Friday, September 17, 2021
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यूपी : रंगदारी व अपहरण के आरोप में बसपा के पूर्व सांसद धनंजय सिंह गिरफ्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

जौनपुर. उत्तर प्रदेश के जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल ने लाइन बाजार थाने में अपहरण व रंगदारी मांगने, धमकी देने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। इसके बाद पुलिस ने रविवार की देर रात पूर्व सांसद को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। सीजेएम ने पूर्व सांसद को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है। वहीं, पूर्व सांसद ने इसे राजनीति साजिश करार देते हुए प्रदेश के राज्यमंत्री गिरीश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रोजेक्ट मैनेजर के ये आरोप

जौनपुर में करीब 300 करोड़ रुपए से सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। पचहटिया स्थित जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल का आरोप है- पूर्व सांसद ने काम में बाधा पहुंचाई। अपने आदमियों से जबरदस्ती मुझे अपने आवास पर बुलाकर रंगदारी मांगी और जान से मारने की धमकी दी। प्रोजेक्ट मैनेजर ने पूर्व सांसद समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया।

छह थानों की फोर्स ने आवास घेरा

केस दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार के निर्देश पर लाइन बाजार थाने की पुलिस समेत 6 थानों की पुलिस ने रविवार रात करीब 2 बजे पूर्व सांसद के आवास पर छापेमारी करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। धनंजय के अलावा उनके एक समर्थन विक्रम सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।

राज्यमंत्री पर साजिश रचने का लगाया आरोप

पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश करार दिया है। सोमवार को कोर्ट से निकलते हुए उन्होंने कहा- प्रदेश के राज्यमंत्री गिरीश यादव ने राजनीतिक द्वेश और उनकी लोकप्रियता के चलते फर्जी केस दर्ज कराया है। 2017 में मंत्री बनने के बाद से ही इन्होंने भ्रष्टाचार किया। चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

27 साल की उम्र पहली बार बने थे विधायक

धनंजय सिंह 27 साल की उम्र में साल 2002 में रारी (अब मल्हानी) विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीतकर सदन पहुंचे थे। इसी सीट से दोबारा जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर जीते और फिर बसपा में शामिल हो गए। 2009 में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर बसपा से सांसद बने। यहां इससे पहले तीन दशक तक बसपा लोकसभा सीट जीत नहीं पाई थी। 2011 में बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद धनंजय सिंह ने कई बार चुनावी किस्मत अजमाई, लेकिन सफलता नहीं लगी। उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वे पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं में गिने जाते हैं।

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