Tuesday, September 28, 2021
Homeबिहारबिहार : बाढ़ पीड़ित जुगाड़ से बना रहे जीने का सहारा, थर्मोकोल...

बिहार : बाढ़ पीड़ित जुगाड़ से बना रहे जीने का सहारा, थर्मोकोल से बनाते हैं नाव

पटना. पानी में कहीं जाना हो तो सबसे पहले नाव की जरूरत सामने आती है, लेकिन नाव न मिले तो क्या करें? ऐसे में दो विकल्प हैं। पहला घर से बाहर न जाएं और दूसरा नाव का विकल्प तैयार करें। ऐसे की स्थिति में जुगार तकनीकि काम आती है। अररिया, किशनगंज, सुपौल, सहरसा, सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे जिलों में बाढ़ का सामना कर रहे लोग बड़े पैमाने पर जुगार से बनी नाव बनाकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

केले के थम को जोड़ाकर बना दी नाव
केले का थम (तना) पानी में नहीं डूबता। इसका उत्प्लावन बल (पानी पर उपलाने की ताकत) बहुत अधिक होती है। एक केले के थम को पकड़कर एक व्यक्ति पानी में डूबने से बच सकता है। नाव बनाने के लिए केले के कई थम को एक साथ जोड़ा जाता है। उन्हें जोड़ने के लिए बांस के टुकड़े का इस्तेमाल किया जाता है। बांस के टुकड़े से कई थम को जोड़ा जाता है। रस्सी से बांधकर इसे और मजबूत किया जाता है। 6 या इससे अधिक थम को जोड़कर बनी नाव कई लोगों का वजन सह लेती है।

थर्मोकोल को जोड़कर बनाते हैं नाव
मछली को थर्मोकोल के बक्सों में भरकर आंध्रप्रदेश से बिहार लाया जाता है। मजबूत बनावट वाले ये बक्से पानी में नहीं डूबते। ऐसे कई बक्सों को जोड़कर नाव बनाई जाती है। नाव को मजबूती देने के लिए उसे चारों तरफ से पॉलीथिन या प्लास्टिक की शीट से कवर किया जाता है। नाव पर बांस की चचरी बांध दी जाती है, जिससे वजन समान रूप से पूरे नाव पर बंटता है।

टीन और प्लास्टिक के डंबे भी आते हैं काम
नाव बनाने के लिए टीन और प्लास्टिक के बड़े डंबे भी काम आते हैं। पहले डब्बे की ढक्कन को बंदकर सील किया जाता है, जिससे पानी अंदर न जा सके। इसके बाद दो, तीन या इससे अधिक डब्बों को आपस में बांध दिया जाता है। अररिया जिले में ऐसे ही डब्बों से बनी नाव पर शादी के बाद वर-वधू को विदा किया गया था।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments