Tuesday, September 28, 2021
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इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस : राष्ट्रपति ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से संवैधानिक ढांचा मजबूत हुआ, सीजेआई बोले- हमारी न्यायपालिका दुनिया के लिए उम्मीद की किरण

नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस (आईजेसी) में पहुंचे। उन्होंने लैंगिक समानता हासिल करने में न्यायपालिका की कोशिशों की तारीफ की। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा- बड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से न सिर्फ कानून का राज स्थापित हुआ, बल्कि देश के संवैधानिक ढांचे को भी मजबूती मिली है। वहीं, चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा- उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का काम केवल यह देखना नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि हमारा लक्ष्य शोषित लोगों को सशक्त बनाना है।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा- सुप्रीम कोर्ट देश में सामाजिक बदलाव का अगुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक पहले कार्य स्थल पर यौन शोषण रोकने से लेकर इसी महीने सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने तक कई अहम आदेश सुनाए। इस तरह के आदेश भारत में सामाजिक बदलाव का संदेश देते हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा- हम सबको न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध

चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा- फैसला वक्त दुनिया के सभी जज सबको न्याय देने की प्रतिज्ञा से बंधे होते हैं। हमारे सामने आए एक केस में हमने फैसला दिया कि मौजूदा पीढ़ी को अगली और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ और सुरक्षा से खिलवाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को दुनियाभर की अदालतों में मिसाल के तौर पर लिया गया है। स्वतंत्र और विकसित देशों के बीच भारत ‘उम्मीद की किरण’ बनकर उभरा है।

अदालत के बाहर समझौते की कोशिश हो: राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा- विवाद खत्म करने के लिए समानांतर प्रक्रिया की तरफ बढ़ने से अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा। मध्यस्थता और समझाइश से लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय समस्या को प्रभावी तरीके से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा- भारत में अदालतें नई तकनीक अपना रही हैं। न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अदालतें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल भी कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले 9 भाषाओं में उपलब्ध होंगे: चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति की मंशा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों को 9 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की शुरुआत कर दी है। इससे गरीब और वंचित लोगों की न्याय प्रक्रिया तक पहुंच आसान होगी।

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