जलंधर में कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंक कर मनाई लोहड़ी

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पंजाब सरकार के खिलाफ कर्मचारी किस कद्र भरे हुए हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में चुनाव की घोषणा के बावजूद सरकार से त्रस्त कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने लोहड़ी का त्योहार मनाते हुए सूबे के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पुतला फूंका। बेशक पंजाब में चुनाव घोषित होने के बाद अब सरकार चुनाव आयोग ही है। कोई भी फैसला लेने या घोषणा करने की सत्तधारी दल के पास कोई पावर नहीं है। बावजूद इसके कर्मचारियों ने पुतला फूंकने के बाद मुख्यमंत्री चन्नी और उनके मंत्रियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करके दिल का गुबार भी निकाला।

 

कर्मचारियों ने जालंधर में अलग-अलग स्थानों पर मुख्यमंत्री के पुतले जलाकर लोहड़ी मनाई। सर्व शिक्षा अभियान के तहत काम करने वाले नॉन टीचिंग स्टाफ और सांझा फ्रंट ने पुतले फूंक कर लोहड़ी मनाई। उनका कहना था कि कांग्रेस के शासन काल में पहले सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कर्मचारियों को ठगा। किए वादे पूरे नहीं किए। इसके बाद जब उन्होंने त्यागपत्र दे दिया तो नए मुख्यमंत्री चन्नी से कर्मचारियों को बहुत आशा थी कि वह उनकी लंबित मांगों का कोई न कोई हल निकालेंगे। लेकिन चन्नी ने भी ऐसा नहीं किया।

कर्मचारी नेता करनैल फिल्लौर ने कहा कि चन्नी ने पूरे पंजाब में बड़े-बड़े बोर्ड बैनर लगाकर प्रचार किया कि उन्होंने राज्य के 36 हजार कर्मचारियों को पक्का कर दिया। लेकिन अब हकीकत सभी के सामने हैं। जो बिल सरकार ने विधानसभा में पारित किया था, वह राज्यपाल से पारित नहीं हुआ। कर्मचारियों को ठगा गया है। पिछले कई सालों से कर्मचारी कहते आ रहे हैं कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए, लेकिन उसका कुछ नहीं बना। छठे वेतन आयोग में भी सरकार ने एक हाथ से दिया तो पुराने मिलते आ रहे फंड बंद करके दूसरे हाथ से छीन लिया।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि 16 जनवरी को देश भगत यादगारी हाल में यूटी-पजाब संयुक्त कर्मचारी संगठन ने बैठक रखी है, जिसमें आने वाले चुनाव में झूठी और ठगी करने वाली सरकार को सबक सिखाने के लिए रणनीति तय की जाएगी।

लारेयां दी पंड को लगाई आग

को-ऑपरेटिव बैंक परिसर में पंजाब यूटी मुजाजिम फ्रंट ने लोहड़ी के अवसर पर लारेयां दी पंड (वादों का गठड़ी) को जलाकर लोहड़ मनाई। कर्मचारियों ने गठड़ी पर बकायदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की फोटो लगाई हुई थी। इस अवसर पर सांझा फ्रंट के नेता सुखजीत सिंह ने कहा कि बेशक चुनाव घोषित हो गए हैं, लेकिन संघर्षशील कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। कर्मचारियों ने मौजूदा सरकार को चुनाव में सबक सिखाने का मन बना लिया है। इसके लिए 16 जनवरी को देशभगत यादगार हाल में सम्मेलन रखा गया है, जिसमें अगली रणनीति तय की जाएगी।

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