Thursday, September 16, 2021
Homeराजस्थानकोरोना का रोंगटे खड़े करने वाला रूप:7 दिन में एक-एक कर ससुर,...

कोरोना का रोंगटे खड़े करने वाला रूप:7 दिन में एक-एक कर ससुर, पिता और मां को कोरोना लील गया, पूरा परिवार संक्रमित

चौहाबो सेक्टर-15 मकान 16 में रहने वाले हाउसिंग बोर्ड के एईएन दीपक बिस्सा की दर्द भरी दास्तां है। वे शुक्रवार सुबह सिवांची गेट स्थित पुष्करणा समाज माेक्षधाम पर मां का अंतिम संस्कार कर रहे थे। 7 दिन में एक-एक कर अपने 3 पेरेंट्स को खोने के गम में रोते-रोते आज उनकी आंख के आंसू तक सूख गए। वे शून्य में खोए अपनी मां की चिता को टकटकी लगाकर देख रहे थे।

दीपक बिस्सा अपने परिवार के साथ।
  • मां का अंतिम संस्कार करने पुत्र को अकेले जाना पड़ा, दोनों बेटे, पत्नी भी संक्रमित, बहन-बहनोई बच्चों सहित क्वारेंटाइन

वे बार-बार कह रहे थे कि ईश्वर ऐसी परीक्षा क्यों ले रहा हैं…मैंने ऐसा क्या किया..? कोरोना संक्रमित शवों का दाह संस्कार करने वाले समाजसेवी नवीन पुरोहित ने जब समीप आकर दीपक को कपाल क्रिया की रस्म पूरी करने को कहा तो वे हिम्मत कर चिता के समीप गए। जैसे ही कपाल क्रिया की तो उनका धैर्य टूट गया। वे जार-जार रोने लगे।

नवीन पुरोहित ने उनका ढांढ़स बंधाया तो बोले-मेरे पिताजी ने तो वैक्सीन की दोनों डोज ले ली, मैंने, मेरी पत्नी आैर मां ने भी एक-एक डोज लगवा ली। मेरे ससुर ने भी वैक्सीन की एक डोज लगवा ली थी, फिर कोरोना हमारे परिवार पर ही इतना कहर क्यों बरपा रहा हैं।इतना कहकर फिर विलाप करने लगे। कुछ देर विलाप के बाद हाथ को सेनेटाइज करते हुए पूरी पीड़ा बयां की।

पिता लगवा चुके थे दोनों डोज, बाकी परिवार ने 1-1 डोज लगवा ली थी

उन्होंने बताया कि घर में उम्रदराज पेरेंट्स को लेकर काफी चिंतित रहते थे। 78 साल के उनके पिताजी सूर्यप्रकाश बिस्सा ने 13 अप्रैल को वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई थी। उसी दिन मैंने आैर मेरी पत्नी वेदवंती के साथ 68 साल की मां सूरजकौर ने भी वैक्सीन की पहली डोज लगवा ली थी। हालांकि मां दमा से पीड़ित होने से ऑक्सीजन पर थी।

उन्हें पहली डोज लगी तो सबने राहत की सांस ली। चार दिन बाद ही मेरे दोनों बच्चे, 22 साल का दिवाकर आैर 17 साल के दिव्यांश के साथ मेरी पत्नी को खांसी-बुखार आया। उसी दिन कोरोना जांच करवाई तो 19 को तीनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दोनों बच्चे होम आइसोलेट हुए। 47 साल की पत्नी को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।

बच्चों व पत्नी काे संभाल ही रहा था कि दो दिन बाद 21 अप्रैल को पिताजी को भी हल्की खांसी हुई। दवा दी लेकिन शाम को तबीयत बिगड़ी तो एमजीएच लेकर गए। वहां बेड व ऑक्सीजन नहींं होने पर वसुंधरा अस्पताल में लेकर गए। सब कुछ ठीक चल रहा था।

24 घंटे में ससुर व पापा का निधन

तभी 23 अप्रैल की रात सूचना आई कि कबूतरों का चौक पूरा मोहल्ला निवासी मेरे ससुर 76 वर्षीय मंडलदत्त पुरोहित नहीं रहे। वे पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमित थे और कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

अभी ससुर की चिता ठंडी भी नहीं हुई कि 24 अप्रैल की रात 12 बजे पिताजी ने अंतिम श्वांस ली। तीन दिन बाद माताजी की जांच भी पॉजिटिव आने के बाद 27 अप्रैल को जीवनज्योति अस्पताल में भर्ती करवाया। पहले से ऑक्सीजन पर रही मां की तबीयत नहीं सुधरी आैर 29 अप्रैल की रात 2 बजे मां भी हमेशा के लिए छोड़कर चली गईं।

पहले से ही दो पेरेंट्स को खो चुके दीपक को मां के जाने का सदमा ज्यादा लगा। घर में अकेले होने के चलते जीवनज्योति अस्पताल में भर्ती पत्नी को छुट्‌टी दिलाकर घर लेकर आ गए। दीपक की इकलौती बहन निधि बोहरा व उनके पति होम आइसोलेट हैं और उनके दो जुड़वां बेटे व एक लड़की व अन्य सदस्य क्वारेंटाइन हुए हैं। ऐसे में दीपक को अकेले ही सभी रस्में पूरी करनी पड़ीं। परिवार का एक भी सदस्य ना घर आया, ना दाह संस्कार में शामिल हुआ

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments