Sunday, September 19, 2021
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गहलोत समर्थक निर्दलीय विधायक की सियासी भविष्यवाणी : माकन को टैग कर संयम लोढ़ा ने दिए सितंबर बाद सियासी उठापटक के संकेत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक सिरोही से निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने सितंबर के बाद फिर से प्रदेश में सियासी उठापटक के संकेत दिए हैं। संयम लोढ़ा ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन को टैग करते हुए​ सितंबर बाद फिर सियासी उठापटक, दलबदल और बसपा से कांग्रेस में आने वाले 6 विधायकों की सुप्रीम कोर्ट से सदस्यता रद्द होने के संकेत दिए हैं। लोढ़ा ने इस बार जो लिखा है, उसकी सियासी हलकों में चर्चाएं शुरु हो गई हैं।

संयम लोढ़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा- मोटा भाई राजस्थान में रुचि नहीं ले रहे। सितम्बर तक रुकने को कहा है। सर्वोच्च संस्था के जरिये हाथी लटकाने का इरादा है। हालांकि उन्होंने बतौर पेशगी जुलाई 2020 में दी हुई रकम वापस नहीं ली है, लेकिन लेने वालों की पाचन क्रिया गड़बड़ाई है। खजाना लुट चुका, फिर भी चौकीदारी है।

फिर तोड़फोड़ के संकेत

संयम लोढ़ा ने नाम लिए बिना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ इशारा किया है। लोढ़ा का दावा है कि मोटा भाई अमित शाह राजस्थान में रुचि नहीं ले रहे। सितंबर तक रुकने को कहा है। मतलब सितंबर के बाद अमित शाह राजस्थान के मामलों में रुचि लेंगे। कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को एक बार फिर तोड़ने का प्रयास हो सकता है।

सदस्यता रद्द करने की भविष्यवाणी

संयम लोढ़ा ने सर्वोच्च संस्था के जरिए हाथी लटकाने की बात करके बसपा से कांग्रेस में आने वाले 6 विधायकों की सदस्यता रद्द होने की भविष्वाणी की है। 6 विधायकों के बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से फैसला आना है। बसपा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही 5 अप्रैल को आदेश दिए थे, जिसमें नोटिस नहीं लेने वाले 3 विधायकों के समन अखबारों में प्रकाशित करवाने के आदेश दिए थे। संयम लोढ़ा का इशारा इसकी तरफ ही था।

विधायकों की दुविधा की तरफ इशारा

संयम लोढ़ा ने कांग्रेस के कुछ विधायकों पर भाजपा से मोटा पैसा लेने का भी आरोप लगाया है। लोढ़ा ने साफ लिखा है- हालांकि उन्होंने बतौर पेशगी जुलाई 2020 में दी हुई रकम वापस नहीं ली है, लेकिन लेने वालों की पाचन क्रिया गड़बड़ाई है। इसका मतलब ऐसा लगाया जा रहा है कि जिन कांग्रेस विधायकों को दल-बदल के बदले पैसा दिया वह वापस नहीं लिया। अब वे विधायक दुविधा में हैं।

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