Thursday, September 23, 2021
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कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी:गंगा घाटों पर मेले-सा नजारा, अहले सुबह से ही स्नान के लिए उमड़ पड़े श्रद्धालु

पटना के भद्रघाट पर कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु।
  • कार्तिक पूर्णिमा को लेकर गंगा घाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर बैरिकेडिंग
  • यातायात के लिए वैकल्पिक रास्ते, पुलिस के जवान भी हैं तैनात

कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए गंगा घाटों पर अहले सुबह से ही श्रद्धालु उमड़ पड़े। पटना के गंगा घाटों पर मेले-सा नजारा है। कार्तिक पूर्णिमा को लेकर गंगा घाट की ओर जाने वाली कई मुख्य सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। यातायात के लिए वैकल्पिक रास्ते तय किए गए हैं। पुलिस के जवानों को भी लगाया गया है।

कार्तिक पूर्णिमा पर जल अर्पित करती महिला।
कार्तिक पूर्णिमा पर जल अर्पित करती महिला।

कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान, दीपदान, पूजा, आरती, हवन और दान का बहुत महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालु गरीबों को फल, अनाज, दाल, चावल, गरम वस्त्र आदि चीजों का दान करते देखे जा रहे हैं। सुबह में ठंड के बावजूद गंगा में डुबकी लगाते श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी।

भागलपुर के बरारी पुल घाट पर गंदे पानी में डुबकी लगाने को विवश दिखे लोग।
भागलपुर के बरारी पुल घाट पर गंदे पानी में डुबकी लगाने को विवश दिखे लोग।

गंदे पानी में डुबकी लगाने की मजबूरी

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आस्था के कारण लोग गंदे पानी में भी डुबकी लगाने को मजबूर हैं। यह तस्वीर भागलपुर के बरारी पुल घाट की है। यहां स्नान करने आई प्रीति कुमारी का कहना है कि आस्था है तो नहाना ही है, लेकिन नहाने के लिए यह जल उपयुक्त नहीं है। वहीं राजेन्द्र मिश्र का कहना है कि गंगाजल हमेशा शुद्ध ही होता है, लेकिन दिखने में यह गंदा जरूर लगता है। इसे देखकर नहाना ठीक नहीं लग रहा है, लेकिन क्या करें आस्था है तो स्नान करना पड़ रहा है। इसके बारे में तो प्रशासन को सोचना चाहिए था।

कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही

अभी तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है। इसके बावजूद कोरोना पर आस्था भारी पड़ती दिख रही है। एक तो सुबह से ही घाटों पर काफी भीड़ है ऊपर से प्रशासनिक स्तर पर कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पानी में तेजी से कोरोना संक्रमण फैलता है, इसके बावजूद न तो श्रद्धालु गंभीर हैं और ना ही प्रशासन।

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु।

क्या हैं धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इससे देवता बहुत प्रसन्न हुए थे। तब भगवान विष्णु ने भोलेनाथ को त्रिपुरारी का नाम दिया था। ऐसा माना जाता है कि त्रिपुरासुर के वध होने की खुशी में सभी देवता स्वर्ग से उतरकर काशी में दीपावली मनाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्‍नान करने का बहुत महत्व है। मान्‍यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने से पुण्‍य की प्राप्‍ति होती है। इस दिन सत्‍यनारायण भगवान की कथा पढ़ने, सुनने और सुनाने का भी बहुत महत्व है।

गंगा घाटों पर दिख रहे आस्था के अलग-अलग रंग।
गंगा घाटों पर दिख रहे आस्था के अलग-अलग रंग।
कार्तिक पूर्णिमा पर निर्धनों को दान करते श्रद्धालु।
कार्तिक पूर्णिमा पर निर्धनों को दान करते श्रद्धालु।

कार्तिक पूर्णिमा प्रकाश उत्सव के रूप में भी
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानकदेव जी महाराज का जन्म हुआ था। हिंदू और सिख कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश उत्सव के रूप में भी मनाते हैं। गुरुद्वारों में विशेष अरदास और लंगर आयोजित किया जाता है।

भागलपुर के बरारी पुल घाट पर चुंबक से सिक्के निकालता बच्चा।
भागलपुर के बरारी पुल घाट पर चुंबक से सिक्के निकालता बच्चा।

चुंबक के जरिये पानी से पैसे निकलते बच्चों को देखा है आपने?

कार्तिक पूर्णिमा पर गांव के बच्चों को बड़ा मजा आता है। वे इस दिन का बहुत पहले से इंतजार करते रहते हैं। पहले से चुंबक का उपाय करके रखते हैं, ताकि पानी से सिक्के निकाल सकें। कार्तिक पूर्णिमा पर लोग गंगा जी में सिक्के डालते हैं, ये बच्चे उन्हीं सिक्कों को चुंबक से निकालते हैं। इस तरह बच्चों के पास काफी पैसे हो जाते हैं। भागलपुर के बरारी पुल घाट पर अभिनव ने सुबह से 53 रुपए निकाल लिए हैं। फुदो कुमारी ने 22 रुपए निकाले, मोहम्मद सलीम ने 8 रुपए निकाले तो तनवीर ने 5 रुपए के सिक्के निकाले। वहीं कुछ बच्चे श्रद्धालुओं के द्वारा गंगाजल में दीपक विसर्जन के दौरान प्रसाद खोजते हुए भी नजर आए।हालांकि सिक्के निकालने के चक्कर में डूबने से मौत की घटनाएं भी कई बार हुई हैं, बावजूद कुछ सिक्कों के लिए गांव के बच्चे जान जोखिम में डाल देते हैं।

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