एंगेज करने की कोशिश की गई है।
  4. देखा जाए तो दर्शकों को डराने के पूरे साजो-सामान डायरेक्टर के पास थे। विशालकाय जहाज का खालीपन था। किरदारों की जिंदगी की उथल-पुथल थी। केतन सोढा का बैकग्राउंड स्कोर था। अनीश जॉन जैसे साउंड डिजाइनर का साथ था। कमी बस राइटिंग में रह गई। पूरी फिल्म का बोझ अकेले मेन लीड नायक पर थोप दिया गया। नतीजतन नायक के द्वंद्व और अतीत की घटनाएं ही बार-बार पर्दे पर आती रहती हैं।
  5. फिल्म पहले हाफ में एक हद तक गुणवत्तापूर्ण बनने की दिशा में अग्रसर होती है। पर दूसरे हाफ में मुद्दे पर आते ही ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है। सी बर्ड जहाज से जुड़े राज के सारे पत्ते एक ही बार में खुल कर रह जाते हैं। आगे का सारा घटनाक्रम प्रेडिक्टेबल बन जाता है। इसके चलते फिल्म सतही हो जाती है। रही सही कसर भूत भगाने के लिए इस्तेमाल किए गए मंत्र और जाप पूरी कर देते हैं।
  6. पृथ्वी के रोल में विक्की कौशल वह समां नहीं बांध पाए हैं, जैसी उनसे उम्मीद थी। ‘मसान’ में वह नायक दीपक के दर्द से दर्शकों को अपना साझीदार बना गए थे। यहां पृथ्वी के डर में वे दर्शकों को एंगेज नहीं कर पाए हैं। यही हाल वंदना बनी मेहर विज और स्पेशल अपीयरेंस में आईं भूमि पेडनेकर का हुआ। इतना जरूर है कि डायरेक्टर ने इसे मेलोड्रामाटिक नहीं होने दिया। लेकिन यह सधी हुई फिल्म भी नहीं बन पाई है।  भूत की डिजाइनिंग और स्टाइलिंग भी असरहीन है। हां, बैकग्राउंड स्कोर जरूर धारदार है।
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