Tuesday, September 28, 2021
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झारखंड : सोशल मीडिया पर वायरल हुई पत्ते खाकर भूख मिटाती बच्ची,

दुमका/रांची. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चे अपनी पढ़ाई, खेल और अलग तरह की एक्टिविटी को लेकर चर्चा में रहते हैं। कभी-कभी इन बच्चों के एक्टिविटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है और वो चर्चा का विषय बन जाती है। लेकिन, झारखंड के दुमका जिले की बच्ची इन सबसे अलग अपनी गरीबी को लेकर चर्चा में है। दरअसल, मंगलवार को किसी ने एक बच्ची की गरीबी को दर्शाती फोटो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्विटर पर टैग कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्थानीय प्रशासन पर भड़क गए। उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। फिर प्रशासन ने बुधवार को बच्ची को राशन कार्ड सहित राशन उपलब्ध कराया गया।

घर में नहीं है कोई पुरुष सदस्य, नानी किसी तरह चलाती है घर
चार साल की बच्ची के घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है जबकि मां मानसिक रूप से बीमार है। फिलहाल, बच्ची मां रुक्मणी सोरेन के साथ 70 वर्षीय नानी चुड़की मुर्मू के घर रहती है। जरमुंडी प्रखंड के भोड़ावाद पंचायत के समलापुर में रहनेवाली चुड़की मुर्मू किसी तरह पड़ोसियों से राशन मांगकर अपना गुजारा चलाती है। कभी-कभी लाठी के सहारे वो ब्लॉक तक चली जाती है और खाद्य विभाग के अधिकारियों से कुछ मांगती है जिससे तीनों का पेट पलता है। चुड़की मुर्मू के मुताबिक- उन्हें पिछले एक साल से राशन नहीं मिला है। विधवा पेंशन से मिलने वाली करीब एक हजार रुपए की राशि से थोड़ा-बहुत सहारा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि रकम से चावल का जुगाड़ तो हो जाता है लेकिन दाल-सब्जी का अभाव रहता है। वो गोभी का पत्ता सूखाकर रखती है और फिर इसे उबाल कर नमक के साथ चावल में मिलाकर तीनों खाते हैं।

नानी, मां के साथ बच्ची।

राशन कार्ड मिला तो अब बच्ची की मां का भी हो पाएगा इलाज
बुधवार को राशन कार्ड मिलने के बाद चुड़की मुर्मू कहती हैं कि अब उनकी बेटी का इलाज भी हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर 2018 को उन्होंने राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद जब राशन कार्ड नहीं बना तो उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में 14 नवंबर 2019 को की। इसके बाद से 25 फरवरी 2020 तक राशन कार्ड नहीं बन पाया था। उन्होंने बताया कि बेटी रुक्मणी सोरेन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पैसे के अभाव में बेटी का इलाज भी नहीं करा पा रही थी। सरकार के आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों का मुफ्त में इलाज कराया जाता है लेकिन राशन कार्ड न होने के कारण वे आयुष्मान भारत योजना का भी लाभ नहीं ले पा रहे थे। लेकिन अब राशन कार्ड मिलने से उम्मीद है कि आयुष्मान कार्ड बन जाएगा और बेटी का इलाज हो पाएगा।

मां बोली- बच्ची भात-भात करते मर गई… अफसर बोले- मलेरिया था
झारखंड में भूख और राशन को रोना कोई नई बात नहीं है। 28 सितंबर 2017 को झारखंड के सिमडेगा जिले के कारीमाटी गांव में 10 साल की संतोषी कथित रूप से भूख से तड़प-तड़प कर मर गई। आरोप था कि उसका परिवार राशन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करा पाया जिसके चलते पिछले आठ महीने से उन्हें सस्ता राशन नहीं मिल रहा था। परिवार का कहना है कि संतोषी कुमारी ने 8 दिन से खाना नहीं खाया था, जिसके चलते भूख से उसकी मौत हो गई। बाद में प्रशासन की जांच हुई और रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची को मलेरिया था। बाद में राशन डीलर पर कार्रवाई हुई थी।

अवैध घोषित किए गए थे तीन लाख राशन कार्ड
27 मार्च 2017 को, झारखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव ने कहा था कि सभी राशन कार्ड जिन्हें आधार नंबर के साथ जोड़ा नहीं गया है, वे 5 अप्रैल को निरर्थक हो जाएंगे। लगभग 3 लाख राशन कार्ड अवैध घोषित किए गए हैं। 22 सितंबर 2017 को, झारखंड सरकार ने अपने एक हजार दिनों की सफलताओं पर एक पुस्तिका जारी की। उसमें उन्होंने ये कहा कि आधार नंबर के साथ राशन कार्ड को सीड करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया में 11 लाख, 64 हजार फर्जी राशन कार्ड पाए गए हैं। इसके माध्यम से, राज्य सरकार ने एक वर्ष में 225 करोड़ रुपए बचाये हैं, जिनका उपयोग अब गरीब लोगों के विकास के लिए किया जा सकता है। उधर, हाल ही में नाेबेल पुरस्कार विजेता अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो द्वारा स्थापित शोध संस्थान जे-पाल के अध्ययन में दावा किया गया है कि साल 2017 में संबंधित परिवाराें काे बताए बिना रद्द किए गए 90 फीसदी राशन कार्ड फर्जी नहीं थे।

एक नजर में आकंड़े
अक्टूबर 2017 में जारी इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 119 देशों में भारत का 100वां स्थान था। एक स्वतंत्र एजेंसी की यूएन को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 25 लाख मौतें भूख या इससे जुड़ी बीमारियों से होती हैं, मगर रिकॉर्ड पर ये भूख से मौत के रूप में दर्ज नहीं होती। भारत में ही 10 करोड़ से ज्यादा लोग रोज 20 रुपए से कम में गुजारा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के भूख से पीड़ितों में से एक तिहाई भारत में हैं।

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