Tuesday, September 28, 2021
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पंजाब : सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से नाराज आप नेताओं ने विधानसभा के बाहर दिया धरना

चंडीगढ़. गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले पर आई सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट व नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के बाहर धरना दिया। दोनों विपक्षी पार्टियां अकाली दल व आम आदमी पार्टी अपने-अपने मुद्दों को लेकर अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं। इससे पहले विधानसभा के दूसरे दिन सोमवार को गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से संबंधित केसों के मामले में शिरोमणि अकाली दल की ओर से पंजाब विधानसभा में लाया गया काम रोको प्रस्ताव स्पीकर राणा केपी सिंह ने रद्द कर दिया था।

शून्य काल में जब शिअद विधायक दल के नेता परमिंदर सिंह ढींडसा ने जानना चाहा कि यह किन नियमों के अधीन किया गया है तो स्पीकर ने कहा कि रूल्स 60-1 के अधीन प्रस्ताव तय समय से दो घंटे पहले सेक्रेटरी को दिया जाना चाहिए था। ढींडसा ने कहा कि आठ बजे सेक्रेटरी से बात हुई थी तो उन्होंने कहा कि वह ऑफिस में नहीं, घर हैं। 8.05 बजे इसकी एक कॉपी स्पीकर को उनके आवास पर देकर रिसीव करवाई गई, लेकिन स्पीकर नहीं माने और उन्होंने प्रस्ताव को रद्द कर दिया। नाराज अकाली विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

उधर, आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा ने भी यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। तब कहा गया था कि सीबीआई से सभी केस वापस लेकर स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम बनाई जाए, लेकिन अब एसआईटी का प्रमुख प्रबोध कुमार ही सीबीआई को लिख रहे हैं कि इन केसों की फिर से जांच की जाए। क्या प्रबोध कुमार विधानसभा से ऊपर हैं?

इस दौरान स्पीकर वेल में नारेबाजी कर रहे अकाली विधायकों को सीटों पर जाकर बैठने के लिए कहते रहे, लेकिन उन्होंने स्पीकर की एक बात नहीं सुनी। बाद में मीडिया को काम रोको प्रस्ताव की कॉपी देते हुए परमिंदर सिंह ढींडसा ने कहा कि बुर्ज जवाहर सिंह, बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से करवाई जाए।

बिक्रम मजीठिया ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं पर सरकार राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि इस समय यह सबसे बड़ा मुद्दा था, लेकिन सरकार इस पर बहस करने से भाग रही है। हमने सही समय पर सही जगह काम रोको प्रस्ताव दिया था, पर इसके बावजूद हमारा प्रस्ताव रद्द कर दिया।

अकाली दल ने जो प्रस्ताव दिया उसमें कहा गया कि सरकार के परस्पर विरोधी बयानों और सरकारी एजेंसियों की विभिन्न किस्म की परस्पर विरोधी रिपोर्ट के कारण यह प्रस्ताव लाना जरूरी है। सरकार को सभी काम छोड़कर इस पर बहस करवानी चाहिए। ढींडसा ने कहा कि इस प्रस्ताव को रद्द करने से साफ जाहिर है कि जिस तरह पहले 1984 के सिख कत्ल-ए-आम की निष्पक्ष जांच करने से बचने और दोषियों को बचाने में कांग्रेस लगी रही है, उसी तरह श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं पर सियासत करके बड़ा पाप कर रही है।

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