झारखंड में पारंपरिक तरीके से छठ पर्व संपन्न

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झारखंडमें सोमवार की सुबह ‘उषा अर्घ्य’ के साथ चार दिवसीय छठ पर्व सम्पन्न हो गया. उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए राज्य भर के विभिन्न जलाशयों में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए. नदियों, नालों, झीलों एवं तालाबों में श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान किया. श्रद्धालुओं ने इस दौरान भक्ति गीत गाए और पटाखे चलाए. आम जन के अलावा राजनीतिक हस्तियां भी विभिन्न जलाशयों में सूर्य भगवान को ‘अर्घ्य’ देने के लिए एकत्र हुईं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना और दो बेटों के साथ रविवार शाम रांची के हटनिया तालाब में पूजा-अर्चना की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने जमशेदपुर के सूर्यधाम में पूजा-अर्चना की.

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी पूजा-अर्चना की. सोरेन ने कहा, ‘‘छठ पूजा प्रकृति की पूजा है. यह समर्पण, विश्वास और स्वच्छता का एक महान उदाहरण है. मैं इस महान परंपरा के आगे अपना शीश झुकाता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं छठी मैया से प्रार्थना करता हूं कि वे सभी को खुशियां और अच्छा स्वास्थ्य दें.’’ विभिन्न जलाशयों में इस वर्ष जलस्तर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहा. विभिन्न जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. संवेदनशील तालाबों और नदियों पर अवरोधक लगाए गए और खतरे वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया था.

रांची प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य की राजधानी में त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ और इस दौरान किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली. कई भक्तों ने जल निकायों के बहुत दूर होने, प्रदूषण और अधिक आयु जैसे कारणों की वजह से छतों पर बने अस्थायी तालाबों में भी अनुष्ठान किया. रांची निवासी राजेंद्र महोट ने कहा, ‘‘हमने जलाशय के हमारे घर से बहुत दूर होने के कारण छत पर पानी की टंकी में अनुष्ठान किया.’’ एक अन्य श्रद्धालु अनिल सिंह ने कहा, ‘‘हम पिछले तीन वर्ष से रांची के तालाबों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण छत पर एक छोटे से अस्थायी तालाब में अनुष्ठान कर रहे हैं.’’ पलामू के उपायुक्त ए डोड्डे ने बताया कि जिले में त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ.

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