Tuesday, September 28, 2021
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महाराष्ट्र : भीमा-कोरगांव हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग ने कहा- प्रतिदिन के खर्च के लिए भी पैसे नहीं

मुंबई. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच कर रहे आयोग के सामने आर्थिक तंगी का संकट आ गया है। स्थिति यह है कि आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि उनके पास प्रतिदिन के खर्च के लिए भी पैसे नहीं हैं। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए 9 फरवरी, 2018 को आयोग का गठन किया था।

आयोग को शुरुआत में 52 लाख का बजट दिया गया था

जांच आयोग ने पत्र में कहा है- कर्मचारी भी बिना वेतन के आगे काम जारी नहीं रख सकते हैं। करीब 52 लाख रुपए का शुरुआती बजट दिया गया, जो कि पर्याप्त नहीं था। इसके खत्म होने के बाद राज्य सरकार ने पूरक बजट की मंजूरी में देरी की। इसके बाद जिस बजट की मंजूरी दी गई, वह आवश्यकता से बहुत कम है।

जांच को लेकर राज्य व केंद्र के बीच खींचतान

हाल ही में भीमा कोरेगांव हिंस से जुड़े मामलों की जांच गृहमंत्रालय ने एनआईए को सौंप दी है। जबकि दो साल से महाराष्ट्र पुलिस ही इस मामले की जांच कर रही थी। केंद्र द्वारा इस मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने पर महाराष्ट्र सरकार ने विरोध किया था और इसे संविधान के खिलाफ बताया था। राज्य के गृहमंत्री ने कहा था कि केंद्र ने बिना राज्य से किसी तरह की बात हुए इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि केंद्र के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

भीमा-कोरगांव में जनवरी 2018 को हुई थी हिंसा

भीमा-कोरेगांव में 1 जनवरी, 2018 को हिंसा भड़क गई थी। इस घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। पुलिस ने 162 लोगों के खिलाफ 58 मामले दर्ज किए थे। इसमें अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 आरोपी हैं। कोर्ट में पेश ड्राफ्ट चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या की तरह ही रोड शो के दौरान पीएम मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे। आरोपियों में मानवाधिकार वकील, शिक्षाविद और लेखक शामिल हैं। पुलिस ने इनका संबंध प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी), कबीर कला मंच (केकेएम) से बताया है।

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