Friday, September 24, 2021
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CAA पर विवाद के बीच PAK से आई हसीना बेन को मिली भारत की नागरिकता

  • पाकिस्तान से आई हसीना बेन को मिली नागरिकता
  • गुजरात के द्वारका में मिला नागरिकता का सर्टिफिकेट
  • देश में नागरिकता संशोधन एक्ट का हो रहा है विरोध

देशभर में इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. इस कानून को संविधान के खिलाफ बताकर विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं. इस सब विरोध के बीच गुजरात में पाकिस्तान से आई एक महिला को भारत की नागरिकता दे दी गई है. पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आईं हसीना बेन ने दो साल पहले नागरिकता के लिए अप्लाई किया था, जिसके बाद अब उन्हें नागरिकता मिली है.

मूलरूप से भारत की रहने वालीं हसीना बेन 1999 में शादी के बाद पाकिस्तान चली गई थीं. लेकिन कुछ समय बाद उनके पति की मौत हो गई और वह भारत वापस आ गईं. दो साल पहले उन्होंने भारत में नागरिकता के लिए अप्लाई किया था, अब 18 दिसंबर 2019 को भारत की ओर से उन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया गया है.

गुजरात के द्वारका में हसीना बेन ने भारतीय नागरिकता लेने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था. द्वारका कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा की तरफ से हसीना बेन को भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र कलेक्टर ने दिया गया.

नागरिकता कानून का हो रहा है विरोध

बता दें कि भारत सरकार के द्वारा हाल ही में नागरिकता संशोधन एक्ट लागू किया गया है, जिसकी वजह से देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है. विपक्षी पार्टियां इस बात का विरोध कर रही हैं कि ये कानून संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है और इसके साथ ही कई अन्य बातों का भी उल्लंघन करता है. विपक्ष का आरोप ये भी है कि केंद्र सरकार का ये कानून देश में अल्पसंख्यकों के प्रति भय पैदा करता है.

गृह मंत्री ने नकारा है विपक्ष का आरोप

हालांकि, विपक्ष के किसी भी तरह के आरोप को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नकारा है. अमित शाह ने दावा किया है कि ये बिल किसी भी तरह से भारत में रह रहे नागरिकों को प्रभावित नहीं करता है और ना ही भारतीय मुसलमानों को इससे कोई नुकसान होने वाला है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर पड़ोसी देश से कोई मुस्लिम भारत में नागरिकता के लिए अप्लाई करता है तो नियम के अनुसार उसे भी नागरिकता मिल सकती है.

नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी.

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