Saturday, September 18, 2021
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प्रवर्तन निदेशालय के सामने 5वीं बार पेश नहीं हुए अनिल देशमुख

मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच करने वाली केंद्रीय जांच एजेंसी यानी प्रवर्तन निदेशालय के सामने 5वीं बार महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पेश नहीं हुए। हालांकि, पिछली चार बार की तरह ही देशमुख की जगह उनके वकील इंद्रपाल सिंह ED ऑफिस पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने का हवाला देते हुए और वक्त मांगा। सिंह ने कहा कि हम ED का पूरा सहयोग कर रहे हैं। इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने देशमुख को बड़ा झटका देते हुए ED द्वारा शुरू की गई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया था, जिसके बाद देशमुख की ओर से एक पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

ED ने देशमुख के PA और PS को पिछले दिनों अरेस्ट किया था। इससे पहले इंद्रपाल सिंह ने देशमुख की बढ़ती उम्र और कोरोना का हवाला देते हुए पेश होने पर असमर्थता जताई थी। देशमुख के साथ उनके बेटे ऋषिकेश को भी समन भेजा गया है।

देशमुख के खिलाफ लटकी गिरफ्तारी की तलवार

देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट से जांच को स्थगित करने, गिरफ्तारी पर रोक लगाने और समन रद्द करने की मांग की थी। अब याचिका खारिज होने के बाद देशमुख पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती नजर आ रही है। देशमुख की मांग ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रावधानों में रह कर ही कानूनी उपाय किए जा सकते हैं। प्री अरेस्ट बेल के लिए वे मुंबई के स्थानीय न्यायालय में अपील करें। इस बारे में स्थानीय अदालत ही फैसले लेती है। सुप्रीम कोर्ट इसमें उनकी कोई मदद नहीं कर सकता।

देशमुख के खिलाफ CBI जांच रोकने वाली राज्य सरकार की याचिका खारिज

इस बीच बुधवार को अनिल देशमुख को एक और झटका लगा और महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके समर्थन में दायर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने सीबीआई द्वारा की जा रही जांच को रोकने की अपील की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच का विरोध करने से ऐसा लगता है कि राज्य सरकार पूर्व मंत्री की रक्षा कर रही है। राज्य को प्रशासन में शुद्धता के लिए किसी भी जांच के लिए तैयार रहना चाहिए और निष्पक्ष जांच की अनुमति देनी चाहिए।

4.7 करोड़ की संपत्ति हुई है जब्त

इससे पहले भी उनकी पत्नी और बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है, लेकिन वे सुनवाई के लिए एक बार भी हाजिर नहीं हुए। ED ने अनिल देशमुख के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 4.20 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। ED ने दावा किया था कि अनिल देशमुख ने बार मालिकों से पुलिस अधिकारी सचिन वझे द्वारा 4.70 करोड़ रुपए की वसूली करवाई। सचिन वझे ने यह रकम उन्हें दी। इस रकम को अनिल देशमुख ने अपने बिजनेस में इन्वेस्ट किया।

ED पर देशमुख ने लगाया था गंभीर आरोप

अनिल देशमुख ने ED को पत्र लिखा था, जिसमें कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी द्वारा अपनी ताकत और अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अभी तक मुझे ED की तरफ से ECIR की कॉपी या कोई भी दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। जिससे साफ होता है कि यह समन केवल मीडिया में सनसनी फैलाने के लिए भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के 1 दिन पहले ED ने जो समन भेजा है, उससे मेरा डर और पुख्ता हो गया है कि ED की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है।

परमबीर सिंह के आरोप के बाद शुरू हुई है जांच

यह मामला देशमुख पर लगे वसूली के आरोपों से जुड़ा है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने करीब ढाई महीने पहले राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने ही मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वझे को हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था।

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