Thursday, September 23, 2021
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गुजरात : बेटी ने दहेज में मांगी अपने वजन जितनी किताबें, पिता एक गाड़ी भरकर 2200 पुस्तकें देंगे

राजकोट. बेटी को ससुराल भेजते समय आज भी लोग उसे गहने, कपड़े, जवाहरात, वाहन, नकद राशि आदि देते हैँ। किंतु यहां एक ऐसी बेटी भी है, जिसने पिता से अपने वजन जितनी किताबों की मांग की। इससे प्रेरित होकर पिता ने उसे यह वचन दिया कि वह एक गाड़ी भरकर किताबें देकर ही उसे विदा करेंगे।

घर में 500 पुस्तकों की लायब्रेरी
शहर के  नानमवा में रहने वाले शिक्षक हरदेव सिंह जाडेजा की बेटी किन्नरी बा को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक था। उसके घर पर ही 500 किताबों की लायब्रेरी थी। किताबों के शौक ने बेटी किन्नरी को अच्छे संस्कार मिल गए। उसकी शब्द संपदा भी काफी बढ़ गई। वह एक कुशल वक्ता भी बन गई। अपने विचारों को वह धारदार तरीके से रखना जानती है। जब उसकी सगाई वडोदरा के भगीरथ सिंह सरवैया के बेटे कनाडावासी इंजीनियर पूर्वजीत सिंह से हुई, तब किन्नरी ने अपने पिता से कहा-मेरी शादी में आप दहेज के रूप में मेरे वजन जितनी किताबें देंगे, तो मुझे अच्छा लगेगा। इससे पिता को बहुत ही खुशी हुई। उसे वचन दिया कि वे उसे एक गाड़ी भरकर 2200 किताबें दहेज के रूप में देंगे, यह सुनकर बेटी की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

6 महीने तक किताबें बटोरी
बेटी की इच्छा को पूर्ण करने के लिए पिता हरदेव सिंह ने पहले पुस्तकों की सूची बनाई। फिर 6 महीने तक दिल्ली, काशी और बेगलुरू समेत कई शहरों से किताबें एकत्रित की। भास्कर से बात करते हुए शिक्षक पिता ने बताया कि बेटी को दी जाने वाली किताबों में महर्षि वेद व्यास से लेकर आधुनिक लेखकों की अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती भाषा की किताबें खरीदी हैं। गुरुवार की शाम को बेटी की विदाई होगी, तब पिता अपनी बेटी को ये सारी किताबें एक गाड़ी में भरकर देंगे।

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