Friday, September 17, 2021
Homeराजस्थानराजस्थान : 'पानीपत' में महाराजा सूरजमल को लालची शासक दिखाया, वंसुधरा और...

राजस्थान : ‘पानीपत’ में महाराजा सूरजमल को लालची शासक दिखाया, वंसुधरा और पूर्व मंत्री ने जताया विरोध; बैन की मांग

जयपुर. फिल्म पद्‌‌मावत के बाद अब आशुतोष गोवारिकर की फिल्म पानीपत के दृश्यों और संवादों को लेकर राजस्थान में विरोध शुरू हो गया। फिल्म में भरतपुर के संस्थापक महाराजा सूरजमल काे लालची शासक के रूप में दर्शाने का लोगों ने विरोध किया। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, महाराजा सूरजमल के वंशज व पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, नागाैर सांसद हनुमान बेनीवाल, राज्यसभा सांसद डाॅ. किराेड़ी मीना सहित कई लाेगाें ने फिल्म के प्रसारण पर राेक लगाने की मांग की है। दाे साल पहले भी प्रदेश में पद्‌‌मावत पर विवाद हुआ था। तब पिछली वसुंधरा सरकार ने इसके प्रसारण पर रोक लगा दी थी।

Panipat Movie protest in Rajasthan for show Maharaja Suraj Mal greedy ruler, demanding ban

फिल्म के इस दृश्य को लेकर विवाद
फिल्म में महाराजा सूरजमल को मराठा पेशवा सदाशिव राव से संवाद के दौरान इमाद को दिल्ली का वजीर बनाने व आगरा का किला उन्हें सौंपे जाने की मांग करते दिखाया गया है। इस पर पेशवा सदाशिव आपत्ति जताते हैं। सूरजमल भी अहमदशाह अब्दाली के खिलाफ युद्ध में साथ देने से इनकार कर देते हैं। सूरजमल काे हरियाणवी व राजस्थानी भाषा के टच में भी दिखाया है।

फिल्म में सूरजमल का चरित्र ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत: इतिहासकार
महाराजा सूरजमल फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह और किसान नेता नेम सिंह फौजदार का कहना है कि महाराजा सूरजमल शुद्ध रूप से ब्रज भाषा बोलते थे। इसके अलावा पानीपत की लड़ाई से पहले राजा सूरजमल का आगरा के लाल किले पर कब्जा था।

वहीं, भरतपुर का इतिहास सहित 13 पुस्तकें लिख चुके इतिहासकार रामवीर वर्मा का कहना है कि फिल्म में महाराजा सूरजमल का चरित्र तथ्यों से परे फिल्माया है। फिल्म में बताया गया है कि उन्होंने आगरा के किले की मांग की, जबकि सत्य तो यह है कि आगरा का किला तो पहले ही जाट रियासत के अधीन था, बल्कि भरतपुर रियासत का शासन अलीगढ़ तक था।

वर्मा बताते हैं कि महाराजा सूरजमल और उनके महामंत्री रूपराम कटारिया मराठा सेना के शिविर में गए थे, जहां मराठा सेना के साथ आई महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान ग्वालियर अथवा डीग और कुम्हेर के किले में रखने का सुझाव दिया था। लेकिन, उनके परामर्श को नहीं माना गया और उपेक्षा की गई। इस पर वे अभियान से अलग हो गए। इसलिए फिल्म में महाराजा सूरजमल का चरित्र ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है।

सुझाव: पर्यटन विभाग को स्क्रिप्ट दिखाए बिना शूटिंग न हो
पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रदेश में पर्यटन विभाग को स्क्रिप्ट दिखाए बिना फिल्मों की शूटिंग न होने दी जाए। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की फिल्मों के लिए पहले अनुमति लेनी होगी। उन्होंने विवादित फिल्मों की जांच के लिए कमेटी बनाने की मांग भी की।

विश्वेंद्र सिंह बोले- महाराजा सूरजमल ने मदद की थी
पयर्टन मंत्री विश्वेंद्र सिंह बोले- वे महाराजा सूरजमल की 14वीं पीढ़ी से हैं। पेशवा व मराठा जब पानीपत युद्ध हारकर घायलावस्था में लौट रहे थे, तब महाराजा और महारानी ने 6 माह तक मराठा सेना और पेशवाओं को पनाह दी थी। खांडेराव होलकर की मृत्यु भी भरतपुर की तत्कालीन राजधानी कुम्हेर में ही हुई। आज भी वहां के गागरसोली गांव में उनकी छतरी बनी हुई है।

स्वाभिमानी, निष्ठावान व हृदय सम्राट महाराजा सूरजमल का गलत चित्रण निंदनीय है। -वसुंधरा राजे, पूर्व सीएम

इतिहास काे गलत तथ्याें के साथ प्रस्तुत करने से समाज में राेष है। फिल्म से विवादित दृश्य हटाए जाएं। -हनुमान बेनीवाल, सांसद 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments