Tuesday, September 28, 2021
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2007 बैच की IAS आनंदिता मित्रा के सामने बड़ी चुनौतियां

चंडीगढ़ में नगर निगम कमिश्नर रहे के के यादव का तीन साल का कार्यकाल व तीन महीने का सेवा विस्तार पूरा होने के बाद अब आज नगर निगम की नव नियुक्त कमिश्नर पंजाब कैडर के 2007 बैच की आईएएस अधिकारी आनंदिता मित्रा अपना कार्यभार संभालेंगी। वहीं आनंदिता मित्रा के सामने शहर को संवारकर रख पाने के लिए कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी। इन चुनौतियों में बात की जाए तो सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने निगम को वित्तीय संकट से निकालना होगा, जबकि शहर में घर-घर जाकर कचरा उठाने वाली गाड़ियों के संचालन व शुल्क को लेकर लंबे समय से आ रही समस्याओं को ठीक करना भी एक चुनौती होगी। इससे पहले पूर्व आयुक्त केके यादव ने अपने कार्यकाल में स्मार्ट सिटी व नगर निगम की कई योजनाओं को शुरू कराया है। इसे सुचारू रूप से चलाने से लेकर उसे सुधार कराना भी आयुक्त के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा, जबकि इसी साल के अंत तक नगर निगम में पार्षदों के चुनाव होने हैं। इसके कारण हर एक पार्षद अपने एरिया में काम कराने को लेकर नगर निगम कमिश्नर के पास पहुंचते रहेंगे, क्योंकि चुनाव के पहले ही पार्षदों को अपने क्षेत्र में बेहतर काम कर दिखाते हुए ही जनता से वोट मांगने होगें। साथ ही अपने कार्यकाल की उपलब्धि रख सकें। इसके लिए भी नव नियुवक्त आयुक्त को संर्घष करना पड़ सकता है। वहीं पानी के बढ़े हुए दरों को कम करने के कारण निगम को पहले ही 90 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई के लिए निगम ने प्रशासन को अतिरिक्त फंड देने के लिए भी पत्र लिख चुका है। लेकिन प्रशासन ने साफ इनकार कर दिया था। बता दें कि केंद्र से बजट में 20 प्रतिशत की कटौती के लिए भी कहा गया है। ऐसे में विकास कार्यों को चालू रखना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके साथ ही निगम ने घरों से कचरा लेने के लिए शहर में गाड़ियां संचालित कर दीं हैं, लेकिन गाड़ियों को लेकर असमंजस है। पानी के बिल के साथ जुड़कर आ रहे कचरे के शुल्क को लेकर लोगों में नाराजगी है। इस व्यवस्था को ठीक करना आयुक्त की जिम्मेदारी होगी। शहर के कचरे का निस्तारण सबसे बड़ी चुनौती है। निगम ने प्लांट तो ले लिया लेकिन उसे चला नहीं सका। अब निगम गीले कचरे की मशीन को अपग्रेड करने और सूखे कचरे की नई मशीन लगाने की योजना बना रहा है, जो पिछले सात माह से कागजों में ही है।

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