Wednesday, September 22, 2021
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महाराष्ट्र में BJP सांसद का जाति प्रमाण पत्र रद्द, सदस्यता पर छाया संकट

  • बीजेपी सांसद की सदस्या रद्द हो सकती है
  • सिद्धेश्वर शिवाचार्य का जाति प्रमाण पत्र फर्जी

महाराष्ट्र में बीजेपी के एक लोकसभा सदस्य की सदस्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. सोलापुर से बीजेपी सांसद जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है. सोलापुर जिला जाति वैधता समिति ने शिवाचार्य के जाति प्रमाण पत्र को अवैध पाया है और सांसद के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही  उनके इस सीट से सांसद बने रहने पर सवालिया निशान लग गए हैं और ऐसे में उनकी सदस्यता जा सकती है.

लोकसभा चुनाव 2019 में सोलापुर (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) सीट से बीजेपी के जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य सांसद निर्वाचित हुए थे. उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे और वंचित विकास आघाड़ी और डॉ. भीमराव आम्बेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर को मात देकर सांसद चुने गए थे, लेकिन अब उनका जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है.

ज्ञानदेव सुल की अध्यक्षता और छाया गाडेकर और संतोष जाधव की सदस्यता वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपने 20 फरवरी के आदेश में बीजेपी सांसद जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य  के दावे को खारिज कर दिया और जनवरी, 1982 में जारी उनके जाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया. जिला जाति वैधता समिति ने कहा कि स्वामी ने अपने चुनावी हलफनामे में फर्जी प्रमाणपत्र दाखिल किया था. समिति ने अक्कलकोट (सोलापुर) जिला प्रशासन को उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है.

दरअसल पिछले साल जून में प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के नेता प्रमोद आर गायकवाड़, विनायक बी कांदकुरे और मिलिंद एम मुले ने स्वामी के चुनावी हलफनामे पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद जिला जाति वैधता समिति ने स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

जयसिद्धेश्वर स्वामी ने अपने नामांकन पत्र में अपनी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र भी दिया था, जिनमें उन्होंने अपनी जाति बेड जंगल बताई थी. वहीं, उनका भतीजा योगेश्वर सिद्धमायला ‘हिंदू बेडा जंगम’ समुदाय से है जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आते हैं. इस लेकर उस समय विरोध हुआ था साथ ही जाति पड़ताल समिति में शिकायत दर्ज की गई गायकवाड़ का कहना था, ‘एक ही परिवार के दो लोगों के पास अलग-अलग जाति प्रमाणपत्र कैसे हो सकते हैं. इसी के  बाद उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग को उन्हें अयोग्य करार देना चाहिए.

इस संबंध में 31 जनवरी और 1 फरवरी को इस समिति ने सुनवाई की थी जिसमें समिति उनकी जाति से जुड़े कागजों से संतुष्ट नहीं हुई थी. ऐसे में उनसे कई दूसरे कागज मांगे गए थे. 15 फरवरी को जब इस मामले की सुनवाई हुई तो उन्होंने कोई भी कागज पेश नहीं किए, जिसके बाद सांसद की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए जाति से संबंधित मूल कागजात दिए गए हैं, ऐसे में कागज पेश नहीं किया जा सकता है. इसी के बाद से सोमवार को सुनाए गए इस फैसले में समिति ने जाति प्रमाण पत्र को अवैध ठहरा दिया.

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