Sunday, September 19, 2021
Homeराजस्थानसुसाइड केस /रेजिडेंट डॉक्टर साक्षी गुप्ता को प्रताड़ित करने के आराेपी पांच...

सुसाइड केस /रेजिडेंट डॉक्टर साक्षी गुप्ता को प्रताड़ित करने के आराेपी पांच डाॅक्टर्स से पूछताछ

  • रेजीडेंट्स ने कमेटी के सामने बताए वो हालात, जिनसे वे काम के तनाव में हैं
  • उन्होंने बताया कि 16-18 घंटे काम के बावजूद प्यार के बोल नहीं मिलते

जयपुर. सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय के हाॅस्टल में रहने वाली एक रेजीडेंट महिला डाॅक्टर साक्षी गुप्ता द्वारा सीनियर्स की प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड करने के मामले में लालकाेठी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आराेपी पांचों डॉक्टरों डाॅक्टर्स डाॅ. लीला, डॉ. कविता, डॉ. दीपाली, डॉ. वर्षा और डॉ. अदिति काे नाेटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया।

गुुरुवार काे पुलिस ने साक्षी के शव का मेडिकल बाेर्ड से पाेस्टमार्टम करा परिजनाें काे साैंप दिया। पाेस्टमऑर्टम रिपाेर्ट में साक्षी की माैत फांसी से लगाने से हाेने की बात सामने आई है। पुलिस टीम शुक्रवार काे हाॅस्पिटल पहुंचकर जांच शुरू करेगी। साक्षी ने दाे माह पहले एसएमएस में एडमिशन लिया था। वह प्रथम वर्ष की रेजीडेंट थी। बुधवार काे साक्षी ने पांच सीनियर्स डाॅक्टर की प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड कर लिया था।

सीनियर्स के सामने जूनियर्स ने दर्द जाहिर किया

डॉ. दीपक : सुबह 4 बजे क्यों जाती हो, अब 6बजे से पहले कोई नहीं जाएगा। डयूटी शेडयूल बनेगा।
स्टूडेंटस : ना तो ट्रॉलीमेन हमारी सुनते हैं और ना वार्ड ब्याय। क्योंकि हम फ़र्स्ट इयर हैं। फार्म भरने से लेकर मरीज का हर काम हम ही करते हैं। सीनियर्स डांटते रहते हैं।
डॉ. दीपक : यूनिट हेड से पूछताछ करते हैं। कई बार इमरजेंसी हो जाती है, मानवता के तौर पर आप काम कर सकते हैं लेकिन ट्रालियां खींचना काम नहीं है। वार्ड ब्याय कम हैं तो भर्ती करने चाहिए।
स्टूडेंटस : नर्सिंग स्टाफ सपोर्ट नहीं करता। रात को तो झगड़े की नौबत आ जाती है।
डॉ. दीपक और डॉ. एसएम शर्मा : अधीक्षक और यूनिट हेड को कहते हैं- यदि कोई स्टाफ सपोर्ट नहीं करता है तो बेझिझक उसका नाम दें और रिलीव कर हमारे पास भेज दें। हम भी उस दौर से गुजरे हैं। ये रिश्ते जिंदगी भर रहते हैं।
डॉ. सीमा मेहता खड़ी हुई और बोलीं : क्या आप (स्टूडेंट्स) में से किसी को साक्षी की परेशानी का पता था।  स्टूडेंट्स बोली- हां। इस पर डॉ. सीमा बोली कि काश तुम में से किसी ने भी किसी भी यूनिट हेड, अधीक्षक या सीनियर को बता दिया होता।                                                                                                                     डॉ. लता राजोरिया की आंखों में आंसूं आ गए। वे बोलीं : बहुत दुख है कि हमारा एक बच्चा ऐसे चला गया, लेकिन हम किसी को दुख दिखा और बता नहीं सकते।

नर्सिंग स्टाफ को बढ़ाया जाएगा

नर्सिंग स्टाफ को बढ़ाया जाएगा और जिम्मेदारी दी जाएगी। काम का चार्ट बनेगा कि किस इयर के रेजीडेंट क्या काम करेंगे। वार्ड ब्याय की परेशानी को खत्म करने के लिए अधीक्षक अपने स्तर पर टेंडर करेंगे। ट्राॅलियां या अन्य छाेटे सामान के लिए हर महीने 10 हजार रुपए दिए जाते हैं। खरीदें और बिल मेडिकल कॉलेज को भेजे जाएंगे। सीनियर के साथ बेहतर सामंजस्य हो, इसके लिए समझाइश होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments