Sunday, September 19, 2021
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50 बिस्तर के अस्पताल का निर्माण 3 साल में भी नहीं हो पाया शुरू

गुना। कोरोना की दूसरी लहर ने अस्पतालों की आवश्यकता और कमी को जगजाहिर किया था। इसके बावजूद भी गुना जिले में वर्ष 2018 में स्वीकृत हुए एक अस्पताल में 3 साल बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। विधानसभा में जब यह मामला उठा तो सरकारी कामों की रफ़्तार सामने आयी। तीन साल में अस्पताल का एक पिलर तक नहीं खुद पाया है। एक तरफ देश में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है वहीं दूसरी तरफ निर्माण कार्यों की धीमी रफ़्तार खुद ही तैयारियों की पोल खोलती दिख रही है।

वर्ष 2018 के मार्च में जिले के आरोन में 50 बिस्तर का अस्पताल अस्पताल परिसर में ही बनाने के लिए स्वीकृति दी गयी। 5 करोड़ 63 लाख रूपये अस्पताल बनाने के लिए स्वीकृत किये गए। निर्माण कार्य का टेंडर लगाया गया, जो प्रस्तावित राशि से 9.21 प्रतिशत कम पर दिया गया। सितम्बर 2018 में ही PWD-PIU ने सम्बंधित ठेकेदार को काम शुरू करने और जरुरी दस्तावेज जमा करने के लिए पत्र भी लिख दिया। 26 सितम्बर को ठेकेदार अरविन्द गुप्ता के साथ एग्रीमेंट हुआ। अस्पताल भवन निर्माण की समय अवधि 18 महीने रखी गयी।

लेकिन स्थानीय प्रशासन ने यह कहा की पुराणी अस्पताल की बिल्डिंग अभी अच्छी हालत में है, इसलिए इसे न तोड़ा जाए और कहीं दूसरी जगह पर नया अस्पताल बनाया जाए। इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए कलेक्टर ने 6 मार्च 2019 को अस्पताल भवन के लिए नई जगह आवंटित कर दी। उसके बाद आवंटित जमीन पर अतिक्रमण हटाने और फलदार वृक्ष हटाने के लिए अनुमति मांगी गयी जो 17 मार्च 2020 को दी गयी। अनुमति के 9 महीने बाद फलदार वृक्ष हटाए गए। मार्च में अनुमति मिलने के बाद भी 10 दिसंबर को वृक्ष हटाए जा सके। 9 महीने इसी काम में लग गए। इसके बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया। इसके 6 महीने बाद जून 2021 में PWD-PIU ने ठेकेदार से काम शुरू करने के लिए कहा है।

सरकारी कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की 2018 में स्वीकृत हुआ कार्य 2021 में भी शुरू नहीं हो पाया है। 3 साल गुजर जाने के बाद भी अस्पताल अभी सिर्फ फाइलों में ही दबा हुआ है। एक तरफ कोरोना की तीसरी लहर की मुहाने पर प्रदेश खड़ा है। पिछले दिनों से फिर नए पॉजिटिव केस आना शुरू हो गए हैं। जबकि दूसरी लहर में ही अस्पतालों में बिस्तरों की भारी कमी पद गयी थी। लोग फर्श पर इलाज कराने को मजबूर थे। ऐसी परिस्थितियों में भी अस्पताल निर्माण नहीं हो पाया है।

ऐसे चला घटनाक्रम

28.3.2018 – आरोन में ५० बिस्तर के अस्पताल भवन की स्वीकृति (लागत ५ करोड़ ६३ लाख)

6.3.2019- अस्पताल के लिए नयी जमीन कलेक्टर द्वारा आवंटित

17.3.2020- जमीन से अतिक्रमण एवं फलदार वृक्ष हटाने की अनुमति

10.12.2020- जमीन से वृक्ष हटाए गए

17.6.2021 – ठेकेदार को कार्य शुरू करने के निर्देश (इस अस्पताल भवन के निर्माण कार्य की अवधि 18 महीने तय की गयी थी।

जयवर्धन ने उठाया सवाल

पूर्व मंत्री एवं राघोगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने इस मामले से सम्बंधित सवाल विधानसभा में पूछा। तब जाकर यह खुलासा हुआ। स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने उनके सवाल पर अब तक निर्माण कार्य शुरू न होने और इतनी देरी होने की बात बताई। आरोन क्षेत्र उनकी विधानसभा में ही पड़ता है। इस अस्पताल के बन जाने से आरोन के आस-पास के लगभग 50 से ज्यादा गांव के नागरिकों को इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अभी वर्तमान में मौजूद अस्पताल ओवरलोड रहता है। अधिकतर लोगों को इलाज के लिए 35 किमी दूर गुना आना पड़ता है।

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