Tuesday, September 28, 2021
Homeराज्यगुजरातब्लैक फंगस का डबल अटैक:इलाज में 25 लाख तक खर्च, कई की...

ब्लैक फंगस का डबल अटैक:इलाज में 25 लाख तक खर्च, कई की आंख, नाक, जबड़ा निकाल चुके, जिंदगी फिर भी अधर में

राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस (मिकोर माइकोसिस) को महामारी तो घोषित कर दिया, लेकिन इसके इलाज पर कोई नियंत्रण नहीं होने से निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी पैसे वसूल रहे हैं। सात-आठ लाख रुपए वसूल लेने के बाद निजी अस्पताल गंभीर हालत में मरीज को सिविल अस्पताल रेफर कर दे रहे हैं।

स्मीमेर अस्पताल में ब्लैक फंगस के 42 मरीज भर्ती हैं।
  • निजी अस्पतालों का बेलगाम बिल: सात-आठ लाख रुपए लेने के बाद सरकारी अस्पताल में कर रहे रेफर
  • हे सरकार! महामारी मान लेने से ही राहत नहीं मिलेगी, इलाज पर भी कंट्रोल करिए

7 से 25 लाख रुपए मरीजों के इलाज में खर्च हो चुके हैं। कई के जबड़े, नाक, आंख निकाल दी गई, फिर भी जिंदगी की कोई गारंटी नहीं है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी मरीज इस डर में जी रहे हैं कि जान बच पाएगी या नहीं। निजी अस्पताल पहले इलाज करते हैं और फिर लाखों रुपए लेने के बाद जरूरी एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन की कमी बताकर हाथ खड़े कर रहे हैं। मरीज की हालत गंभीर होने पर सरकारी अस्पताल रेफर कर देते हैं। अकेले सिविल अस्पताल में ही निजी अस्पतालों से आए मिकोर माइकोसिस के 20 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।

इनमें से कई मरीजों की आंख, नाक और जबड़े का ऑपरेशन हो चुका है। सरकार व महानगर पालिका अभी तक मिकोर माइकोसिस के इलाज के लिए कोई पॉलिसी नहीं बना पाई हैं। महानगर पालिका को तो यह तक पता नहीं है कि शहर के निजी अस्पतालों में इस बीमारी के कितन मरीजों का इलाज चल रहा है। मनपा का कहना है कि सिविल व स्मीमेर में ज्यादातर शहर के नहीं हैं। शनिवार को सिविल और स्मीमेर अस्पताल में ब्लैक फंगस के 12 मरीज भर्ती हुए। तीन मरीजों का ऑपरेशन किया गया।

रोज इंजेक्शन के ही 80 हजार दिए, आराम नहीं हुआ तो मुंबई जाना पड़ा

वेसू स्थित नंदनी अपार्टमेंट के निवासी भावेश ने बताया कि उन्हें 27 मार्च को कोरोना हुआ था। 6 अप्रैल को चेहरे पर बाईं तरफ तेज दर्द शुरू हुआ। 9 अप्रैल को नाक का ऑपरेशन हुआ। हर दिन इंजेक्शन का खर्च 80,000 रुपए लग रहा था। वह सूरत के सनशाइन ग्लोबल अस्पताल में तीन बार भर्ती हुए। वहां इलाज में 17 लाख रुपए लगे, फिर भी आराम नहीं हुआ। वह इलाज कराने मुंबई चले गए। वहां के फोर्टिस अस्पताल में 10 मई को भर्ती हुए। वहां भी सर्जरी की गई। लगभग 8 लाख रुपए फिर खर्च हुए। अब थोड़ा आराम हो रहा है। भावेश ने कहा- यह बहुत ही गंभीर बीमारी है। मेरा अनुभव यह है कि सूरत में इस बीमारी का उचित इलाज नहीं हो पा रहा है।

शारदाबेन की नाक, आंख व जबड़े निकाले, अब न बोल पाती हैं न देख

उधना निवासी 57 वर्षीय शारदाबेन को 19 मार्च को पता चला कि उन्हें ब्लैक फंगस हो गया है। इलाज के लिए वह वीनस अस्पताल में भर्ती हुईं। वहां ऑपरेशन कर नाक (नाक और मुंह के बीच की हड्डी), आंख और जबड़ा निकाल दिया गया। इलाज में 7 लाख रुपए लग गए। अस्पताल ने इंजेक्शन की कमी बताई। पैसे भी नहीं थे तो 10 मई को डिस्चार्ज ले लिया। उन्हें 11 मई को सिविल में भर्ती कराया। बेटे ने बताया कि मां की आंखें, जबड़े सब निकल गए। अब वह न तो बोल पाती हैं और न देख।

नाक का ऑपरेशन किया, 7 लाख लिए, अब सिविल में वेंटिलेटर पर

मांडवी निवासी 54 वर्षीय मनीषा के पिता ने बताया कि 6 मई को बेटी बीमार हुई। सूरत के बाप्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां नाक का ऑपरेशन हुआ। आठ दिन में 9 लाख रुपए का बिल बना। जान-पहचान से 7 लाख ही देने पड़े। बाद में अस्पताल ने इंजेक्शन की कमी बताई तो बेटी को सिविल ले आए। 11 दिन हो गए। शुरू के तीन-चार दिन वह ठीक थी। अब वेंटिलेटर पर इलाज चल रहा है। मैंने अपने रिश्तेदारों और मित्रों से पैसे लिए थे जो खर्च हो गए। अब कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments