Thursday, September 23, 2021
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चंडीगढ़ में भी ब्लैक फंगस महामारी घोषित:PGI में इस वक्त 27 मरीज भर्ती; 20 की सर्जरी हाे चुकी, 7 की होना बाकी

एक बीमारी खत्म नहीं हुई और दूसरी भी आ गई। कोरोना के बाद चंडीगढ़ में भी ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनोर की मंजूरी के बाद प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ अरुण कुमार गुप्ता ने इसकी नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इसमें कहा गया है कि चंडीगढ़ में भी ब्लैक फंगस का खतरा है, जिसके चलते मौजूदा कानून इसे संभालने के लिए नाकाफी हैं। चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन एपीडेमिक डिजीज(म्यूकोरमाइकोसिस) रेगुलेशन 2021 को नोटिफाई किया गया है, जो एक साल के लिए लागू रहेंगे।

चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन एपीडेमिक डिजीज (म्यूकोरमाइकोसिस) रेगुलेशन 2021 को नोटिफाई किया गया है, जो एक साल के लिए लागू रहेंगे।

PGI में अब तक करीब 27 मरीज इस बीमारी के आ चुके हैं। इनमें सात की सर्जरी अभी हाेनी है। बाकी के मरीजाें की सर्जरी हाे चुकी है। इनमें अधिकतर मरीजाें काे एक आंख खाेनी पड़ी है। GMCH-32 में सात मरीजाें का इलाज चल रहा है। PGI के डायरेक्टर प्राे. जगत राम ने बताया कि उनके यहां राेजाना 4 से 5 मरीज म्यूकाेर माइकाेसिस के आ रहे हैं। इनमें 80 फीसदी पंजाब के हैं, 20 फीसदी मरीज हरियाणा, हिमाचल, UP के हैं। सूत्राें का कहना है कि चंडीगढ़ में अभी इस बीमारी के दाे से तीन मरीज आ चुके हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की तरफ से ब्लैक फंगस के पेशेंट्स के लिए निर्देश जारी किए जाते हैं। जैसे स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, मेनेजमेंट, ट्रीटमेंट। इन्हें ही फाॅलो किया जाएगा। प्रशासन ने महामारी घोषित करने के साथ ही सभी सरकारी और प्राइवेट हाॅस्पिटलों को निर्देश दिए हैं कि उनके यहां ब्लैक फंगस का संदिग्ध या कन्फर्म पेशेंट आए तो उसकी सूचना तुरंत हेल्थ डिपार्टमेंट को देनी है। कोई भी व्यक्ति, इंस्टीट्यूशन या ऑर्गेनाइजेशन बिना हेल्थ डिपार्टमेंट की मंजूरी के ब्लैक फंगस को लेकर कोई जानकारी आगे जारी नहीं करेगा।

इस महामारी को लेकर DHS की प्रमुखता में एक कमेटी बनाई गई है। इंटरनल मेडिसिन, ऑप्थोमोलाॅजी, ENT से स्पेशलिस्ट इसके मेंबर होंगे। कमेटी देखेगी कि नोटिफिकेशन में जो निर्देश जारी हुए हैं, उनका कोई हाॅस्पिटल, व्यक्ति या संस्था उल्लंघन तो नहीं कर रहा। अगर उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसे DHS नोटिस जारी करेगा। जो जवाब आएगा, उसे कमेटी रिव्यू करेगी।

क्याें बढ़ रहा है ब्लैक फंगस

जिन मरीजाें काे डायबिटीज है, उनकाे काेराेना हाे जाता है, संक्रमण ज्यादा हाेने पर उसे कंट्राेल करने के लिए स्टेरॉयड दिया जा रहा है। स्टेरॉयड की ज्यादा मात्रा शरीर में जाने पर शुगर लेवल बढ़ जाता है। 90 फीसदी डायबिटीज के मरीज इस बीमारी के शिकार हाे रहे हैं। ऐसे में मरीजाें काे म्यूकाेर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस हाे जाता है। हालांकि, यह काेई बीमारी नहीं है, लेकिन काेराेना काल में यह बीमारी ज्यादा हाे रही है। पिछले साल PGI में इस बीमारी के 61 मरीज आए थे। इस साल जनवरी से अप्रैल तक 25 मरीज आए। इनमें से 14 की माैत हाे गई बाकी का इलाज चल रहा है। पिछले डेढ़ से दाे महीने में करीब 27 मरीज और PGI में आए हैं। वहीं GMCH-32 के ENT डिपार्टमेंट के HOD प्राे. सुरेंद्र के सिंघाल ने बताया कि GMCH-32 में 8 मरीज हैं। इनकी हालत भी नाजुक है।

