Sunday, September 19, 2021
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डेटा लीक : फेसबुक पर अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन ने 34 हजार करोड़ रु. जुर्माने की सिफारिश की

वॉशिंगटन. अमेरिकी नियामकों (रेग्युलेटर्स) ने फेसबुक के डेटा सुरक्षा और निजता उल्लंघन मामले की जांच के बाद कंपनी पर 5 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपए) का जुर्माना तय किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार मामलों को देखने वाली फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने मार्च 2018 में फेसबुक पर लगे कथित डेटा लीक के आरोपों की जांच शुरू की थी। इसमें कंपनी को यूजर्स की निजता और सुरक्षा में चूक का दोषी पाया गया।

फेसबुक की डेटा प्राइवेसी सवालों के घेरे में

अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, फेसबुक पर 2018 में ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका को अपने करोड़ों यूजर्स का डेटा देने का आरोप लगा था। इसके बाद से ही उसकी डेटा प्राइवेसी और यूजर सिक्योरिटी के मुद्दे पर सवाल उठने लगे थे। मार्क जुकरबर्ग को इस मामले में अमेरिकी संसद के सामने पेश भी होना पड़ा था। एफटीसी ने इसके बाद ही फेसबुक पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर दी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक ने अपने खिलाफ जांच शुरू होने के बाद ही कानूनी समझौते के लिए 3 से 5 अरब डॉलर चुकाने की बात कही थी। एफटीसी ने भी मामले की जांच खत्म करने के लिए इन्हीं शर्तों पर कंपनी पर जुर्माना लगाया है। हालांकि इस पर अभी अमेरिकी न्याय विभाग की मुहर लगना बाकी है।

गूगल पर सात साल पहले लगा था 154 करोड़ का जुर्माना
कमीशन की तरफ से फेसबुक पर लगाया गया जुर्माना किसी टेक कंपनी पर लगी अब तक की सबसे बड़ी पेनाल्टी है। हालांकि, यह फेसबुक के 2018 के रेवेन्यू का महज 9% ही है। इससे पहले एफटीसी ने 2012 में गूगल पर निजता के एक मामले में 2.25 करोड़ डॉलर (करीब 154 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया था।

कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा लीक विवाद
फेसबुक ने पिछले साल मार्च में ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका को 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक होने की बात मानी थी। कैंब्रिज एनालिटिका ने इन सूचनाओं का इस्तेमाल 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान किया था। एफटीसी के अलावा अमेरिकी रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस भी इसकी जांच कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2018 में मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक फेसबुक ने यूजर्स का जितना डेटा दूसरी कंपनियों को देने की बात स्वीकार की थी, वास्तव में वह उससे कहीं ज्यादा सूचनाएं उन्हें दे रही थी।

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