Friday, September 17, 2021
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किसान आंदोलन में बच्चे भी शामिल:सुबह ट्रॉलियों में बैठ ऑनलाइन क्लास में करते हैं पढ़ाई, दोपहर बाद आंदोलन में भी होते हैं शामिल

  • कोई पिता की जगह आया तो कोई पिता के साथ, किसी का पूरा परिवार आंदोलन में शामिल
  • आंदोलनकारी बच्चे बोले: क्या मांगें हैं ज्यादा नहीं पता लेकिन बुजुर्गों का साथ देना हमारा फर्ज

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में बॉर्डर पर युवा, बुजुर्ग व महिलाओं के साथ बच्चे भी शामिल हैं। कोई पिता की जगह आया है तो कोई पिता के साथ। कुछ का पूरा परिवार आंदोलन में शामिल है। किसान नेता हरमीत सिंह कादियां खुद अपने 10 साल के बच्चे लेकर आए हैं। बच्चे सुबह ट्रॉलियों में बैठकर ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेते हैं तो दिन में आंदोलन में शामिल हो जाते हैं। दिनभर खाना बनाने से लेकर अन्य कामों में मदद कर रहे हैं। ज्यादातर बच्चों को यहां आने का स्पष्ट कारण नहीं पता। इनका कहना है कि कुछ भी हो, परिवार का साथ देना हमारा फर्ज है।

धरती हमारी मां है, लेकिन हम पढ़ाई भी नहीं छोड़ सकते

सुबह 11 बजे दो सिख बच्चे बॉर्डर पर ट्रॉलियों में बैठे दिखे। एक के हाथ में मोबाइल तो एक हाथ में कॉपी-पेन था। समझ नहीं आया कि गेम खेल रहे हैं या पढ़ाई कर रहे हैं। इनसे बात की तो इनमें से एक अमृतसर के जनाला से 12 साल का दिलबाग था और एक अमृतसर से 13 साल का सुखबीर। दिलबाग ने बताया कि हम ट्राॅली में बैठकर ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। बॉर्डर पर नेटवर्क की दिक्कत है। सुखबीर ने बताया कि धरती हमारी मां है, इसल आंदोलन में आए हैं, लेकिन पढ़ाई भी नहीं छोड़ सकते।

बीमार पिता की जगह आया हूं

पंजाब के फतेहगढ़ से आए 12 साल के सुखजीत ने बताया कि वह पिता की जगह चाचा के साथ आया है। हर घर से एक आदमी को आना था, लेकिन मेरे पिता बीमार हैं। वह 9वीं में पढ़ता है। स्कूल अभी बंद थे, सोचा था कि यहीं ऑनलाइन क्लास लगा लूंगा, लेकिन सही से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। बॉर्डर पर नेट की दिक्कत है, कई बार तो पूरी क्लास ही निकल जाती है। कई बार काम में हाथ बंटाते हुए ही समय निकल जाता है।

जिद करके आया हूं

पंजाब के रोपड़ से आए 14 साल के देवेंद्र ने बताया कि उसके घर वाले उसे नहीं ला रहे थे, वह जिद करके आया है। हमारी क्या मांगें हैं और क्यों आए हैं, इसका मुझे नहीं पता। मुझे ये पता है कि हमारी खेती से जुड़ी कोई बात है और हम खेती पर असर नहीं आने देंगे। अब मां की याद आती है। वापस जाने का अभी कोई रास्ता नहीं है। इसलिए रोज सोच कर सोता हूं कि कल सरकार मांगें मान लेगी और मैं वापस जाकर अपनी मां से मिलूंगा।

हमें ही खेती संभालनी है

14 साल के गुरप्रताप सिंह ने बताया कि वह 11वीं में पढ़ता है। अब भी खेती में हाथ बंटाता है। आगे मुझे ही खेती संभालनी है। इसलिए मर्जी से आया हूं। कोरोना के कारण पढ़ाई तो वैसे ही बंद है। ऑनलाइन क्लास वापस जाकर लगा लूंगा। अभी अपने परिवार और खेती के लिए यहां आया हूं। हमारी पढ़ाई की इतनी ही चिंता है तो सरकार हमारी मांगें जल्द मान ले, जिससे पढ़ाई कर सकें।

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