Friday, September 24, 2021
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रिपोर्ट /ट्रैफिक नियम तोड़कर चालान नहीं भरने में बंगाल सबसे आगे, जुर्माना जमा करने में झारखंड टॉप पर

  • आठ करोड़ में से 83 लाख वाहनों का मामला अदालत में पहुंचा
  • सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद कोर्ट के चालान भी घर से जमा होंगे

नई दिल्ली. ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद चालान न भरने में पश्चिम बंगाल के वाहन चालक सबसे आगे हैं। वहीं, झारखंड चालान जमा करने में टॉप पर है। चालान न जमा कराने वालों में यूपी और दिल्ली के बाद राजस्थान चौथे नंबर पर है। एक साल में करीब 8 करोड़ चालान हुए, जिसमें से 83 लाख से अधिक लोगों ने चालान नहीं भरे हैं, जिससे ये मामले कोर्ट पहुंच गए हैं।

सड़क परिवहन मंत्रालय कोर्ट पहुंचने वाले मामलों के चालान घर बैठे जमा कराने के लिए वाहन सॉफ्टवेयर अपडेट करा रहा है, जिससे लोग ई-चालान जमा करा सकेंगे। इसके लिए निचली अदालतों के सॉफ्टवेयर भी अपडेट किए जा रहे हैं। इस साल के अंत तक यह सुविधा शुरू होने की उम्मीद है। ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद 90% लोग जुर्माना भर देते हैं लेकिन 10% किन्हीं कारणों से जुर्माना नहीं भरते हैं।

रजिस्ट्रेशन में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने से संपर्क नहीं हो पाता

ये जुर्माना राशि 100 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक होती है। इनमें 80% ऐसे मामले हैं जिनमें जुर्माना 100 रुपए का ही है। ऐसे वाहन पुराने होते हैं, जिनके रजिस्ट्रेशन में मोबाइल नंबर दर्ज नहीं होता है, अगर नया रजिस्टर्ड है तो मोबाइल नंबर गलत दर्ज होता है, जिससे वाहन स्वामी को चालान होने के तुरंत बाद पता नहीं चलता है।

पुलिस ने माना- चालान जमा न करने वाले नॉन कॉन्टेक्ट हाेते हैं

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त आयुक्त कन्नन जगदीशन ने बताया कि चालान न जमा करने वालों में 6 से 7 फीसदी नॉन कॉन्टेक्ट वाले होते हैं यानी ट्रैफिक नियम तोड़ने पर फोटो खींचकर चालान मोबाइल पर भेज दिया जाता है लेकिन वाहन मालिक के पास पहुंच नहीं पाता है और अदालत पहुंचने के बाद इसकी जानकारी होती है।

किस श्रेणी में किए गए चालान

खतरनाक ड्राइविंग, बगैर लाइसेंस, ओवर स्पीड, बगैर हेमलेट, रेडलाइट जंप, उल्टी दिशा में गाड़ी चलाना प्रमुख रूप से शामिल हैं।

चालान नहीं जमा कराने वाले राज्य 

राज्यसंख्या
पश्चिम बंगाल54,27,639
उत्तर प्रदेश5,84,630
दिल्ली5, 52,157
राजस्थान2,51,658
हिमाचल प्रदेश1, 37,140
महाराष्ट्र1,68,892
गुजरात58,991
मध्यप्रदेश21,334
छत्तीसगढ़8,867
झारखंड1,635
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