Friday, September 24, 2021
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जर्मन राष्ट्रपति ने अफगान संकट को बताया पश्चिम के लिए शर्मनाक

जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीमियर ने कहा है कि काबुल से भागते हुए लोगों की तस्वीरें पश्चिमी देशों के लिए शर्म का विषय हैं। उन्होंने कहा कि यह एक मानवीय त्रासदी है और इसकी जिम्मेदारी हम सभी को लेनी होगी। अमेरिका के बाद जर्मनी ऐसा दूसरा देश था, जिसके सबसे अधिक सैनिक अफगानिस्तान में थे। जर्मनी भी अपने लोगों को निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सोमवार को काबुल एयरपोर्ट पर मची अफरातफरी के चलते मात्र सात लोगों को बर्लिन लाया जा सका। हालांकि बाद में गए एक अन्य विमान से मंगलवार को 120 लोगों को स्वदेश लाया गया।

अमेरिका के बाद जर्मनी ऐसा दूसरा देश था जिसके सबसे अधिक सैनिक अफगानिस्तान में थे। जर्मनी भी अपने लोगों को निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सोमवार को काबुल एयरपोर्ट पर मची अफरातफरी के चलते मात्र सात लोगों को बर्लिन लाया जा सका।

उधर, यूरोपीय संघ ने कहा है कि अगर तालिबान महिलाओं सहित दूसरे लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का वचन देता है तो उसके साथ काम करने के बारे में विचार किया जा सकता है। अफगान संकट को लेकर यूरोपीय यूनियन की बुलाई गई आपात बैठक के बाद यह बयान सामने आया है।

चेक राष्ट्रपति ने उठाए नाटो के अस्तित्व पर सवाल

अफगानिस्तान में नाटो के फेल होने के बाद चेक राष्ट्रपति मिलोस जमैन ने उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन पर पैसा बर्बाद करने के बजाय वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान देंगे। रूस और चीन के प्रति नरम रुख रखने वाले जमैन ने कुछ समय देश के रक्षा बजट को दो फीसद बढ़ाने का एलान किया था।

आतंकी गतिविधियां हुई तो हमले का विकल्प खुला है

नाटो ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तालिबान ने अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए करना दिया तो उस पर हमला करने के विकल्प खुले हैं। नाटो सेक्रेटरी जनरल जेंस स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि अब यह सत्ता संभालने वालों की जिम्मेदारी है कि वहां फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी पैर नहीं जमा सकें।

गोर्बाचेव बोले, पहले से तय था अमेरिका का फेल होना

तत्कालीन सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने कहा है कि यह बात पहले से ही तय थी कि अमेरिका और नाटो सुरक्षा बल अफगानिस्तान में सफल नहीं होंगे। उन्होंने वाशिंगटन पर अफगान समस्या को ठीक तरह से नहीं संभालने का भी आरोप लगाया। पूर्व सोवियत नेता ने कहा कि उन्हें अपनी असफलता बहुत पहले ही स्वीकार कर लेनी चाहिए थी। हालांकि अभी भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह इससे क्या सबक लेते हैं। गोर्बाचेव के शासनकाल के दौरान ही वर्ष 1989 में तत्कालीन सोवियत सेना अफगानिस्तान से वापस आई थी। उन्होंने वहां सेना भेजने को अपनी राजनीतिक गलती माना था।

जी-7 समूह में हो चर्चा: जानसन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन का कहना है कि अफगान संकट पर जल्द से जल्द जी-7 समूह में चर्चा हो। उन्होंने इसके लिए वर्चुअल बैठक बुलाने की मांग की है। मंगलवार को जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से बात करने के बाद उन्होंने यह बात कही।

तालिबान सहित सभी पक्षों से कर रहे बात: तुर्की

तुर्की के विदेश मंत्री मेलुत केवशोग्लू ने कहा है कि उनका देश अफगानिस्तान में तालिबान सहित सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। अभी तक तालिबान का जो रवैया रहा है, वह स्वागत योग्य है। उन्होंने यह भी बताया कि तुर्की ने काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा करने की अपनी पूर्व योजना को वापस ले लिया है।

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