तिब्बत मामलों के विशेष समन्वयक रॉबर्ट ए डेस्ट्रो ने शुक्रवार को कहा कि विश्व के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका तिब्बत के क्षेत्रों में राजनयिकों और पत्रकारों समेत विदेशी लोगों की पहुंच की मांग उसी तरह करता रहेगा, जिस तरह की पहुंच चीनी राजनयिकों, पत्रकारों और नागरिकों को संबंधित देशों में हासिल है।

एक ऑनलाइन कार्यक्रम में डेस्ट्रो ने कहा, ‘तिब्बत में पहुंच और पारदर्शिता का दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने पारस्परिक तिब्बत पहुंच अधिनियम बनाया है। हम अमेरिका जैसी सोच रखने वाले मित्रों और सहयोगियों से अपील करते हैं कि वे इसी तरह का अपना एक अधिनियम पारित करें।’

बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2018 में इस विधेयक पर हस्ताक्षर करके इसे कानून बना दिया था। इसमें उन चीनी अफसरों के अमेरिका में प्रवेश नहीं देने को कहा गया है जो तिब्बत में विदेशी नागरिकों की यात्रा प्रतिबंधित करने में शामिल हैं।

उल्‍लेखनीय है कि तिब्‍बत को लेकर चीन और अमेरिका के बीच गतिरोध की खाई और गहरी होने की संभावना बन रही है। तिब्‍बत को लेकर अमेरिका का चीन के प्रति कड़ा रुख इसका मुख्‍य कारण है। दूसरा कारण तिब्‍बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री डॉक्‍टर लोबसांग सांगे की अमेरिकी यात्रा है जो पिछले साठ वर्षों में तिब्‍बत की निर्वासित सरकार से जुड़े किसी भी व्‍यक्ति की ये पहली आधिकारिक अमेरिकी यात्रा है। उन्‍होंने व्हाइट हाउस में तिब्बत मामलों के नवनियुक्त समन्वयक रॉबर्ट डेस्ट्रो से भी विभिन्‍न मसलों पर वार्ता की है।

हाल में अमेरिकी संसद में तिब्बत की वास्तविक स्वायत्तता को मंजूरी दी गई है। इसे लेकर चीन का कड़े तेवर दिख रहे हैं। बता दें कि डॉक्‍टर सांगे अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्‍ट्रपति जो बाइडन को उनकी जीत पर बधाई भी दे चुके हैं