CJI चंद्रचूड़ ने संविधान दिवस पर नेहरू को किया याद

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भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने संविधान दिवस के अवसर पर जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण का जिक्र किया. इसमें उन्होंने कहा कि अतीत अभी भी कुछ हद तक हमसे जुड़ा हुआ है और हमें उन वादों को पूरा करने के लिए बहुत कुछ करना है. ये भाषण पं नेहरू ने आजादी की रात दिया था जिसे ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी के नाम से जाना जाता है.सीजेआई चंद्रचूड़, पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू सहित अन्य लोगों की मौजूदगी में सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया.

सीजेआई चंद्रचूड़ ने आजादी के पहले और बाद के समय के बारे में बात करते हुए जवाहर लाल नेहरू के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि वो सीमांत समुदाय संविधान की नींव रखने वाले पहले व्यक्ति थे. मुख्य न्यायाधीश ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के कोट को भी याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उद्धरण को भी याद किया कि “नैतिक ब्रह्मांड का चाप लंबा है, लेकिन यह न्याय की ओर झुकता है. वहीं इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे में जब देश अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है, उसे और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए मौलिक कर्तव्यों का पालन करना नागरिकों की पहली प्राथमिकता होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में संविधान दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है जो तेजी से विकास और आर्थिक विकास हासिल कर रहा है.

मोदी ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि मौलिक अधिकार वे जिम्मेदारियां हैं जिन्हें नागरिकों को अत्यंत समर्पण और सच्ची ईमानदारी के साथ पूरा करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने ई-अदालत परियोजना के तहत नयी पहल भी शुरू कीं, जो सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सक्षम अदालतों के माध्यम से वादियों, वकीलों और न्यायपालिका को सेवाएं प्रदान करती हैं. मोदी द्वारा शुरू की गई पहलों में ‘वर्चुअल जस्टिस क्लॉक’, ‘जस्टआईएस’ मोबाइल ऐप 2.0, डिजिटल कोर्ट और ‘एस3डब्ल्यूएएस’ वेबसाइट शामिल हैं मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने जोर देकर कहा कि कानूनी पेशे में हाशिए के समुदायों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए. अदालतों को लोगों तक पहुंचने के बजाय लोगों तक पहुंचने के लिए खुद को फिर से तैयार करने की आवश्यकता है. हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है. केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान उस आधारशिला पर है जिस पर भारतीय लोकतंत्र खड़ा है.

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