Tuesday, September 28, 2021
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गुस्सा : अगर निर्भया के हत्यारे फांसी पर लटक चुके होते तो वेटरनरी डॉक्टर की जिंदगी बच गई होती: जल्लाद पवन

नई दिल्ली/ मेरठ.  तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से गैंगरेप और निर्मम हत्या से पूरा देश आक्रोशित है।  मेरठ के रहने वाले जल्लाद पवन भी इस घटना से गुस्से में हैं। उन्होंने तल्खी भरे अंदाज में कहा, “अगर निर्भया के हत्यारों को सरकार फांसी पर लटका चुकी होती तो शायद वेटरनरी डॉक्टर बेमौत मरने से बच गई होती।”

जल्लाद पवन कहते हैं, “निर्भया के हत्यारों को आखिर तिहाड़ जेल में पालकर रखा ही क्यों जा रहा है? निर्भया कांड के मुजरिम हों या फिर वेटरनरी डॉक्टर के हत्यारे। इनका इलाज जब तक आनन-फानन में नहीं होगा, तब तक यह मुसीबतें समाज में बरकरार रहेंगीं।”

वह आगे कहते हैं, “अब हम घर में नहीं बैठ सकते हैं। जरूरी है कि जितनी जल्दी हो निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटकाया जाए। वेटरनरी डॉक्टर के हत्यारों को मुजरिम करार दिलवा दीजिए। हिंदुस्तान में निर्भया और वेटरनरी डॉक्टर से हुए कांड खुद-ब-खुद ही बंद हो जाएंगे। जब तक ऐसे जालिमों को मौत के घाट नहीं उतरा जाएगा तब तक बाकी बचे हुए

ऐसे क्रूर इंसानों में भला भय कैसे पैदा होगा?”

मैं तैयार बैठा हूं: पवन
पवन ने बातचीत में कहा, “मैं एकदम तैयार बैठा हूं। निर्भया के मुजरिमों के डेथ-वारंट मिले और मैं तिहाड़ जेल पहुंच जाऊं। मुझे मुजरिमों को फांसी के फंदे पर टांगने के लिए महज दो से तीन दिन का वक्त चाहिए। सिर्फ ट्रायल करुंगा और अदालत के डेथ वारंट को अमल में ला दूंगा।”

‘चौथी पीढ़ी का मैं इकलौता जल्लाद हूं’
पवन ने कहा, “मैं खानदानी जल्लाद हूं। इसमें मुझे शर्म नहीं लगती। मेरे परदादा लक्ष्मन जल्लाद, दादा कालू राम जल्लाद, पिता मम्मू जल्लाद थे। मतलब जल्लादी के इस खानदानी पेशे में मैं अब चौथी पीढ़ी का इकलौता जल्लाद हूं।”

पवन ने पटियाला जेल में दी थी पहली फांसी 
पवन ने बताया कि उन्होंने पहली फांसी दादा कालू राम जल्लाद के साथ पटियाला सेंट्रल जेल में दो भाईयों को दी थी। उस वक्त मेरी उम्र यही कोई 20-22 साल रही होगी। अब मैं 58 साल का हो चुका हूं। दादा के साथ अब तक में पांच खूंखार मुजरिमों को फांसी पर टांग चुका हूं।

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