Monday, September 27, 2021
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चिकनगुनिया का बढ़ रहा खतरा, जानिए इस बीमारी से कैसे बचें

कर्नाटक, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित देश के हिस्सों से खबरें आ रही है कि अब डेंगू का असर कम होने लगा है, लेकिन चिकनगुनिया के मामले बढ़ने लगे हैं। जाहिर है एडिज़ वायरस से फैलने वाली इस बीमारी को बचाव के जरिए रोकने की आवश्यकता है।  एम्स के डॉ. अजय मोहन के मुताबिक, “चिकनगुनिया” शब्द मकोंड (Makonde) (या किमकोंड) की भाषा से लिया गया है जो मकोण्डे पठार पर बोली जाती है जहां इस रोग का जन्म हुआ था। चिकनगुनिया का मतलब होता है ‘झुक कर चलना’। इस रोग में मरीज जोड़ के दर्द के साथ झुक कर चलता है।

दरअसल, बारिश और ठंड के मौसम में चिकनगुनिया का वायरस तापमान घटते ही हावी हो जाता है। पिछले कुछ वर्षों में चिकनगुनिया विश्व के लगभग एक चौथाई से ज्यादा देशों में एक बीमारी के रूप में घुसपैठ कर चुका है। चिकनगुनिया रोग एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है, जो मनुष्यों में मच्छर काटने के कारण होता है। निश्चित रूप से यह एक जानलेवा बीमारी नहीं है लेकिन इसके लक्षण बहुत गंभीर लंबे समय तक चलने वाले और परेशानी देने वाले हो सकते हैं। आमतौर पर चिकनगुनिया एडीज़ मच्छर के काटने से ही होता है, जो पहले से ही किसी मरीज को काट चुका हो या वायरस इनफेक्टेड हो। लेकिन  कुछ मामलों में चिकनगुनिया किसी संक्रमित व्यक्ति के रक्त के साथ भी स्वस्थ व्यक्ति में ट्रांसमिट हो सकता है।

चिकनगुनिया के लक्षण

इस रोग का मुख्य लक्षण तेज बुखार होता है, जो कुछ दिनों तक रहता है और जोड़ों में दर्द, जो कुछ हफ्तों या महीनों तक परेशान करता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। चिकनगुनिया संक्रमण के कुछ दिन बाद मरीज में यह लक्षण दिखाई देते हैं-

तेज बुखार, कभी-कभी 104-105 डिग्री तक

जोड़ों में दर्द

सिर दर्द

मांसपेशियों में दर्द और जकड़न

शरीर पर चकत्ते पड़ना

जोड़ों के आसपास सूजन होना

इन लक्षणों के साथ घमौरियों जैसे दाने आंखों का लाल होना और दुखना आना और उल्टी होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

चिकनगुनिया का निदान

चिकनगुनिया का सही परीक्षण ब्लड टेस्ट द्वारा होता है क्योंकि इसके सामान्य लक्षण डेंगू बुखार जैसे होते हैं। टेस्ट में अगर डेंगू है तो इसकी पहचान जल्दी होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह 50% जानलेवा होता है, जबकि चिकनगुनिया में ऐसी गंभीर स्थिति नहीं आती। इसलिए यदि उपरोक्त लक्षण दिखाई दें और अपने क्षेत्र में यह बीमारी किसी को हुई हो तो जल्दी से जल्दी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

रोग का उपचार

राहत की बात यह है कि बीमारी जानलेवा नहीं है। ज्यादातर मरीज एक हफ्ते में बुखार से फ्री हो जाते हैं, लेकिन जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती हैं। डॉ. मोहन के मुताबिक 20% मरीज करीब एक साल तक भी जोड़ों के दर्द की शिकायत करते रहते हैं। चिकनगुनिया के इलाज के लिए कोई दवा नहीं है। मरीज को ज्यादा से ज्यादा आराम करने और तरल पदार्थ  के सेवन की सलाह दी जाती है। बुखार और जोड़ों के दर्द से राहत के लिए उसे कुछ दवाएं दी जाती है। अगर 6 महीने से ज्यादा ज्वाइंट पैन हो तो फिजिओथेरेपी की सलाह दी जाती है।

चिकनगुनिया से बचने के लिए कुछ आसान उपाय 

चिकनगुनिया के कारण लंबे समय तक कम या ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है। मच्छरों से बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है। डॉ. मोहन का कहना है, मच्छर से दूर रहने के लिए मॉस्किटो रेपेलेंट और मच्छदानी का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। सुबह-सुबह और शाम को घर के अंदर ही रहें।जहां यह बीमारी फैली हुई है उस क्षेत्र में जाने से बचें। घर में या आसपास पानी जमा न होने दें। गंदगी न हो तो स्वाभाविक है मच्छर नहीं होंगे और आप बचे रहेंगे।

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