Tuesday, September 28, 2021
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नशे के आदी 75 युवाओं पर डॉक्टरों ने की स्टडी

कोरोना काल के दो साल में पीजीआई के राज्य व्यसन निर्भरता केंद्र में ओपीडी बंद रहने और समय पर दवा न मिल पाने से महंगा नशा करने के शौकीन युवा नशे की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पाए। सेंटर में एक बार फिर ओपीडी का संचालन शुरू होने पर परिजन बच्चों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए डॉक्टरों के पास लेकर पहुंच रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के डायरेक्टर कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता के निर्देशन में चिकित्सकों ने प्रदेश के 18 से 25 साल की आयु वर्ग में हेरोइन, कोकीन, स्मैक का नशा करने वाले 75 युवाओं की काउंसिलिंग के आधार पर उनकी स्टडी रिपोर्ट तैयार की।

80 फीसदी युवाओं ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि लॉक डाउन के समय आसानी से नशा उपलब्ध न होने पर वो नशे की गिरफ्त से बाहर आने का संकल्प ले चुके थे। लेकिन ओपीडी बंद रहने और समय पर नशा छुड़ाने वाली दवा न मिलने से वो मानसिक अवसाद से ग्रस्त रहने लगे। जब लॉक डाउन में ढील मिलनी शुरू हुई तो वो फिर से नशा करने लगे।

अब एक बार फिर परिजनों के साथ आकर महंगे नशे की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान नशा न मिलने की वजह से युवाओं ने नशा छोड़ने की पहल की, लेकिन समय पर दवाएं उपलब्ध न होने से वो नशा नहीं छोड़ पाए।

केस 1 :नशा छोड़ना चाहा, मानसिक बीमारी से ग्रस्त हुआ

रोहतक शहर के निवासी 22 वर्षीय युवक ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि वो शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज का स्टूडेंट्स है। कॉलेज जाने के दौरान ही उसको महंगे नशे की लत लग गई। एक साल के अंतराल के बाद लॉक डाउन लग गया। इस दौरान कई दिनों तक नशा नहीं मिला तो उसकी मानसिक बीमारी बढ़ गई। फिर उसने नशा छोड़ने का फैसला लिया। लेकिन समय पर दवाएं उपलब्ध न होने से नशा नहीं छोड़ पाए। अब एक बार डॉक्टर के पास इलाज शुरू कराया है।

केस 2 : पार्टियों में नशा लेता था, लॉकडाउन में बंद हुआ

झज्जर निवासी 25 वर्षीय युवक ने बताया कि वो प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। दो साल से दिल्ली में जाकर पार्टियों में शामिल होता था। हेरोइन और कोकीन को इंजेक्शन से लेने लग गया। लॉक डाउन के दौरान महंगा नशा नहीं मिल पाया। इससे मानसिक रूप से परेशानी बढ़ गई। अब ओपीडी शुरू हुई है तो एक बार महंगा नशा छोड़ने के लिए प्रयास करना शुरू किया है। डॉक्टरों के परामर्श के बाद इलाज जारी है।

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