Monday, September 27, 2021
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पटियाला : दिव्यांग के पास नहीं थे अस्पताल जाने काे पैसे, ट्रैफिक इंचार्ज ने देखा ताे चलवा दिए 8 ई-रिक्शा

पटियाला. अच्छे कारनामाें की बजाय पंजाब पुलिस नशे और रिश्वतखाेरी के लिए ज्यादा बदनाम है। लेकिन पंजाब पुलिस में ऐसे भी कुछ मुलाजिम हैं जिन्हें दूसरे की सेवा संभाल करने में आनंद आता है। पटियाला ट्रैफिक इंचार्ज इंस्पेक्टर रणजीत सिंह और उनके बेटे फूड सप्लाई विभाग में इंस्पेक्टर कनवप्रीत ने पटियाला में दिव्यांगों काे उनकी मंजिल तक छोड़ने को ई-रिक्शा सेवा शुरू की है।

इनमें ड्राइवर जितने दिव्यांगाें को उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं उसकी पेमेंट पिता-पुत्र खुद करते हैं। करीब 1 माह पहले इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ट्रैफिक कंट्राेल कर रहे थे। एक विकलांग अस्पताल पहुंचाने की ऑटाे वाले से गुहार लगा रहा था। पैसे न होने से वे बैठा नहीं रहे थे। ये देख जेब से पैसे निकाल कर उन्होंने ऑटाे वाले काे दिए और अस्पताल पहुंचवाया। उन्हाेंने विकलांगाें के लिए मदद की साेची और अब उनकी सेवा के लिए 8 ई-रिक्शा चलवा दिए।

रणजीत सिंह ने बेटे से सहयाेग मांगा ताे तुरंत हाे गया तैयार
भले ही हमारे समाज में समाजसेवी संस्थाएं हर प्रकार की लोगों को मदद देने में आगे आती है लेकिन पटियाला ट्रैफिक इंचार्ज इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ने अपने फूड सप्लाई विभाग में इंस्पेक्टर बेटे से सहयोग मांगा ताे वह भी इस नेक काम के लिए तुरंत तैयार हाे गए। शहर में दिव्यांगाें काे उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा की सेवा शुरू कर दी है। जिनमें ड्राइवर दिन भर में जितने भी दिव्यांग लोगों को उठाकर मंजिल तक पहुंचाते हैं ड्राइवरों को दोनों बाप बेटा अपनी सैलरी से उनका खर्चा देते हैं।
ई-रिक्शा के पीछे लिखा है विकलांगाें की सेवा नि:शुल्क
दिव्यांग व्यक्ति से कोई भी पैसा नहीं दिया जाएगा और उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए वह ई रिक्शा ड्राइवर पाबंद है। इसके लिए ई-रिक्शा के पीछे बकायादा लिखा गया है कि विकलांगाें के लिए सेवा निशुल्क है। शहर में आपको कहीं भी जाना हाे रिक्शा चालक आपको फ्री में छाेड़कर आएगा। अगर रिक्शे वाला आपसे काेई पैसे मांगे ताे आप मुझे बताएं।
हर सवारी के हिसाब से ई रिक्शा वाले लेते हैं ₹10 रुपए
रंजीत सिंह ने बताया कि राजेंद्रा अस्पताल माता कौशल्या अस्पताल बस स्टैंड रेलवे स्टेशन गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब श्री काली माता मंदिर के अलावा दो ई-रिक्शा चालक शहर में चक्कर लगाते हैं और जहां से भी उन्हें दिव्यांग सवारी मिलती है उसे उठाकर वह उसकी मंजिल तक पहुंचाते हैं और इसी तरह वह दिनभर उठाए जाने वाली दिव्यांग सवारियों की उन्हें डिटेल देते हैं जिसके बाद उन्हें ₹10 रुपए पर सवारी के हिसाब से पैसा अपनी जेब से देते हैं।

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