Monday, September 20, 2021
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बायपास की इंजीनियरिंग में खामियां : 7 माह में 374 हादसे, 94 की मौत

बायपास की इंजीनियरिंग में इतनी खामियां है कि यह जानलेवा साबित हो रही हैं। इससे जुड़ी सड़कों पर 7 महीने में जनवरी से जुलाई के दौरान 374 हादसे हो चुके हैं। इनमें 94 जान चली गईं। सभी हादसों में कारण मुख्य सड़क पर गड्‌डे, खराब सर्विस रोड, खुली नालियां और सही तरीके से मार्किंग नहीं होना है। इसके अलावा बायपास पर बड़े हादसों में बस एक्सीडेंट, सेज यूनिवर्सिटी के सामने बाइक और बेस्ट प्राइज के पास ट्रक हादसा शामिल है।
राऊ-देवास सिक्सलेन बायपास के रहवासी क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से में ट्रैफिक इंजीनियरिंग की खामी के कारण वाहनों के पलटने की घटनाएं भी होती रहती हैं। मेंटेनेंस को लेकर कई बार टोल कंपनी को एनएचएआई अफसरों ने बताया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड एसई महेश राजवैद्य कहते हैं बायपास पर बारिश के पानी को निकलने के लिए कोई जगह नहीं है। डामर की सड़क खराब होती है। इसी कारण गड्ढे होते हैं और फिर हादसे की वजह बनते हैं। ऐसे में समय रहते उस पानी को निकलने की व्यवस्था करना चाहिए।

50 से ज्यादा नोटिस, पर कोई काम नहीं

^बायपास पर तकनीकी खामियों में सुधार के लिए अभी तक में निर्माण कंपनी आईडीटीएल टोल कंपनी को 50 से ज्यादा नोटिस विभाग की तरफ से दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद वह काम नहीं कर रही है। इसके संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी जा चुकी है। गुरुवार को एक और नोटिस कंपनी को दिया जा रहा है। – मनीष असाटी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई इंदौर पीआईयू

दूसरों से काम कराया, हम उत्तरदायी नहीं

हमने एनएचएआई के सभी पत्रों का जवाब दिया है। उन्होंने हमारी रिस्क कॉस्ट पर दूसरी एजेंसी को लगाकर मेंटेनेंस के कई काम करवा लिए हैं। ऐसे में मेंटेनेंस में अगर कुछ कमी या खराबी आ रही है तो उसके लिए हमें कैसे उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। अजय प्रकाश पांडेय, प्रोजेक्ट इंचार्ज, आईडीटीएल कंपनी

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