Wednesday, September 22, 2021
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यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ी याचिकाओं पर अगले साल सुनवाई करेगा दिल्ली HC

  • यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सुनवाई अगले साल मार्च में होगी
  • केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा- कुछ और वक्त की है जरूरत

देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू करने से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चली. इस दौरान केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा. केंद्र ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें कुछ और वक्त की जरूरत है. केंद्र ने कोर्ट से कहा कि यह एक अहम मुद्दा है, सरकार इस मामले से जुड़े सभी बिंदुओं पर गौर करने के बाद ही कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना चाहती है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए मामले की सुनवाई 2 मार्च तक के लिए टाल दी है. यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर ज्यूडिशियल कमीशन बनाने या फिर ड्राफ्ट तैयार करने को लेकर ये जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं. यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ी इन याचिकाओं में से एक याचिका बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने भी लगाई गई है.

5वीं बार गृह मंत्रालय ने मांगा वक्त

यह 5वीं बार है जब गृह मंत्रालय ने यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ी हुई याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से और समय मांगा है. दिल्ली हाई कोर्ट, यूनिफॉर्म सिविल कोड पर फिलहाल पांच जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है.

हाई कोर्ट में लगाई गई पांच जनहित याचिकाओं में पांच विषयों को लेकर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की कोर्ट से मांग की गई है. इसमें पहली मांग है कि महिलाओं को मिलने वाले तलाक एक जैसे ग्राउंड पर हों. यानी कि महिलाओं को तलाक देने या लेने के लिए धर्म आधार ना हो, बल्कि तलाक कानूनी आधार पर दिया जाए. इसके अलावा मेंटेनेंस और ऐलीमनी (alimony) को लेकर भी सभी धर्मों में नियम और कानून समान हो.

कानूनी प्रक्रिया के तहत, धार्मिक आधार पर नहीं

यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ी याचिका में तीसरे जिस मुख्य बिंदु को रखा गया है वह बच्चों के एडॉप्शन और उनके पालन-पोषण से जुड़ा हुआ है. यहां भी मांग की गई है कि बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत काम हो ना कि धार्मिक आधार पर तय की गई मान्यताओं से.

उत्तराधिकार से जुड़े नियमों पर भी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की मांग की गई है. 5वीं सबसे अहम मांग शादी की उम्र को लेकर है. याचिका में मांग की गई है कि महिला और पुरुष दोनों के लिए शादी की उम्र एक ही होनी चाहिए. भारत में फिलहाल महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और पुरुषों के लिए 21 वर्ष तय की गई है, अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है, तो दोनों के लिए ही यह उम्र एक जैसी हो जाएगी.

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