क्या हैं लक्षण

PGI के हेड नेक सर्जरी के एसाेसिएट प्राे. संदीप बंसल बताते हैं :

  • आंखाें में लालामी और आंखाें के अंदर दर्द, साथ ही चेहरे पर भारीपन महसूस हाे रहा है ताे इसे हल्के में न लें। यह म्यूकर माइकाेसिस यानी ब्लैक फंगस भी हाे सकता है।
  • नाक के किनाराें पर काले धब्बे पड़ना।
  • बार-बार नाक बंद हाेना
  • आंखों से धुंधला दिखना, धीरे-धीरे राेशनी कम हाेना।
  • चेहरे पर सूजन आना
  • आंखें लाल और दर्द हो, चेहरे पर भारीपन महसूस हो तो हल्के में न लें

किसे ज्यादा खतरा

जिन मरीजाें की अनकंट्राेल्ड डायबिटीज है, या फिर कैंसर की बीमारी हाेने के चलते दवाएं चल रही हैं। उन मरीजाें का इम्युनाेकाेंप्राेमाइज हाे जाता है। काेविड पाॅजिटिव हाेने पर संक्रमण ज्यादा गंभीर हाेने के चलते म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस हाेने का खतरा रहता है। डायबिटीज के मरीज जाे कि काेराेना संक्रमण से पीड़ित हैं। 90 फीसदी ऐसे मरीजाें काे म्यूकर माइकाेसिस का खतरा ज्यादा रहता है।

केमिस्ट से दवा लेकर इलाज न करें इंडाेक्रायाेनाेलाॅजी विभाग के HOD प्रो. संजय बडाडा ने बताया- जिन लाेगाें काे काेविड के लक्षण हैं और डायबिटिक हैं। शुगर लेवल बढ़ा हुआ है ताे केमिस्ट से दवा लेकर इलाज न करें। क्याेंकि, केमिस्ट अपनी मर्जी से स्टेरॉयड का हेवी डाेज दे देते हैं। इससे शुगर अनियंत्रित हाे जाती है। संक्रमण ज्यादा है ताे डाॅक्टर की सलाह के मुताबिक स्टेरॉयड लें। जरूरी काम हाेने पर किसी के घर जाएं या फिर संपर्क में आने से बचें। ऑक्सीजन सेचुरेशन काे मेंटेन करने के लिए अगर आपको ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगा हुआ है ताे उसके पाइप में जमा पानी बदलते रहें। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर के ट्यूब का पानी भी समय-समय पर बदलते रहें। अगर एक ऑक्सीजन सिलेंडर किसी दूसरे मरीज काे लगाया जा रहा है ताे उसका ट्यूब काे या ताे सैनिटाइज करें या फिर उसे बदलकर इस्तेमाल करें। ऐसा न करने से एक से दूसरी व्यक्ति में इसके फैलने का खतरा ज्यादा रहता है।

इंफेक्शियस डिजीज सेंटर बनाने हाेंगेे

PGI में कोविड मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन प्रो. जीडी पुरी का कहना है- जिस तरह से यह बीमारियां बढ़ रही है, उसे देखते हुए अब सरकार काे हर शहर में 100 से 200 बेडेड इंफेक्शियस डिजीज सेंटर बनाने हाेंगे।ऐसे मरीजाें काे खुले कमराें रखना हाेगा।

मरीजों को टीका आसानी से मिले, इस पर अब जोर
चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह का कहना है कि काेराेना में कारगर रेमडिसिविर और टाॅसिमिजाॅब इंजेक्शन लाेगाें काे आसानी मिला था। उसे हमने हेल्थ डिपार्टमेंट के जरिए मरीजाें तक पहुंचाने का इंतजाम किया ताे इससे लाेगाें काे सुविधा हुई। अब ब्लैक फंगस के लिए जरूरी इंजेक्शन भी इसी तरह से मरीजाें काे आसानी से मिले, इसके लिए सरकार से बात यह व्यवस्था करवाएंगे

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