Thursday, September 16, 2021
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फेक एनकाउंटर – एजी ने नई एसआईटी के लिए नाम सौंपे, हाईकोर्ट ने कहा-डीजीपी को सुविधाएं क्यों नहीं दे सकते

  • फेक एनकाउंटर एसआईटी को मैनपावर न मिलने पर डीजीपी चट्‌टोपाध्याय जांच से हटे
  • डीजीपी ने कहा था-उनके अंडर सभी कांस्टेबल-हेड कांस्टेबल, जांच मुश्किल

चंडीगढ़. वर्ष 1994 के फेक एनकाउंटर मामले में पंजाब के डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय द्वारा सुविधाएं मुहैया न कराए जाने के चलते जांच से हटने के बाद सोमवार को पंजाब के एडवोकेट जनरल (एजी) ने नई एसआईटी के लिए पुलिस अधिकारियों के नाम सील कवर में हाईकोर्ट को दिए। इस पर जस्टिस टीएस ढींढसा ने कहा कि उन्होंने नाम तो मांगे ही नहीं थे। पहले कोर्ट को डीजीपी की अर्जी पर जवाब दिया जाए कि मांगी गई सुविधाएं और मैनपावर क्यों नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने पंजाब सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए 7 अगस्त के लिए अगली सुनवाई तय की है। दरअसल पिछली सुनवाई में एजी ने कोर्ट में कहा था कि डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को मेन स्ट्रीम में नहीं लाया जाएगा और नई एसआईटी के लिए उनकी तरफ से अफसरों के नाम दिए जाएंगे।

अब पंजाब सरकार द्वारा अफसरों के नाम देने पर कोर्ट ने कहा कि फिलहाल सरकार चट्टोपाध्याय की अर्जी पर पहले जवाब दे। चट्टोपाध्याय की अर्जी पर पंजाब सरकार ने कहा था कि उनके अंडर 43 ऑफिशियल्स काम कर रहे हैं। चट्टोपाध्याय के वकील ने कहा था कि सभी कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल लेवल के हैं। ऐसे में एसआईटी का चेयरमेन बन मामले की जांच करना मुमकिन नहीं है।

अप्रैल में बनी थी एसआईटी, 29 मई को जांच रिपोर्ट सौंपनी थी
बता दें हाईकोर्ट ने अप्रैल में डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर 29 मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। 27 मई को डीजीपी चट्टोपाध्याय ने अर्जी दाखिल कर कहा कि उनके पास मैन पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट और पावर नहीं है। ऐसे में वह सुखपाल मामले की जांच नहीं कर पाएंगे या तो उन्हें सुविधाएं मुहैया करवाई जाए या जांच की जिम्मेदारी किसी और को सौंपी जाए। इसके बाद एजी पंजाब ने कोर्ट में पेश होकर कहा था कि एसटीएफ चीफ गुरप्रीत देओ भी एसआईटी का हिस्सा नहीं रह सकती।

सुखपाल सिंह की पत्नी दलबीर ने सीबीआई जांच की मांग की है
मृतक सुखपाल सिंह की पत्नी दलबीर कौर ने पति के फेक एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की है। दलबीर ने कहा कि आईजी उमरानंगल ने उनके पति का एनकाउंटर कराया है। 13 अगस्त 1994 को सुखपाल को उनके गांव काला अफगान से पुलिस वाले उठा ले गए थे। कहा गया कि पूछताछ के बाद सुखपाल को छोड़ देंगे लेकिन उसका जाली एनकाउंटर कर दिया गया। सुखपाल सिंह को आतंकी गुरनाम सिंह बंडाला उर्फ नीला तारा का नाम लेकर मार दिया गया। बाद में बंडाला को जिंदा पाया गया।

याचिका में मांग की गई कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए। इस मामले को काफी गंभीर माना जा रहा है। और जितनी भी लापरवाही हुई है उसकी भरपाई की जानी चाहिए।

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