Sunday, September 26, 2021
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फादर ऑफ ट्री : पद्मश्री से सम्मानित बाबा सेवा सिंह ने 20 साल में 4 राज्यों के 450 किमी क्षेत्र में 4 लाख पौधे लगाए

अमृतसर (पंजाब). तरनतारन से खडूर साहिब का रुख करते ही हरे-भरे पेड़ आपका स्वागत करते हैं। खडूर साहिब को अलग-अलग दिशाओं से जाने वाली 7 सड़कों के दोनों तरफ लगे ये पेड़ पद्मश्री बाबा सेवा सिंह की 20 बरस की मेहनत का नतीजा है। बाबा सेवा सिंह को इसकी प्रेरणा अपने एक प्रण और गुरबाणी में गुरु साहिबान की ओर से दिए गए संदेश से मिली। 2004 में गुरु अर्जन देव का 500वां प्रकाश पर्व था। इससे 5 साल पहले, 1999 में बाबा सेवा सिंह की संस्था निशान-ए-सिखी ने प्रकाश पर्व की तैयारियां शुरू की तो संगत से पूछकर 5 प्रण लिए। इनमें पर्यावरण बचाने का प्रण भी था। 20 साल बाद बाबा सेवा सिंह के लगाए 4 लाख पौधों में ज्यादातर पेड़ बन चुके हैं। इसी वजह से बाबा सेवा सिंह को ‘फादर ऑफ ट्री’ कहा जाता है।

 

4 एकड़ की नर्सरी में एक लाख पौधे तैयार

तरनतारन, जंडियाला, रईया और खिलचियां से खडूर साहिब को जाने वाली 128 किमी लंबी 7 सड़कों के किनारे बाबा सेवा सिंह और उनके सेवादारों ने 25600 पौधे लगाए थे, वे पेड़ बन चुके हैं। वह ब्यास-अमृतसर हाईवे के किनारे भी पेड़ लगा रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए 2010 में उन्हें पद्मश्री दिया गया। उन्हें राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र भी बुलाया गया। अब तक बाबा सेवा सिंह 4 राज्यों के 450 किमी में 4 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। वह कहते हैं, ‘पौधे लगाना मुश्किल नहीं है। मेहनत उसे बड़ा करने में है।’ इसी सोच के साथ उन्होंने खडूर साहिब में 4 एकड़ में नर्सरी बना रखी है, जहां हर समय एक लाख से अधिक पौधे तैयार रहते हैं।

अड़चनें आईं, सबका हल निकाल कर बढ़े आगे

  1. मुहिम के शुरू में हर पौधे के लिए ट्री-गार्ड लगाते थे, जिस पर खर्च आता। चूंकि सारा पैसा संगत का था इसलिए खर्च कम करने के मकसद से पौधों को नर्सरी में ही 5-5 फीट तक बढ़ाकर उनकी रोपाई शुरू की। इसके दो फायदे हुए। पहला-बड़ा पौधा जानवरों से सुरक्षित हो गया। दूसरा-उसकी देखभाल की जरूरत भी कम हो गई। जिन पौधों को बड़ा करके लगाया, उनका सरवाइवल रेट 95% आया जबकि सामान्यत: यह 70% तक ही रहता है।
  2. राजस्थान में पौधे लगाने पहुंचे तो नई चुनौती से सामना हुआ। वहां लंबी गर्दन के कारण ऊंट 5 फीट ऊंचे पौधे भी खा जाते थे। इसलिए वहां पेड़ों को नर्सरी में 20 फीट तक बढ़ाकर लगाया गया। महाराष्ट्र पहुंचे तो अलग चुनौती मिली। वहां जमीन पथरीली थी और मिट्‌टी नाममात्र की थी इसलिए वहां पहले गड्‌ढे खोदकर उन्हें साफ मिट्टी डाली और फिर पौधे लगाए।
  3. बाबा सेवा सिंह कभी किसी को लगाने के लिए पौधे नहीं देते। वह पहले पूछते हैं कि किस जगह कितने पौध लगाए जाने हैं। इसके बाद खुद वहां जाकर पौधे लगाते हैं। पौधे ले जाने के लिए उनके पास दो ट्रक हैं। पानी देने के लिए टैंकर भी हैं। पौध लगाने की सेवा संगत करती है। पंजाब में वह पौधों की सार-संभाल के लिए वेतन पर सेवादार हैं। 20 किलोमीटर के क्षेत्र में  इन सेवादारों के पास हर समय खुरपी और पौधों को पानी देने के लिए एक बाल्टी रहती है।
  4. पंजाब में लगातार धान की खेती से जमीन का पानी नीचे जा रहा है। ऐसे में किसानों की सोच बदलने और उन्हें फसली चक्र से निकालने के लिए बाबा सेवा सिंह ने खडूर साहिब में ही मॉडल बाग तैयार किया है। इस बाग में आम, अमरुद, लीची, नाशपत्ती, आड़ू, चीकू और जामुन से लेकर लौंग, इलायची, दालचीनी व धूप बनाने में इस्तेमाल होने वाली गुग्गल तक के पेड़-पौधे लगे हैं।
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