Monday, September 27, 2021
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धनबाद : 300 मकान व अपार्टमेंट की जांच में कहीं नहीं मिली रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था

धनबाद.  शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थिति काफी खराब है। लाेगाें ने लाखाें-कराेड़ाे खर्च कर शानदार आशियाने ताे बना लिए, पर भूमिगत जलस्त्रोत काे बढ़ाने और बरसात के पानी काे संचित करने का काेई व्यवस्था नहीं की है। शहर के पाॅश इलाके में शुमार धैया, रानीबांध, चनचनी काॅलाेनी, सूर्य विहार काॅलाेनी, चंद्रविहार काॅलाेनी समेत अन्य कई काॅलाेनियाें की स्थिति ताे और चाैंकाने वाली है। ये इलाके वार्ड 21 में है। इन इलाकाें में नगर निगम की टीम काे एक भी मकान में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं मिली। नगर आयुक्त चंद्रमाेहन कश्यप ने निर्देश पर निगम की टीम ने दाे दिनाें के दाैरान वार्ड 21 के 300 मकानाें की जांच की थी। टीम ने जांच रिपाेर्ट शुक्रवार काे नगर आयुक्त काे साैप दी है।

 

जल संरक्षण की काेई व्यवस्था नहीं
जांच टीम ने बताया कि वार्ड 21 में 300 भवनाें में करीब 60 अपार्टमेंट हैं। इन सभी की जांच की गई, लेकिन किसी में रिचार्ज पिट नजर नहीं आया। अपार्टमेंट में बरसात के पानी की नाली में ही की गई है। इस वार्ड में दर्जनाें ऐसे मकान है, जिसकी लंबाई-चाैड़ाई 3000 वर्गफीट से अधिक है, लेकिन इन भवनाें में भी जल संरक्षण की काेई व्यवस्था नहीं की गई है। नगर आयुक्त चंद्रमाेहन कश्यप ने बताया कि जांच रिपाेर्ट में जिन लाेगाें और अपार्टमेंट का नाम हैं, उन से हाेल्डिंग टैक्स के साथ डेढ़ गुना जुर्माना वसूला जाएगा। इसके साथ सभी काे अपने-अपने मकान और अपार्टमेंट में रिचार्ज पिट बनाने के लिए दबाव भी बनाया जाएगा।

 

अपार्टमेंटाें में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कराएगा बिल्डर एसोसिएशन
धनबाद बिल्डर एसाेसिएशन ने शुक्रवार को बैठक कर सभी अपार्टमेंटाें में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था का निर्णय लिया है। अध्यक्ष विनय सिंह ने बताया कि व्यवस्था सभी नए और पुराने अपार्टमेंट में की जाएगी। इस अभियान काे लेकर कमेटी भी गठित की गई है। कमेटी क्षेत्र में घूम-घूम कर बिल्डराें के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित करेगी। कमेटी में संतोष सिंह, अनिल सिंह, मनोज मोदी, शैलेश कुमार, प्रमोद अग्रवाल एवं विनय सिंह के साथ एक अभियंता भी शामिल हैं।

 

इधर…1727 में से 406 स्कूलों में बने सोखता
जल शक्ति अभियान के तहत जिले के 1727 सरकारी प्रारंभिक स्कूलाें में जल संरक्षण के लिए साेखता (साेक पिट) बनाया जाना है। इसमें 406 स्कूलाें में निर्माण पूरा हाे चुका है और 962 में साेखता निर्माणाधीन हैं। जल्द ही शेष 359 स्कूलाें में भी साेखता बनाने का काम शुरू किया जाएगा। साेखता निर्माण में सबसे अधिक सफलता ताेपचांची प्रखंड में मिली है। यहां 151 में 112 स्कूलाें में साेखता बन चुका है। वहीं पूर्वी टुंडी में 92 में 70 स्कूलाें में साेखता बन चुके हैं।

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