Friday, September 24, 2021
Homeविश्वएनालिसिस : 6 महीने में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 170 मौतें, जान जोखिम...

एनालिसिस : 6 महीने में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 170 मौतें, जान जोखिम में डाल रहे शरणार्थी

वॉशिंगटन. बेहतर जिंदगी की तलाश में मैक्सिको से अमेरिका जा रहे ऑस्कर अलबर्टो मार्टिनेज रामिरेज अपनी बेटी वालेरिया के साथ रियो ग्रांड नदी पार करते समय डूब गए। अलबर्टो 23 महीने की बेटी को अपनी टी-शर्ट में फंसाकर नदी पार कर रहे थे। अलबर्टो और उनकी बेटी की नदी किनारे डूबे हुई तस्वीर को देख पूरी दुनिया भावुक हो गई। अलबर्टो और उनकी बेटी ही नहीं बल्कि इस साल 27 जून तक 1,224 माइग्रेंट्स की मौत हो चुकी है, इनमें से 14% यानी 170 लोग अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर मारे गए। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन के मुताबिक, जनवरी 2014 से लेकर 27 जून 2019 तक 32,182 माइग्रेंट्स की मौत हुई। जबकि, इसी दौरान अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 2,075 लोग मरे।

अमेरिका का शरणार्थी कानून सख्त, इसलिए दूसरे तरीकों से जाते हैं लोग

  • मध्य अमेरिकी देशों में रहने वाले लोग अमेरिका में शरण मांगते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन देशों में राजनीति और आर्थिक अस्थिरता के अलावा बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुरू से ही शरणार्थियों के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में भी शरणार्थियों को मुद्दा बनाया था। ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका का शरणार्थी कानून (असाइलम सिस्टम) बेहद सख्त हो गया। असाइलम सिस्टम के मुताबिक- कोई व्यक्ति शरणार्थी के तौर पर दूसरे देश में शरण लेने के लिए आवेदन करता है। इसके लिए उसे बताना जरूरी होता है कि वह जिस देश का रहने वाला है, वहां उसकी जान को खतरा है।
  • लेकिन शरणार्थियों को असाइलम की प्रक्रिया से गुजरने के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। इस वजह से शरणार्थी दूसरों तरीके से अमेरिका में घुसने की कोशिश करते हैं और मारे जाते हैं। अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में 92,959 लोगों ने असाइलम के लिए आवेदन किया था जबकि 2017 में 55,584 लोगों ने आवेदन किया था। इसी साल शुरुआती 4 महीनों में मैक्सिको से करीब 18 हजार लोगों ने असाइलम के लिए आवेदन किया था।

मैक्सिको से अमेरिका जाने की तीन बड़े कारण- गरीबी, हिंसा और बेरोजगारी
मध्य अमेरिकी देशों से अमेरिका जाने के तीन बड़े कारण- गरीबी, हिंसा और बेरोजगारी है। होंडुरास, ग्वाटेमाला और अल-सल्वाडोर में गरीबी, हिंसा और बेरोजगारी अपने चरम पर है। कमोबेश यही हालात मैक्सिको में भी हैं। इस कारण बेहतर जिंदगी की तलाश में मैक्सिको और मध्य अमेरिकी देशों के लोग रोजाना अमेरिका-मैक्सिको सीमा पार करने की कोशिश करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 5 लाख लोग मैक्सिको के जरिए अमेरिका जाने की कोशिश करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल के शुरुआती 3 महीनों में ही 3 लाख से ज्यादा शरणार्थियों ने अमेरिका जाने की कोशिश की।

सीमा पार करने वालों की संख्या घटी, लेकिन हर महीने 40 हजार लोग पकड़े जा रहे
अमेरिका के कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 के बाद से अमेरिका की सीमा में आने वाले शरणार्थियों की संख्या में कमी आई है। इन आंकड़ों के मुताबिक, 2000 में जहां 16 लाख से ज्यादा लोगों को सीमा में घुसते हुए पकड़ा गया था, वहीं 2018 में 4 लाख लोगों को पकड़ा गया। लेकिन, इस साल मई तक अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 6 लाख लोगों को सीमा पार करते हुए पकड़ा जा चुका है।

ट्रम्प की धमकी के बाद मैक्सिको भी अप्रवासियों को रोक रहा

  • इसी साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी दी थी कि अगर मैक्सिको अपने देश से गैर कानूनी तरीके से आने वाले अप्रवासियों को नहीं रोकता, तो मैक्सिको से आने वाले सभी सामानों पर टैरिफ बढ़ा दिया जाएगा। ट्रम्प ने घोषणा की थी कि 10 जून से मैक्सिको से जो भी सामान आएगा, उसपर 5% टैरिफ लगाया जाएगा और यह टैरिफ तब तक हर महीने 5-5% बढ़ता रहेगा। हालांकि, बाद में मैक्सिको के साथ हुए समझौते के कारण ट्रम्प ने इस आदेश पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी।
  • इस समझौते के तहत मैक्सिको ने अपनी सीमा के जरिए होने वाले प्रवासियों के पलायन और ड्रग तस्करी रोकने की बात कही थी। साथ ही, मैक्सिको ने बेलिज और ग्वाटेमाला सीमा पर 6 हजार राष्ट्रीय गार्ड को तैनात करने का भरोसा दिलाया। यही नहीं मैक्सिको ने अमेरिका के साथ मिलकर प्रवासी सुरक्षा प्रोटोकॉल का विस्तार करने में भी सहमति जताई, जिसके जरिए असाइलम के लिए आवेदिन करने वाले शरणार्थियों को मैक्सिको में ही रहने के लिए जगह, शिक्षा और रोजगार दिए जाने की बात है। इसके अलावा, मैक्सिको ने उत्तरी सीमा पर भी 15 हजार सैनिकों को तैनात किया है।

सबसे ज्यादा मौतें भूमध्य सागर में
माइग्रेशन डेटा एनालिसिस सेंटर, आईओएम के अनुसार 2014 से अब तक दुनियाभर में 32,182 प्रवासियों की मौतें हुईं। अपने देश से दूसरे देश जाने के दौरान प्रवासियों की ये मौतें हुईं। आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मौतें भूमध्य सागर में हुईं। यहां 18 हजार 515 शरणार्थी सफर के दौरान मारे गए। यह कुल मौतों का 57.5% है। इन 6 सालों में सबसे ज्यादा मौतें 2016 में हुईं।

साल

अफ्रीका

एशिया

यूरोप

भूमध्य सागर

2014

623

825

20

3283

2015

1034

826

137

4054

2016

1831

204

63

5143

2017

1741

523

98

3139

2018

1401

186

116

2299

2019

132

16

19

597

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments