Monday, September 27, 2021
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हरियाणा : तीन साल से एसीएस-सीएस-सीएम तक खेमका ने दी थी धान खरीद घोटाले की रिपोर्ट, नहीं दिखाई गंभीरता

धान खरीद में घोटाले की जांच भले ही अब हो रही हो, लेकिन पिछले तीन साल से सीनियर आईएएस अशोक खेमका हर बार अपनी रिपोर्ट में इसकी सूचना सरकार को देते रहे हैं, लेकिन कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। लगातार तीन साल से वे अपनी रिपोर्ट में बता रहे हैं कि किस प्रकार से धान खरीद में घोटाला हो रहा है और कैसे रोका जा सकता है।

सबसे पहले 2016 में ही उन्होंने इस घोटाले पर रोक लगाने के लिए धान का पैसा किसानों के खाते में सीधे जमा कराने का सुझाव दिया था, ताकि मंडी के कर्मचारियों से लेकर आढ़ती और राइस मिलर्स तक कोई भी बीच में गड़बड़ी न कर सके। अब इस मामले में राइस मिलों में फिजिकली वेरिफिकेशन कराने का निर्णय हुआ है।

बता दें कि जब भी धान की खरीद होती है तो एक आईएएस को एक जिले की जिम्मेदारी दी जाती है। इसी प्रकार खेमका को जींद, चरखी दादरी और फतेहाबाद जिले की तीन साल जिम्मेदारी मिली। तीनों ही बार में उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस घोटाले का जिक्र किया।

खेमका की ओर से 24 मार्च, 2017 को मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया था। इसमें खरीद में हो रही गड़बड़ी की पूरी रिपोर्ट भेजी गई थी। साथ ही सुझाव दिया था कि धान की खरीद का पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजे जाएं। इससे बोगस खरीद रुक सकती है। इधर, प्रदेश के 127 आईएएस के वॉट्सएप ग्रुप में भी धान खरीद का मामला छाया है। इसे लेकर ग्रुप में मंथन शुरू हो गया है।

वर्ष 2016 में जींद की जांच रिपोर्ट में बताया था घोटाला
सूत्रों का कहना है कि 2016 में जींद के रतन लाल महाजन की शिकायत पर अशोक खेमका ने खरीद की जांच की थी। इसके बाद उन्होंने 19 अक्टूबर 2016 को सबसे पहले विभाग के तत्कालीन एसीएस को दी रिपोर्ट में लिखा था कि धान की बोगस खरीद दिखाई जा रही है। प्रति क्विंटल 400 रुपए की मुनाफा इस बोगस खरीद पर उठाया जा रहा है।

2017 में एसीएस को भेजी थी गड़बड़ी की रिपोर्ट
मिली जानकारी के अनुसार 2017 में खेमका को चरखी दादरी जिले की जिम्मेदारी दी गई। तब उन्होंने बोगस खरीद के बारे में फूड एंड सप्लाई विभाग के तत्कालीन एसीएस एसएस प्रसाद को इस बारे में जानकारी दी थी। 23 जून, 2017 को उन्होंने एसीएस को बताया था कि अक्टूबर में फिर फसल आएगी। इसलिए किसानों के खाते में ही सीधे पैसे भेजे जाएं।

2018 में सरकार को दी थी टोहाना-धारसूल मंडी की जानकारी
खेमका की 2018 में फतेहाबाद जिले में ड्यूटी लगाई थी, जहां उन्होंने धारसूल और टोहाना मंडी में बोगस परचेज पकड़ी थी। इसकी रिपोर्ट भी उन्होंने सरकार को भेजी थी, लेकिन इसके बावजूद मामला लगातार दबाया गया।

127 आईएएस के वॉट्सएप ग्रुप में छाया धान खरीद घोटाला
धान खरीद का मामला प्रदेश के करीब 127 आईएएस के वॉट्सएप ग्रुप में छाया हुआ है। एक आईएएस की ओर से मिलों की वेरिफिकेशन शुरू करने की जानकारी जब ग्रुप में शेयर की तो दूसरे ने लिखा कि धान खरीद में गड़बड़ी तो लंबे समय से हो रही है। चावल तो मिल जाएगा, लेकिन धान मिलना मुश्किल है, क्योंकि चावल तो बाद में खरीद कर भी लगाया जा सकता है। इस पर तीसरे सीनियर आईएएस ने तंज कसा कि अापकी ड्यूटी लगेगी तो संबंधित आईएएस लगा देंगे।

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